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Dangerous Sign : मुंबई के समुद्र में 2050 तक मछलियों से ज्यादा तैरेगी प्लास्टिक

Rajesh Kasera

Publish: Sep 10, 2019 22:21 PM | Updated: Sep 10, 2019 22:21 PM

Mumbai

  • Mumbai News : भविष्य की भयावह तस्वीर
  • आइआइटी बॉम्बे की रिपोर्ट ने चेताया, मिलेंगे खतरनाक परिणाम
  • 70 साल में 1.5 से 350 मिलियन मैट्रिक टन पहुंचा प्लास्टिक उत्पादन

मुंबई. समुद्र में लगातार बढ़ रहे प्लास्टिक कचरे से समुद्रीय जलीय जीवन के साथ पर्यावरण पर भी भयावह खतरा बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, किनारे पर बहकर आया प्लास्टिक कचरा तक भावी पीढ़ी को भारी पड़ेगा। आइआइटी बॉम्बे के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर रंजीत विष्णुराधन और विभाग प्रमुख टीआई एल्डो की रिसर्च ने ऐसे चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। शोध में चेताया गया है कि यदि इसी स्तर प्लास्टिक का इस्तेमाल होता रहेगा तो 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज़्यादा प्लास्टिक तैरता दिखाई देगा।

प्रो. विष्णुराधन के अनुसार दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1950 से दुनिया में प्लास्टिक का उपयोग तेजी से बढ़ा है । 1950 में प्लास्टिक का ग्लोबल उत्पादन 1.5 मिलियन मैट्रिक टन था, जो 2018 तक 350 मिलियन मैट्रिक टन हो गया। इनमें भी आधा प्लास्टिक गत 10 वर्ष में उत्पादित किया है। इसमें भी एक बार उपयोग के बाद आधा प्लास्टिक हमारे सामने से गायब हो जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यह कचरा जाता कहा है? इसको समुद्र में डाल दिया जाता है। शोध रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुल प्लास्टिक उत्पादन का 50% हिस्सा सिंगल यूज़ प्लास्टिक का होता है। समुद्र में जाने वाले कचरे का 80% प्लास्टिक का होता है । शोध रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे करीब 700 मरीन स्पीशीज के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है । साथ ही प्लास्टिक में मौजूद मीथेन और इथीलीन सोलर रेडिएशन की वजह से ग्रीन हाउस गैसें होती हैं, जिससे आने वाले सालों में पर्यावरण पर विपरीत होंगे ।

स्वास्थ्य पर हो रहे प्रतिकूल प्रभाव


प्लास्टिक के टुकड़े रगड़ खाकर मैक्रो, माइक्रो और नैनो आकार में बदल जाते हैं । मैक्रो प्लास्टिक तो आंखों से देख सकते हैं लेकिन माइक्रो और नैनो टुकड़े समुद्रीय जीवन में घुल जाते हैं और और जलचरों की फूड चेन का हिस्सा बन जाते हैं । ऐसे में समुद्री इलाकों के लोग सी-फूड खाते हैं तो उनके शरीर में प्लास्टिक के महीन टुकड़े एकत्र होकर किडनी-लीवर फेलियर, इंटेस्टाइन में दिक्कत जैसे गंभीर रोगों का कारण बनते हैं ।

टनों कचरा पड़ा है समुद्र के किनारों पर


मुंबई में हर साल मानसून के दौरान ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, जब समुद्री इलाकों में प्लास्टिक का कचरा बड़ी मात्रा में बाहर निकल आता है । इसे हटाने में बीएमसी के सैकड़ो कर्मचारी दिन-रात मेहनत करते हैं । यही कचरा जमीन को बंजर भी बना रहा है । मुंबई के आस-पास बड़ी संख्या ने मैन्ग्रोव क्षेत्र है, बाढ़ के खतरे से बचाने में अहम भूमिका निभाता है। प्लास्टिक इसको भी बर्बाद कर रहा है ।