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world Diabetes Day : विश्व मधुमेह दिवस आज : युवा भी आ रहे डायबिटीज रोग की चपेट में

Binod Pandey

Publish: Nov 14, 2019 14:00 PM | Updated: Nov 14, 2019 14:00 PM

Mumbai

भारत के नागरिकों के लिए यह संकेत गंभीर चिंता का कारण बन रहे हैं कि हमारा देश ग्लोबल डायबिटिक कैपिटल ( Global Diabetic Capital ) बनने की ओर अग्रसर है। चौंकाने वाले तथ्य तो यह भी हैं कि हमारी जीवन शैली ( Life Style ) ही इसके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदार है। रोजमर्रा के भोजन में फास्ट फूड ( Fast Food ) की वृद्धि और अधिक गतिहीन जीवन इस रोग की संभावना को बढ़ाता है।

मुंबई. बॉडी मास इंडेक्स 23 पॉइंट ऊपर तक बढ़ जाता है, जिससे डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है।
मोटापा, अनियमित आहार, बढ़ता शहरीकरण और तनाव इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। हाल यह हैं कि आज 20 से 30 वर्ष के भारतीय युवा टाइप-2 डायबिटीज का तेजी से शिकार हो रहे हैं। डायबिटीज की प्रारंभिक शुरुआत इन युवाओं को उनके जीवन के सबसे उत्पादक वर्षों में लंबे समय तक जटिलताओं का सामना कराती हैं। इन युवाओं के शारीरिक और यौन विकास, शिक्षा, रोजगार, विवाह और गर्भावस्था जैसे मुद्दे डायबिटीज से सीधे प्रभावित होते हैं। डायबिटीज शरीर में ऊर्जा देने के लिए आवश्यक तत्वों की प्रक्रिया को बाधित करता है। हमारे खाए भोजन से ग्लूकोज उत्पन्न होने लगता है। इंसुलिन की मात्रा को तेजी से घटा देता है, जो अग्न्याशय (पैनक्रियाज़) में निर्मित होता है। यह खून में शर्करा के स्तर (शुगर लेवल ) को बनाए रखता है। डायबिटीज इसी इंसुलिन की कमी के कारण होता है। पीडि़त को जीवित रखने के लिए रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन देना पड़ता है। दवाओं और वायरल संक्रमणों के अलावा गर्भावस्था के दौरान भी डायबिटीज रोग हो सकता है।

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ये भी हैं इस रोग के कारण
डायबिटीज की जटिलताएं बीमारी की अवधि, नियंत्रण के स्तर, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान जैसे कारकों पर निर्भर करती हैं। आमतौर पर प्रभावित अंगों में हृदय, आंखें, तंत्रिकाएं और गुर्दे शामिल होते हैं। युवावस्था में डायबिटीज लंबाई, यौवन में गड़बड़ी, बांझपन, गर्भपात और विकृत बच्चों का कारण बन सकती है। सभी डायबिटीज रोगियों में उच्च रक्तचाप और हाइपर कोलेस्ट्रोलेमिया विकसित होने का खतरा अधिक होता है।

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क्या करें बचाव के लिए
डायबिटीज होने पर रक्त शर्करा को आहार, मौखिक दवाओं, इंसुलिन से नियंत्रित किया जाना चाहिए। फास्टिंग जांच में रक्त शर्करा 110 मिलीग्रामत्न और दोपहर के भोजन के बाद रक्त शर्करा 140 मिलीग्रामत्न होना चाहिए। ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन, दीर्घकालिक नियंत्रण का पैरामीटर है, जिसे हर 3 महीने में किया जाना चाहिए। इसे 7त्न से कम बनाए रखा जाना चाहिए। रक्तचाप को नियंत्रित किया जाना चाहिए। शराब और धूम्रपान पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है।

गेस्ट राइटर : डॉ. झंखना वी. शेट्टी, एमएससी (न्यूट्रिशन), डियाबिटीज शिक्षक

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