स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

SRA में धांधली, विकास के नाम पर हटाये गए टेनेंट्स को नहीं मिल रहा है किराया...

Rohit Kumar Tiwari

Publish: Jul 20, 2019 12:04 PM | Updated: Jul 20, 2019 12:04 PM

Mumbai

  • डेवलपर और अधिकारी की मिलीभगत से दर दर भटकने को मजबूर किरायदार
  • नागरिकों का ऊंचे टॉवर में रहने का सपना नहीं हो रहा साकार

- रोहित के. तिवारी
मुंबई. देश को आर्थिक राजधानी में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका अपना घर के सपने को साकार करने ले लिए जहां सरकार से लेकर म्हाडा समेत अन्य एजेंसियां अग्रसर हैं, वहीं झोपड़पट्टी पुनर्वास योजना (एसआरए) के तरह धांधली उजागर हुई है। साथ ही विकास के नाम पर हटाये गए टेनेंट्स को अब दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके तहत मुंबई में बांद्रा पूर्व के शास्त्री नगर में जो एसआरए के तहत आकृति डेवलपर्स के पास था। उसने 100 से अधिक परिवारों के किराया राशि बकाया रखा है, जिसके चलते करीब 400 लोगों को विभिन्न दिक्कतों का सामना करने को मजबूर होना पड़ रहा है। किरायदारों की बकाया राशि अब हजारों में नहीं, बल्कि लाखों की संख्या में पहुंच गई है। वहां के रहवासियों ने इस बात की सूचना एसआरए को भी दी थी, लेकिन उनके कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। इसमें झोपड़ीवासी के सामने किराया चुकाने को लेकर विकट परिस्थिति उत्पन्न हो गई है।

 

टाल-मटोल कर रहा डेवेलपर...
विदित हो कि अनेक वर्षों से झोपड़पट्टी में रहने वाले नागरिक ऊंचे टॉवर में रहने का सपना देख रहे थे। इसे हकीकत में तब्दील करने के लिए सन 2006 में आकृति डेवलपर्स को इसके पुनर्विकास के लिए चुना गया। यहां 550 में से 176 नागरिक अपात्र हैं, जबकि 384 लीगल पाए गए। साथ ही 3 साल में पूरी तरह से इमारत खड़ा करने का वादा भी किया गया था। तब शुरुआती दौर में बिल्डर को ओर से 6000 प्रतिमाह और कुछ डिपॉजिट राशि दी गई थी। कुछ वर्षों तक तो रकम समय पर दी गई, लेकिन बाद में बकाया की रकम देने में डेवलपर टाल-मटोल करने लगा, जिससे घर का किराया नागरिक को खुद की जेब से देने को मजबूर होना पड़ा। इस मामले में जहां शास्त्री नगर के रहिवासी बेघर हो गए, वहीं डेवलपर्स मालामाल हो गए।

 

अधर में लटका काम...
उल्लेखनीय है कि16 साल होने के बावजूद एसआरए के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है और जो इमारत तैयार है, उनकी हालत भी खस्ता बताई जा रही है। लीकेज की समस्या भी जस की तस बनी हुई है। रहिवासियों की मानें तो बिल्डर की ओर से अवैध रूप से कुछ घूसखोरों को फ्लैट बेचे गए हैं। वहां के नागरिकों का कहना है कि बाथरूम का पानी नीचे वाले फ्लैट में गिरता है। साथ ही 13 मंजिल इमारत में लिफ्ट की समस्या भी बनी हुई है। हर तरफ से इमारत जर्जर हो रही है और ड्रेनेज का गंदा पानी भी बहता रहता है। इस बाबत एसआरएके इंजीनियर उदय मराठे की शिकायत की गई, लेकिन डेवलपर और मराठे की मिली भगत के चलते यह काम अधर में लटका हुआ है।

 

सुलझाई जा रहीं दिक्कतें...
हमने रहवासियों के साथ में कोई धोखाधड़ी नहीं की है। समय से उनको किराया भी दिया गया और शिकायत मिलने पर उनके रहने की व्यवस्था भी सुचारू रूप से की गई। जबकि अति जर्जर इमारत में रह रहे लोगों को अन्य बिल्डिंगों में शिफ्ट भी किया गया। हालांकि निर्मित इमारतों में आई दिक्कतों को सुलझाया जा रहा है।
- राजेश बबलादी, बिल्डर, आकृति डेवलपर