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राम भरोसे मुंबई रेलवे की महिला यात्रियों की सुरक्षा

Arun lal Yadav

Publish: Dec 06, 2019 17:00 PM | Updated: Dec 06, 2019 17:03 PM

Mumbai

80 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। 30 से 35 प्रतिशत महिलाएं करती हैं सफर


अरुण लाल
मुंबई. सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे के मुंबई डिवीजन के 210 रेलवे स्टेशनों पर सिर्फ 300 महिला आरपीएफ कर्मी तैनात हैं। इनमें भी बड़े पैमाने पर महिलाएं ऑफिस वर्क में लगती हैं। सेंट्रल वेस्टर्न रेलवे में रोज 80 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इनमें से 30 से 35 प्रतिशत महिलाएं सफर करती हैं। इतने बड़े पैमाने पर यात्री होने के बावजूद महिला कर्मियों की कमी से आरपीएफ को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और लोगों की सुरक्षा भी दांव पर है। बहुत से स्टेशनों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं दिखता।

बता दें कि रेलवे में 2018 में रेप के 11 मामले और 2019 में अब तक छह मामले सामने आए हैं। वर्ष 2018 में मॉलेस्टेशन के 158 मामले दर्ज किए गए, इनमें 2019 में 109 मामले दर्ज किए गए। सेंट्रल रेलवे में 2017 में 639 शिकायतें की गईं। 2018 में 879 और अक्टूबर तक 596 मामले में शिकायतें की गईं। वेस्टर्न रेलवे में नवंबर तक 506 शिकायतें आईं। इनमें हेल्पलाइन में 401 और ट्यूटर में 104 शिकायतें आईं।


वेस्टर्न में 104 रेलवे स्टेशनों पर तैनात हैं 179 महिलाकर्मी
वेस्टर्न रेलवे के कुल 104 रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा के लिए (इनमें 40 लोकल स्टेशन हैं) आरपीएफ के पास कुल 1535 जवान/ अधिकारी हैं। इनमें से 82 महिला आरपीएफ कर्मी हैं। इसके साथ ही आरपीएफ को एमएसएफ के 529 जवान मिले हुए हैं। इनमें 97 एमएसफ की महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं।

सेंट्रल रेलवे के 106 स्टेशनों पर तैनात हैं 121 महिलाकर्मी
सेंट्रल रेलवे के 106 रेलवे स्टशनों (इनमें 80 लोकल ट्रेन वाले स्टेशन हैं) में 1700 आरपीएफ कर्मी तैनात हैं। इनमें 86 महिला आरपीएफ कर्मी तैनात हैं। इसके साथ ही आरपीएफ को एमएसफ के 529 जवान भी मिले हुए हैं। इनमें 35 महिला पुलिस कर्मी शामिल हैं।

वेस्टर्न में महिला कोच से पकड़े गए 12 हजार 994 यात्री
वेस्टर्न रेलवे ने नवंबर माह तक लोकल ट्रेनों के महिला डिब्बों में सफर करने वाले 12 हजार 994 लोगों को पकड़ा। आरपीएफ ने उनके पास से 28 लाख 64 हजार 50 रुपए जुर्माना वसूल किया।

सेंट्रल में महिला कोच से पकड़े गए 2 हजार 912 यात्री
सेंट्रल रेलवे ने अक्टूबर माह तक लोकल ट्रेनों के महिला डिब्बों में सफर करने वाले 2 हजार 912 लोगों को पकड़ा। आरपीएफ ने उनके पास से 9 लाख 41 हजार 100 रुपए जुर्माना वसूल किया।

सेंट्रल मेें तैनात हैं
रेलवे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भायखला, दादर, कुर्ला और घाटकोपर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर एक भी महिला आरपीएफ कर्मी नहीं होने से इन स्टेशनों की महिला सुरक्षा राम भरोसे हो रही है। बता दें कि दादर में एक महिला सब इंस्पेक्टर हैं, जो दादर के एक लाख से भी ज्यादा महिलाओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। वहीं भायखला में भी एक महिला सब इंस्पेक्टर हैं, जो यहां के हजारों की संख्या में महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए तैनात हैं। कहने को इनमें से एक दो स्टेशनों पर एमएसएफ और होमगार्ड की एक-दो महिला कर्मियों को तैनात किया गया है। पर नियमों की माने तो एमएसएफ को सिर्फ स्टेशन और पुलों पर भीड़ के संतुलन बनाए रखने में उपयोग किया जा सकता है। कुर्ला और घाटकोपर में किसी तरह की महिला आरपीएफ कर्मी नहीं हैं। इसके बाद ठाणे, मुलुंड, डोम्बिवली और कल्याण स्टेशनों पर भी महिलाओं की संख्या बहुत कम है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में घाटकोपर में लगभग चार लाख यात्री, कुर्ला में 6 लाख यात्री, दादर में लगभग 7 लाख यात्री और भायखला में लगभग देढ़ लाख यात्री यात्रा करते हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं होतीं हैं।

यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी रेल सुरक्षा बल पर
रेलवे के नियमों की माने तो रेलवे से यात्रा करने वाले हर यात्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ की होती है। नियम कहते हैं कि किसी भी महिला यात्री की किसी समस्या के लिए महिला कर्मचारी तैनात किया जाए। पर सेंट्रल रेलवे से यात्रा करने वाली महिलाओं की परेशानियों को लेकर किसी भी तरह की सावधानी नहीं बरती गई।

तबादले के बाद बढ़ी परेशानी
सेंट्रल रेलवे के आरपीएफ कर्मचारी हाल ही मेंं हुए तबादले को इसका कारण मानते हैं। लोग कह रहे हैं कि बिना सोचे समझे पहले से ही महिला कर्मचारियों की कमी झेल रही आरपीएफ से बड़े पैमाने पर तबादले किए गए। जो लोग यहां से गए उनके बदले में महिला आरपीएफ कर्मी आईं नहीं हैं। ऐसे में बची हुई महिला कर्मचारियों के ऊपर भी काम का दबाव बढ़ते जा रहा है।

महिला टीसियों को भारी परेशानी
एक महिला टीसी ने बताया कि हम कई बार बिना टिकट चलने वाली महिलाओं को पकड़ते हैं, ऐसे में महिला आरपीएफ कर्मी न होने के चलते हमें लंबी बहस करनी पड़ती है। ऐसे में हमारा काम बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। जो काम आरपीएफ की मदद से पांच मिनट में हो सकता है, उसके लिए हमें यात्री से 45 मिनट से एक घंटे जूझना पड़ता है।

सेंट्रल रेलवे आरपीएफ के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के के अशरफ ने बताया कि हमने महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके लिए हमने महिलावाहिनी को महिलाओं की सुरक्षा में लगाया है। इसके अलावा हम ऑपरेशन विश्वास के तहत महिला डिब्बों में यात्रा करने वाले पुरुष यात्रियों के खिलाफ कठोर कर्रवाई कर रहे हैं। सेंट्रर रेलवे महिला यात्री सहित हर यात्री की सुरक्षा को लेकर सजग है।

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