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घोटाला: आवास विकास मंत्री के आदेश पर कार्रवाई नहीं

Rohit Kumar Tiwari

Publish: Aug 18, 2019 12:24 PM | Updated: Aug 18, 2019 12:24 PM

Mumbai

  • म्हाडा अध्यक्ष का ऑर्डर कूड़ेदान में
  • अधिकारियों को बचाने में जुटी म्हाडा
  • विवादित भूखंड पर निर्माण के चलते म्हाडा को हुआ 2000 करोड़ का नुकसान

- रोहित के. तिवारी
मुंबई. अंधेरी (पश्चिम) के ओशिवरा इलाके में स्थित आदर्श नगर में म्हाडा के करोड़ों की जमीन पर हुए अवैध निर्माण के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय म्हाडा उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है। आवास विकास मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने 9,500 वर्ग मीटर के भूखंड पर हो रहे निर्माण की रिपोर्ट जुलाई के भीतर मांगी थी, जो उन्हें अब तक नहीं मिली है। म्हाडा अध्यक्ष ने मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था, जिसे कूड़ेदान में डाल दिया गया है। जानकारों का कहना है कि उक्त भूखंड से म्हाडा को 2000 करोड़ रुपए की आय हो सकती थी।
पत्रिका में इस मामले के खुलासे के बाद म्हाडा मुख्यालय के अधिकारी सकते में हैं। लेकिन, कोई कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। मंत्रालय से आदेश के बावजूद मामले की जांच भी सही दिशा में नहीं बढ़ रही है। भूखंड पर अवैध निर्माण से न सिर्फ म्हाडा को अरबों रुपए का नुकसान हुआ है, बल्कि मूल मालिक सहित भूखंड पर मालिकाना हक रखने वाले 21 परिवार भी न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। भूखंड मालिकों का आरोप है कि बिल्डर के साथ म्हाडा के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत है।


यह है मामला
बिल्डर की ओर से ओशिवरा के सर्वे नंबर 33 के हिस्सा नंबर 8 के अलावा भी अवैध कागजात और फर्जी पॉवर ऑफ अटार्नी के दम पर सीटीएस नंबर 9, 33/10, 35/4, सीटीएस नंबर 13 और 15 समेत कुल 9,500 वर्ग मीटर जमीन हथिया ली गई। विवादित भूखंड पर मर्करी एवं मिलेनियम नामक बिल्डिंग बनाई जा रही है, जिनके ए और बी विंग में 208 फ्लैट बनाए गए हैं। हैरत की बात यह कि इस पूरे प्रकरण में बांबे हाईकोर्ट ने भूखंड के वारिसदार झुबेर इब्राहिम, हुमायूं अब्दुल रजाक, मसूद अब्दुल रजाक समेत मालिकाना हक रखने वाले कुल 21 लोगों के पक्ष में फैसला सुनाया था।

अभी समझ रहे मामला
म्हाडा मुंबई बोर्ड के सीओ राधाकृष्णन सुब्रमनियन ने कहा कि पहले हम पहले मामले को समझेंगे। इसके बाद विभागीय जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए भूखंड के मूल मालिकों के साथ न्याय होगा।