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अब गीतकार शैलेंद्र के नाम पर चलेगी ट्रेन, आधुनिक भारत के कबीर थे शैलेंद्र

Rohit Kumar Tiwari

Publish: Sep 22, 2019 14:00 PM | Updated: Sep 22, 2019 14:00 PM

Mumbai

आधुनिक भारत के कबीर ( Kabir ) थे शैलेंद्र, 'धरती कहे पुकार के' पुस्तक का विमोचन, गीतकार शैलेंद्र ( Lyricist Shailendra ) के नाम पर चलाई जाए ट्रेन, जल्द ही रेल मंत्रालय ( Ministry of Railways ) को भेजा जाएगा पत्र, गीतकार शैलेंद्र ने कई ऑस्कर अवॉर्ड ( Oscar Award ) जीते हैं

मुंबई. रुड़की एवं मुंबई विश्वविद्यालय और शैलेंद्र मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से मुंबई में कालजई गीतों के रचयिता गीतकार शैलेंद्र के जीवन और उनके गीतों पर आधारित डॉ. इंद्रजीत सिंह की ओर से संपादित पुस्तक 'धरती कहे पुकार के' के लोकार्पण व चर्चा कार्यक्रम का आयोजन मुंबई यूनिवर्सिटी के कलीना कैंपस में शनिवार को किया गया। इस मौके पर पुस्तक के लेखक इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गीतकार शैलेंद्र ने कई ऑस्कर अवॉर्ड जीते हैं। साथ ही उन्होंने अपनी इस पुस्तक में कई कथाकारों को भी शामिल किया है। चर्चित कथाकार हरीश पाठक ने कहा कि शैलेंद्र आधुनिक भारत के कबीर थे। वहीं इंद्रजीत ने मौके पर मौजूद सभी लोगों से आग्रह किया है कि प्रेमचंद की गोदान सरीखे ही शैलेंद्र के नाम से भी या उनके कार्यों के नाम पर भी एक ट्रेन चलनी चाहिए, क्योंकि शैलेंद्र ने अपने जीवन काल में 10 साल तक एक कर्मचारी के रूप में रेलवे की सेवा भी की है। इसके लिए जल्द ही रेल मंत्रालय में आवेदन पत्र भेजा जाएगा।

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शैलेंद्र ने देश की मिट्टी को समझने का काम किया...

साथ ही साहित्यकार व मुंबई यूनिवर्सिटी के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय ने मुख्य वक्ता के तहत पूरे कार्यक्रम की कमान संभाली। उन्होंने कहा कि मुंबई यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है कि 1857 से अब तक 23 करोड़ 80 लाख लोगों को स्नातक की डिग्रियां दी गई है जबकि मुंबई यूनिवर्सिटी को 6 भारत रत्न से भी नवाजा जा चुका है। उपाध्याय ने आगे कहा कि शैलेंद्र ने देश की मिट्टी को समझने का काम किया है, जिसके चलते उनके गीतों में जो देश प्रेम नजर आता है, वह शायद ही अन्यत्र कहीं सुनने या देखने को मिलता हो।

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साहित्य से जुड़ी दी गईं जानकारियां...

इस अवसर पर लखनऊ के सुप्रसिद्ध कवि नरेश सक्सेना मुख्य अतिथि के हाथों दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। वहीं इस साहित्यिक प्रोग्राम की अध्यक्षता फिल्म कहानी व संवाद लेखक कमलेश पांडे ने की। विदित हो कि शिवानी कैलाश के सानिध्य में प्रख्यात गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ (देहरादून), सिने लेखक प्रोफेसर प्रहलाद अग्रवाल (सतना), सुप्रसिद्ध कवि-गीतकार डॉ. इरशाद कामिल (मुंबई), चर्चित कथाकार हरीश पाठक (मुंबई), फिल्म निर्देशक दिनेश शैलेंद्र (मुंबई) ने विशिष्ट वक्ता के तौर पर उपस्थित लोगों को संगीत और साहित्य से जुड़ी विभिन्न जानकारियां दीं।

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