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Maharastra Election : नासिक ग्राउंड रिपोर्ट : भाजपा-शिवसेना पर कैसे हावी हो गए मनसे और बागी

Binod Pandey

Publish: Oct 20, 2019 23:19 PM | Updated: Oct 20, 2019 23:19 PM

Mumbai

कुंभ नगरी नासिक में राजनीतिक पार्टियों के नेता और कार्यकार्ताओं का मेला लगा है। नासिक की तीनों सीटों पर जीत के लिए आश्वस्त भाजपा-शिवसेना की महायुति का खेल मनसे और बागियों के कारण गड़बड़ता नजर आ रहा है। नासिक की पश्चिम, पूर्व और मध्य विधानसभा सीटों पर पर वर्ष 2009 में मनसे ने तो 2014 में भाजपा ने कब्जा जमाया था। इस बार पार्टी के निर्णयों ने अपने सारे समीकरण बदल दिए। नासिक पूर्व से भाजपा के वर्तमान विधायक बालासाहेब सनप का टिकट कटने से सब नाराज हैं और उन्होंने एनसीपी का दामन थाम लिया।

नासिक. भाजपा ने वर्तमान विधायक सीमा हीरे पर दुबारा भरोसा जताया है। जबकि सीमा के परिवार से ही प्रशांत हीरे एनसीपी के खेमे में जा बैठे हैं। पार्टी ने उनकी पत्नी अपूर्वा को सीमा के सामने उतार दिया है। मध्य विधानसभा सीट पर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के नितिन भोसले फिर से मैदान मेें हैं तो भाजपा ने वर्तमान विधायक देव्यानी फंराडे को ही टिकट दिया है। कांग्रेस से हेमलता पाटील को उतारा है। ऐसे में भाजपा की जीत के लिए मनसे रोड़ा बन सकती है

बंद हो रही कंपनियां और निवेश बनींं चुनौतियां
नासिक में वर्ष 1964 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की स्थापना के बाद औद्योगिक क्रांति हुई। कई तरह की कंपनियों ने प्लांट लगाए और बड़े पैमाने पर निवेश किया। अब सरकारी कंपनी के हालात खराब हैं। कभी साढ़े आठ हजार से अधिक कर्मचारी काम करते थे, जो तीन हजार रह गए हैं। कंपनी के पास कोई काम नहीं बचा और वेतन को लेकर कर्मचारिरी आंदोलन की राह पर हैं। आर्थिक मंदी के कारण बड़ी संख्या में रोजगार देने वाली बॉस, महिन्द्रा समेत कई नामी कंपनियों में कर्मचारियों की कटौती का संकट मंडरा रहा है। कई कंपनियां बंद होने के कारण लोगों का रोजगार छीन चुका है।

प्रवासी मतदाता अहम भूमिका में
महाराष्ट्र के औद्योगिक शहरों में नासिक आता है। अन्य शहरों की तरह यहां पर भी उत्तर भारत और गुजरात के अलावा महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से प्रवासी रहते हैं। पंचवटी में बड़े पैमाने पर गुजराती तो सातपुर एमआइडीसी में उत्तर भारतीयों की संख्या चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

तीन सीटों पर गैर मराठी भाषियों का मत निर्णायक
शहर के तीन विधानसभा क्षेत्र में प्रवासी मतदाताओं का प्रभाव इसबार के चुनाव मेें देखने को मिलेगा। यहां गुजराती, हिंदी भाषी और बंगाली मतदाताओं के वोटिंग ट्रेंड का परिणाम पर व्यापक असर पडऩे की संभावना जताई जा रही है। नासिक जिला भौगोलिक स्थिति में मुंबई यानी कोंकण, पुणे यानी पश्चिम महाराष्ट्र और औरंगाबाद यानी मराठवाडा से समीप है। इसके अलावा यह दो राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेश और केन्द्र शासित प्रदेश दीव-दमण से जुड़ा हुआ है। जिले की पहचान धार्मिक नगरी या तीर्थ नगरी के रूप में भी है। जिले का देश भर में कृषि की वजह से ख्याति है। यहां के प्याज की विश्व भर में मांग रहती है। शहर की तीन सीटों पर कई राज्यों के प्रवासी बसे हैं, जिससे यहां का राजनीतिक समीकरण में इनके वोटों अपना एक अलग महत्व है। नासिक पूर्व यानी पंचवटी परिसर में गुजराती मतदाताओं का प्रभाव माना जाता है। देवलाली क्षेत्र में बाग्लाभाषी मतदााताओं की बड़ी तादाद यहां के समीकरण को प्रभावित करती है। इसके अलावा नासिक पश्चिम सीट पर हिंदी भाषी मतदाताओं का प्रभाव बताया जाता है। हालांकि तीनों सीट पर यह अनुपात स्थानीय और प्रवासी मतदाताओं का 80 और 20 प्रतिशत है, फिर भी यह 20 फीसदी मत कई बार निर्णायक भूमिका निभाता है।

प्रशासन ने पूरी की चुनावी तैयारी, अब जनता की बारी
जिले के 15 विधानसभा सीट क्षेत्र में सोमवार को होने वाले मतदान को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली है। जरूरी सामग्री मतदान केन्द्रों तक पहुंचा दी गई है। सुरक्षा और तमाज जरूरी उपाय कर प्रशासन मुस्तैद है।
पिछले 15 दिन से जारी विधानसभा चुनाव की गर्माहट शनिवार शाम को प्रचार बंद होने के साथ शांत हो गई। रविवार को जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव से संबंधित कागजात का वितरण किया गया। जिले के 15 विधानसभा सीटों में 4,579 मतदान केन्द्र हैं। इनमें से 65 मतदान केन्द्र संवेदनशील हैं। जिले में 45 लाख 641 मतदाता हैं। इसमें 23 लाख 36 हजार 495 पुरुष, 21 लाख 58 हजार 133 महिला हैं। इसमें नांदगाव में 3,15 016, मालेगाव मध्य 2 ,91,603, मालेगाव बाहरी 3,39,071, बागलाण 2,76, 021, कलवण 2,67,527, चांदवड 2,77,546, येवला 2,95,85, सिन्नर 3,00,077, निफाड 2,69, 342 दिंडोरी 2,99,345, नासिक पूर्व 3,54,303, नासिक मध्य 3,17,800, नासिक पश्चिम 3,98, 926, देवलाली 2,63,728 और इगतपुरी में 2,59,225 मतदाता हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान जिले के 15 विधानसभा सीट क्षेत्र में आचारसंहिता उल्लंघन के 32 शिकायत दर्ज किए गए हैं। नासिक जिले के पेठ, सुरगाणा, कलवण आदि तहसील के दुर्गम क्षेत्र में 69 मतदान केन्द्रों पर निगरानी के लिए रनर्स की मदद ली जाएगी। जिले के 4,513 मतदान केन्द्रों को इंटरनेट से जोड़ा गया है। बाकी दुर्गम क्षेत्र में इंटरनेट उपलब्ध रर्नस की मदद ली जाएगी, यहां के पटवारी, ग्रामसेवकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही पुलिस विभाग के वायरलेस के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान करेगा। संवेदनशील क्षेत्र मालेगाव में ड्रोन का इस्तेमाल कर निगरानी की जाएगी।