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Mumbai News Live : मुस्लिम बाहुल्य भिवंडी में सांसद और विधायक खोने के बाद कांग्रेस ने अब मेयर भी गंवा दिया, पर कैसे?

Binod Pandey

Publish: Dec 08, 2019 18:01 PM | Updated: Dec 08, 2019 18:01 PM

Mumbai

  • प्रदेश ( Pradesh ) के बड़े कांग्रेसी ( Congress ) नेताओं के अडिय़ल रवैये के कारण
  • सांसद ( M.P.) और विधायक ( MLA ) के बाद अब मेयरमुक्त हुई कांग्रेस
  • भिवंडी मनपा में बहुमत ( Majority) के बावजूद सत्ता ( Power ) गंवाने के लिए प्रदेश कांग्रेस शत-प्रतिशत जिम्मेदार

मुनीर अहमद मोमिन

भिवंडी. शिवसेना के साथ एनसीपी को लेकर राज्य में सरकार बनाकर बम-बम होने वाली कांग्रेस को एक पखवाड़े के भीतर ही भाजपा ने भिवंडी मनपा में पटखनी देकर पूरे प्रदेश में कांग्रेस की किरकिरी करा दी है। इस शर्मनाक हार से जबरदस्त फजीहत के बाद कांग्रेस प्रदेश हाईकमान की चूलें हिलने के साथ-साथ उसकी हालत बदतर हो गई है। इस घटनाक्रम के मूल में प्रदेश कांग्रेस के कुछ बड़े नेता ही हैं, जो भिवंडी में हुए घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर Patrika .com/jaipur-news/get-success-by-fulfill-responsbilty-2981990/?ufrm=lsub" target="_blank">जिम्मेदार बताए जाते हैं।


सबसे हैरत की बात तो यह है कि यहां के कांग्रेसी नगरसेवकों के पाला बदलने का इतिहास पुराना होने के बावजूद कांग्रेस ने अपनी पुरानी गलतियों से भी कुछ भी सबक नहीं लिया। 2012 में भी छह नगरसेवकों वाली इसी कोणार्क विकास आघाडी ने व्हिप के बावजूद कांग्रेस के दो नगरसेवकों का पाला बदलवाते हुए तब भी इन्हीं प्रतिभा पाटील को महापौर बनवाया था। जिससे कांग्रेस की प्रत्याशी मिस्बाह इमरान खान दो मतों से हार गई थी। लेकिन वक्त का खेल देखिए इस बार मिस्बाह के पति और कांग्रेसी नगरसेवक इमरान खान ने ही 18 नगरसेवकों के साथ खुद बगावत करके उन्हीं प्रतिभा पाटील को महापौर बनवाते हुए खुद उप महापौर की कुर्सी पर विराजमान हो गए हैं।

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जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
इस नए राजनैतिक घटनाक्रम में अपना मुंह बचाने के लिए प्रदेश कांग्रेस ने भिवंडी शहर जिला अध्यक्ष शोएब खान गुड्डू और भिवंडी मनपा में कांग्रेस के गट नेता हलीम अंसारी को पक्षादेश न मानने वाले 18 कांग्रेसी नगरसेवकों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश देते हुए शहर जिलाध्यक्ष शोएब खान को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। लेकिन सबसे बड़े मुद्दे की बात तो यह है कि महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस और उसके नेता ही पूरी तरह इस शर्मनाक हार के जिम्मेदार हैं। क्योंकि प्रदेश के बड़े नेताओं की 'गिव एंड टेक' पालिसी के जरिए स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व को बेजा और गलत समर्थन के कारण ही आज भिवंडी में सांसद और विधायक सहित बहुमत से अधिक संख्या बल रखने के बावजूद मेयर मुक्त कांग्रेस हो गई है।

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जानना होगा ढाई साल पुराना संदर्भ
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए ढाई वर्ष पूर्व जाना पड़ेगा। जब मनपा के चुनाव के टिकट बंटवारे में निष्ठावान कांग्रेसियों को बाईपास करते हुए जमकर पार्टी के टिकटों का बंदरबांट हुआ था। बजरिए माणिकराव ठाकरे तबके महाराष्ट्र प्रभारी मोहन प्रकाश की शह के कारण यह मामला इतना आगे बढ़ा था कि तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण द्वारा टिकट बंटवारे से अपना हाथ खींचकर मजबूरन सारा अधिकार स्थानीय कांग्रेस के सुपुर्द करना पड़ा था। क्योंकि इससे चंद दिन पहले भिवंडी के मजदूरों और कारीगरों ने मोहन प्रकाश के बनारस स्थित मकान का फर्नीचर सहित रंगाई पुताई का काम किया था।

इसके बाद प्रदेश कांग्रेस ने मनपा चुनाव के लिए नसीम खान को भिवंडी का प्रभारी बनाया था। लेकिन स्थानीय नेतृत्व के इशारे पर स्थानीय कांग्रेसियों के विरोध के फलस्वरूप नसीम खान को बदलकर उनकी जगह अपने मनपसंद के मुजफ्फर हुसैन को प्रभारी बनवा दिया गया। इस दौरान तिलक भवन में प्रदेश कांग्रेस के भाई जगताप और भिवंडी कांग्रेस के लोगों के बीच जमकर मां-बहन और पकड़ा-पकड़ी भी हुई थी।

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नगरसेवकों ने प्रदेश कांग्रेस को खूब किया ब्लैकमेल
भिवंडी के कांग्रेसी नगरसेवकों ने कदम-कदम पर प्रदेश कांग्रेस को ब्लैकमेल करते हुए उसे हमेशा नतमस्तक होने पर मजबूर किया है। यहां तक कि लोकसभा चुनाव के लिए सुरेश टावरे को टिकट न देने का दबाव बनाते हुए इन्हीं नगरसेवकों ने शिवसेना के बाल्या मामा को टिकट दिलाने के लिए इस्तीफा तक की धमकी दी थी। गनीमत यह रही कि मल्लिकार्जुन से मधुर संबंधों के चलते सुरेश टावरे को टिकट तो मिल गया। लेकिन कांग्रेस के पक्ष में भरपूर जन समर्थन के बावजूद उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा। क्योंकि अंदर खाने भाजपा के सांसद ने यहां के ज्यादातर नगरसेवकों को चुनाव में निष्क्रिय रहने और स्लो मतदान के लिए मैनेज कर लिया था।

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यही नौटंकी विधानसभा चुनाव में भी दोहराई गई। जब नगरसेवकों ने प्रदेश कांग्रेस पर अपने 47 संख्या का दबाव डालकर पात्र और जिताऊ उम्मीदवारों का टिकट कटवाकर ऐसे उम्मीदवारों को पार्टी का टिकट दिलवाया। जिनका हारना तय था और हुआ भी यही भिवंडी पूर्व और पश्चिम दोनों जगह कांग्रेस तीसरे पायदान पर चली गई। भिवंडी पूर्व में तो नगरसेवकों के दबाव में पार्टी ने इतना बड़ा मजाक किया कि भाजपा शहर जिला अध्यक्ष पद पर रहते हुए भी संतोष शेट्टी को अपना उम्मीदवार बना लिया था।

इस तरह विगत ढ़ाई वर्षों में कांग्रेस के स्थानीय संगठन ने प्रदेश कांग्रेस और उसके आदेशों को ठेंगे पर रखते हुए मनमाने ढंग से मनपा के पदों का जमकर बंदरबांट किया। जिसका संक्षिप्त उल्लेख शहर अध्यक्ष शोएब खान गुड्डू को दिए गए कारण बताओ नोटिस में भी है। कांग्रेसी सूत्रों का कहना हैं कि भिवंडी कांग्रेस में माणिकराव ठाकरे और मुजफ्फर हुसैन का ज्यादातर अमल दखल रहा है। इसलिए यहां के ज्यादातर कांग्रेसियों का मानना है की प्रदेश कांग्रेस को इन दोनों नेताओं से भी जरूर जवाब तलब करना चाहिए। क्योंकि ये दोनों हमेशा स्थानीय संगठन के साथ रहकर प्रदेश से लेकर ऑल इंडिया कांग्रेस तक इनकी पैरवी करते रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरुप आज भिवंडी में कांग्रेस को सांसद, विधायक और मेयर मुक्त होना पड़ा है।

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