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ओमाईगॉड: म्हाडा से अपनी जिंदगी की इसलिए भीख मांग रहे हजारों माहुलवासी?

Rohit Kumar Tiwari

Publish: Sep 15, 2019 14:45 PM | Updated: Sep 16, 2019 10:16 AM

Mumbai

देश की आर्थिक राजधानी ( Financial capital ) मुंबई के चेंबूर ( Chembur ) में नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं माहुल माहुल गांव ( Mahul Gaon ) के रहिवासी, प्रदूषण ( Pollution ) में रहने को मजबूर हमारों लोग, डेवलपर बी. जी. शिर्के ( Developer B. G. Shirke ) की उदासीनता की शिकार होते हजारों रहिवासी ( Resident ), युवा सेना अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ( Aditya Thackeray ) भी स्थानीय वासियों की लाचारी का कर चुके हैं सपोर्ट, म्हाडा अध्यक्ष ( MHADA President ) उदय सामंत ने फिर दिया आश्वासन

- रोहित के. तिवारी
मुंबई. देश की आर्थिक राजधानी में माहुल वासी वर्षों से अपनी जान की दुहाई और सलामती के लिए म्हाडा से बारंबार मांग कर रहे हैं। नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर माहुल वासियों की बदहाली की ओर म्हाडा का ध्यान आकर्षित करने के लिए युवा सेना के अध्यक्ष अदित्य ठाकरे भी गोराई स्थित म्हाडा के ट्रांजिशन कैंप में 300 घरों को दिलाने की मध्यस्थता कर चुके हैं। बेशुमार प्रदूषण के चलते महुलवासियों को विभिन्न बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है और अपनी जान की दुहाई मांगते हुए स्थानीय नागरिकों ने म्हाडा कार्यालय के बाहर घर की मांग के लिए प्रदर्शन भी किया। इसके बावजूद महुलवासियों को सिर्फ आश्वासनों से ही दिलासा देने का काम किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर गोराई में संक्रमण शिविर होम को डेवलपर्स बी. जी. शिर्के ने डेवलप किया था, जबकि वर्षों बाद भी डेवलपर की ओर से ओसी तक देने का प्रयत्न तक नहीं किया गया। कई परियोजना पीड़ितों को मुंबई के माहुल इलाके में घर उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन यहां के नागरिकों को कई सालों से यहां रहना आग की लपटों में खेलने जैसा लग रहा है।

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बेहद खतरनाक है माहुल में रहना...
विदित हो कि माहुल क्षेत्र रहने योग्य किसी भी तरह से नहीं है। इसकी पुष्टि मुंबई उच्च न्यायालय और भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) मुंबई भी कर चुके हैं। माहुल में औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से पिछले दो वर्षों में प्रदूषण के चलते 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, यहां निवास करने को मजबूर 5 हजार से अधिक परिवार के प्रत्येक एक व्यक्ति प्रदूषण से संबंधित बीमारियों से पीड़ित है। अस्थमा, कैंसर, टीबी, पैरालिसिस, घातक त्वचा रोग आदि जैसी जानलेवा बीमारियों से महुलवासी पीड़ित हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसी विपरीत स्थितियों में माहुल में रहना बेहद खतरनाक है।

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वर्षों बाद भी घरों की ओसी नहीं...
उल्लेखनीय है कि हर दिन बीमारी और मौत के बीच रहने को मजबूर माहुल वासियों ने अक्टूबर 2018 में 'जीवन बचाओ आंदोलन' कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सुधि लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा। हालांकि शिवसेना युवा सेना अध्यक्ष आदित्य ठाकरे के हस्तक्षेप के बाद म्हाडा में प्रभावित लोगों को 300 घर देने की घोषणा तो की थी, लेकिन बिल्डर शिर्के की उदासीनता के चलते उन घरों की अभी तक ओसी तक नहीं है। वहीं निवासियों ने म्हाडा के 300 घर गोराई में देने के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन एक साल के बाद नगरपालिका के प्रशासन में देरी को लेकर लोगों ने नाराजगी व्यक्त की और अभी भी उनके घरों का कब्जा नहीं मिला है। वहीं माहुल वासियों ने म्हाडा अध्यक्ष उदय सामंत से मिलकर विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 300 लोगों को सूचीबद्ध किया किया और बिजली-पानी दोनों को जल्द उपलब्ध कराने की मांग की।

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डेवलपर ने नहीं किया कोई प्रयास...
गोराई स्थित संक्रमण शिविर के डेवलपर्स बी. जी. शिर्के डेवलपर ने बनाया है। वहीं 10 साल बाद भी यह सामने आया है कि इन घरों की कोई ओसी नहीं है। डेवलपर शिर्के को ओसी पाने के लिए प्रयास करने की आवश्यकता थी, जोकि बिल्डर की उदासीनता से नहीं हो सका। ओसी न होने के कारण नगरपालिका इन घरों को बिजली और पानी नहीं देता है। जबकि सुनने में आया है कि 300 घरों की ओसी न होने के बावजूद भी महानगर पालिका ने अब तक उन्हें अपने कब्जे में नहीं लिया है।

अगले हफ्ते में सुलझेगी समस्या...
म्हाडा ने माहुल निवासियों को 300 घर देने की बात कबूल की है। नगर आयुक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे मानवता के आधार पर इन घरों को बिजली और पानी उपलब्ध कराएं। म्हाडा को विश्वास है कि महुलवासियों की यह परेशानी अलगे हफ्ते में सुलझा ली जाएगी। घरों की ओसी के लिए जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
- उदय सामंत, अध्यक्ष, म्हाडा