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मुंबई महानगर क्षेत्र में प्रति 66 हजार लोगों पर एक सरकारी दवाखाना

Dheeraj Singh

Publish: Sep 17, 2019 20:45 PM | Updated: Sep 17, 2019 20:45 PM

Mumbai

* मुंबई महानगर क्षेत्र में प्रति 66 हजार लोगों पर एक सरकारी दवाखाना ( government dispensary).


*मुंबई के लोगों से संबंधित स्वास्थ्य रिपोर्ट (Health report) जारी.

*प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के पुनर्निर्धारण और नवीकरण की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है.


पत्रिका न्यूज नेटवर्क

मुंबई.प्रजा फाउंडेशन की ओर से मंगलवार को द स्टेट ऑफ हेल्थ इन मुंबई विषय पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई महानगर क्षेत्र में प्रति 66 हजार लोगों पर एक सरकारी दवाखाना है। जबकि राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन प्रति 15 हजार की जनसंख्या पर एक सरकारी दवाखाना होने की हिमायत करता है।
रिपोर्ट में सरकारी दवाखानों और महानगर में स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के पुनर्निर्धारण और नवीकरण की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है और इस पर गहरा प्रकाश डाला गया है। मुंबई मनपा अधिनियम के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध कराना मनपा का एक अपरिहार्य ड्यूटी है। प्रजा फाउंडेशन के निदेशक मिलिंद म्हस्के ने बताया कि वर्ष 2018 में मुंबई से मिले सरकारी ओपीडी मरीजों के आंकड़े बताते हैं कि कुल ओपीडी मरीजों में से 76 प्रतिशत अस्पतालों में गए जबकि केवल 24 दवाखानों में गए। मनपा की ओर से बजट और मानव संसाधन आवंटन पर नजर डालें,तो स्पष्ट होता है कि दवाखानों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। वर्ष 2017-18 में मनपा हेल्थ बजट का 74 प्रतिशत हिस्सा अस्पतालों पर खर्च किया गया जबकि केवल 26 प्रतिशत राजस्व दवाखानों पर खर्च हुआ। मानव संसाधन के संदर्भ में बात की जाए तो प्रति दवाखाना औसतन केवल एक ही चिकित्सा कर्मचारी उपलब्ध हैं। मुंबई में किए गए एक घरेलू सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 73 प्रतिशत उत्तरदाताओं को किसी भी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना के बारे में पता नहीं था चिकित्सा संबंधी लागत पर खर्च की गई अनुमानित वार्षिक आय 2019 में 9.7 प्रतिशत थी,जो मुंबई में प्रति व्यक्ति आय के आधार पर प्रति वर्ष,प्रति परिवार 98 214 रुपए बैठती है।
मुंबई के सरकारी अस्पतालों और दवाखानों में दर्ज की जाने वाली बीमारियों में वर्ष 2018 के दौरान अतिसार के 11,505,टीबी 768 और मधुमेह 1831 के सबसे अधिक मामले एल वार्ड में देखे गए। शहर में सबसे ज्यादा मौतें डायबिटीज के कारण हुई प्रतिदिन 26 मौतें (2017 में 9525) तथा संसर्गजन्य रोगों के मामले में सबसे ज्यादा मौते टीबी से हुई,15 मौतें प्रतिदिन (2017 में 5449) दर्ज की गई थी।