स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

OMG : मुंबई में बनी पनडुब्बी दुश्मनों के जंगी जहाजों के छुड़ाएगी छक्के

Rajesh Kasera

Publish: Sep 10, 2019 21:37 PM | Updated: Sep 10, 2019 21:37 PM

Mumbai

  • Mumbai News : नौसेना की ताकत को बढ़ाएगा खंडेरी सबमरीन और स्टेल्थ फ्रिगेट
  • नौ सेना के बेड़े में 28 को शामिल होंगे दो नए हथियार
  • सबमरीन फ्रांस की मदद से बन रही हैं, जो दुनिया की बेहतरीन तकनीक से लेस है

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

मुंबई. भारत की समुद्री ताकत को कई गुना बढ़ाने का काम मुंबई में होने जा रहा है। मझगांव डॉक लिमिटेड में तैयार हो रही छह आइएनएस पनडुब्बियां (सबमरीन) दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में सेना की मददगार बनेंगी। ये सबमरीन फ्रांस की मदद से बन रही हैं, जो दुनिया की बेहतरीन तकनीक से लेस मानी जाती है। यह पनडुब्बी समुद्र में 37 किलोमीटर प्रति घंटे यानी 20 नॉटिकल माइल और सतह पर 20 किलोमीटर (11 नॉटिकल माइल) की रफ्तार से चल सकती है। भारतीय नौ सेना के बेड़े में आगामी 28 सितंबर को इस पनडुब्बी के साथ दो नए और मजबूत हथियार शामिल हो रहे हैं। इनमें भारत में बनी कलवरी श्रेणी की सबमरीन आइएनएस खंडेरी के साथ स्टील्थ फ्रिगेट (जंगी जहाज) को समुद्र में उतारा जाएगा। सबमरीन की तरह ही जंगी जहाज भी शिवालिक श्रेणी का पहला हिस्सा होगा। आने वाले समय में ऐसे सात फ्रिगेट और तैयार होंगे, जिनमें से चार मुंबई स्थित मझगांव डॉक में और तीन को कोलकाता के जीआरइसी में बनेंगे। अापको बता दें कि नौ सेना के बेड़े में 14 दिसंबर 2017 को पहला सबमरीन शामिल किया गया था। ऐसे छह और सबमरीन मझगांव डॉक में तैयार हो रहे हैं।

समुद्र में बेहद खतरनाक हथियार है पनडुब्बी


आइएनएस खंडेरी सबमरीन एक बार में 12 हजार किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है । समुद्र के अंदर किसी सबमरीन को तबाह कर सकता है। इतना ही नहीं, समुद्र की सतह पर जंगी जहाज़ों को निशाना बना सकता है। खुफिया जानकारियों और समुद्र पर नजर रखने के साथ ही दुश्मन के जहाज़ों के लिए समुद्र में सुरंगे लगाने का काम तक कर सकता है। इससे तारपीडो और समुद्र में मौजूद जहाज़ों को तबाह करने के लिए एंटी शिप मिसाइलें तक दागी जा सकती हैं।

स्टील्थ फ्रिगेट से जुड़ी ब्रह्मोस मिसाइलों की ताकत


भारत ने शिवालिक श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट को तैयार करने का काम वर्ष 2000 में शुरू किया था। इसके बाद 2010 से 2012 तक तीन फ्रिगेट नौसेना में शामिल हुए, जो अत्याआधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। दुश्मनों के रडार भी इसे देख नहीं पाते। इसमें दुश्मन के हमलों से बचने के लिए बराक मिसाइलों के अलावा ब्रह्मोस मिसाइलें भी लगी हैं। इनसे दुश्मन के जहाज़ों के अलावा ज़मीन के ठिकानों पर भी सटीक हमला हो सकता है। ये 52 किलोमीटर प्रति घंटे यानी 28 नॉटिकल माइल की रफ्तार से चल सकते हैं। एक बार में लगभग 10 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर सकते हैं। इनमें 2 हेलीकॉप्टर भी तैनात किए जा सकते हैं ।