स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

आरपीएफ के पास जादू की छड़ी, दो घंटे में समस्या हल

Arun lal Yadav

Publish: Sep 13, 2019 16:50 PM | Updated: Sep 13, 2019 16:50 PM

Mumbai

दो घंटे में होगा शिकायत का समाधान, अब आरपीएफ का कॉल सेंटर करेगा लोगों की मदद

अरुण लाल
मुंबई. सेंट्रल रेलवे के मुंबई डिवीजन की आरपीएफ ने रेल मदद के तहत एक कॉल सेंटर बनाने की योजना बनाई है। आरपीएफ के कॉल सेंटर में 37 लोग काम करेंगे, जिनमें आरपीएफ के भी सात लोग शामिल होंगे। सफर के दौरान यात्री आरपीएफ के कॉल सेंटर में अपनी शिकायत पहुंचा सकते हैं। कॉल सेंटर में बैठे कर्मचारी यात्रियों की शिकायतों का समाधान करेंगे। इससे शिकायतों के शीघ्र समाधान का लाभ यात्रियों को होगा। कॉल सेंटर के संचालन के लिए आरपीएफ एक वर्ष के लिए एक ठेकेदार नियुक्त करेगी, जो 30 लोगों की मदद से यात्रियों की शिकायतों को दूर करने का कार्य करेगी।
गौरतलब है कि रेलवे में अपराधों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने सभी मंडलों को रेल सुरक्षा को लेकर ठोस उपाय करने का निर्देश दिया है। इसी के तहत रेल मदद ऐप का निर्माण हुआ है। इस ऐप की मदद से यात्रियों की शिकायत दो घंटे के भीतर हल करने की तैयारी की गई है।

182 के लिए नियुक्त होंगे 37 लोग

आरपीएफ के पास जादू की छड़ी,  दो घंटे में समस्या हल

आरपीएफ के मंडल सुरक्षा आयुक्त अरुण त्रिपाठी ने बताया कि हम रेल मदद और 182 के लिए 37 लोगों को नियुक्त करने जा रहे हैं। वर्तमान में हमारे पास 182 की छह लाइनें हैं, जिन पर आई शिकायतों को हमारे 15 लोग हल कराने का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि हमने इसके लिए एक ठेकेदार नियुक्त करने का प्रस्ताव बनाया है।
24 घंटे होगा काम

आरपीएफ के पास जादू की छड़ी,  दो घंटे में समस्या हल

त्रिपाठी ने बताया कि ठेकेदार 30 लोगों की मदद से 24 घंटे यात्रियों की शिकायतों पर नजर रखेगा। ठेकेदार के लोग छत्रपति शिवाजी टर्मिनस में बने कॉल सेंटर में बैठेंगे। यह लोग यात्रियों की शिकायतें हमें देंगे। उन्होंने बताया कि कॉल सेंटर से शिकायत मिलने के बाद हम दो घंटे के भीतर उसका समाधान करेंगे। यदि किसी कारण से दो घंटे में किसी यात्री की शिकायत हल नहीं होगी तो सीधे मैसेज वरिष्ठ विभागीय सुरक्षा आयुक्त को जाएगा और उनकी लॉगिन पर यह मामला पेंडिंग दिखेगा।
60 से 70 लाख खर्च
त्रिपाठी ने बताया कि इसके लिए ठेकेदार के 30 लोगों के साथ आरपीएफ के सात लोग भी तैनात किए जाएंगे। इनमें से चार रेल मदद और तीन 182 के लिए कार्य करेंगे। ठेकेदार के लोग आरपीएफ का सोशल मीडिया भी मैनेज करेंगे। साथ ही यह लोग आरपीएफ के ट्वीटर को भी मॉनिटर करेंगे। इस कार्य के लिए रेलवे एक वर्ष में 60 से 70 लाख रुपए खर्च करेगी। यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है। मंजूरी मिलने के अक महीने के भीतर कॉल सेंटर काम शुरू कर देगा।