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maha news :सडक़ हादसों में सर पर चोट लगने से 70 फीसदी मौत

Ramdinesh Yadav

Publish: Dec 05, 2019 15:00 PM | Updated: Dec 05, 2019 15:00 PM

Mumbai

  • भारत (inida)में दुर्घटनाओं ( road accident) के दौरान सिर में चोट (head injuries) लगने से छह में से एक की मौत हो जाती है
  • जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 200 में से एक है।
  • दुर्घटनाओं के परिणामस्वरूप लगभग 15 लाख (15 lakh) से अधिक लोग हर साल मरते (die per year)

मुम्बई, देश में वर्तमान में हो रहे सडक़ हादसों में हर साल सिर में चोट ( हेड इंजुरी ) लगाने की वजह से करीब 70 फीसदी लोगों की मौतें होती हैं , जो कि विश्व में सर्वाधिक हैं। भारत में दुर्घटनाओं के दौरान सिर में चोट लगने से छह में से एक की मौत हो जाती है जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 200 में से एक है।यह खुलासा न्यूरोलोजी सोसायटी आफ इण्डिया के रिपोर्ट में हुई है . रिपार्ट के अनुसार सड़क दुर्घटना में सिर में चोट लगने के कारण ट्रामैटिक ब्रेन इंजरी (टीबीआई) होने का खतरा बढ़ जाता है . और गोल्डन आवर में इलाज नहीं होने कि वजह से मौत हो जाती है .एनएसआई के चैयरमेन व चैनई के न्यूरो सर्जन डॉ. के. श्रीधर ने हेड इंजरी के उपचार में न्यूरो सर्जन्स की कमी पर चिंता जाहिर किया . पवई में उक्त सोसायटी के द्वारा आयोजित हेड इंजुरी एंड रोड सेफ्टी के संयुक्त कार्यक्रम में श्रीधर बोल रहे थे . उन्होंने कहा कि भारत में 132 करोड़ की आबादी पर महज तीन हजार न्यूरो सर्जन्स हैं। इस लिहाज से लगभग 40 लाख की आबादी पर एक न्यूरो सर्जन है, जबकि अमेरिका में तीन हजार की आबादी पर एक न्यूरो सर्जन है।देश में सडक़ दुर्घटनाओं के परिणामस्वरूप लगभग 1.51 मिलियन लोग हर साल मरते हैं। सभी सडक़ हादसों में आधे से अधिक असुरक्षित सडक़ उपयोगकर्ता यानी पैदल यात्री, साइकिल चालक और मोटरसाइकिल चालक मौत का शिकार होते हैं।

रोड सेफ्टी के कार्यक्रम सचिव व हिंदुजा हॉस्पीटल मुम्बई के न्यूरो सर्जन डॉ. केतन देसाई ने कहा कि विश्व में सडक़ हादसों में लगभग 50 मिलियन से अधिक लोग गैर-घातक चोटों का सामना करते हैं, जबकि कई चोटों के कारण जिंदगीभर के लिए अपाहिज हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हेड इंजरी से होने वाली मौतों की बात करें तो वर्ष 2018 में कुल हादसों में से 35.2 फीसदी यानी एक लाख 64 हजार 313 हादसे दोपहिया वाहनों के हुए हैं जिनमें 31.4 फीसदी अर्थात् 47 हजार 560 लोगों की मौत हो गई, जबकि 1 लाख 53 हजार 585 लोग घायल हुए। इन हादसों में करीब 70 फीसदी की मौत हेड इंजरी की वजह से होती है।

डा. देसाई ने कहा कि हैरानीजनक बात ये है कि देश में सडक़ हादसों की वजह से सर्वाधिक मौत का शिकार 18 से 35 वर्ष आयुवर्ग के युवा हो रहे हैं। वर्ष 2018 में हुए कुल हादसों में 48 फीसदी यानी कुल 72 हजार 737 युवाओं (18 से 35 वर्ष आयुवर्गं) की मौत हुई, जो कि देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है। देश में दुर्घटना के समय फस्टऐड नहीं मिलने की वजह से ही सडक़ हादसों में से 20 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। हमारे देश में करीब 24 फीसदी मरीज ही इस अवधि में हस्पताल पहुंच पाते हैं।


महाराष्ट्र में 300 न्यूरो सर्जन्स
ग्लोबल हॉस्पीटल, मुम्बई के न्यूरो सर्जन डॉ. सुरेश सांखला ने कहा कि महाराष्ट्र प्रदेश में करीब 300 तथा अकेले मुम्बई के सरकारी व प्राइवेट मेडिकल कॉलेज तथा हॉस्पिटल्स में लगभग 150 न्यूरो सर्जन्स हैं। उन्होंने देशभर में आपातकालीन नंबर एक ही करने का सुझाव दिया। डॉ. सांखला ने कहा कि हर राज्य में अलग-अलग एबुंलेंस नंबर है जबकि विदेशों में एक ही आपातकालीन नंबर होता है।

राजस्थान में ३५ न्यूरो सर्जन
राजस्थान के संभाग मुख्यालयों पर स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 35 न्यूरो सर्जन्स सेवारत हैं। उन्होंने हेलमेट द्वारा हेड प्रोटेक्शन का लाइव डेमो भी दिया। एशियन-ऑस्ट्रेलियन कांग्रेस ऑफ न्यूरोलॉजिकल सर्जन्स न्यूरो ट्रोमा कमेटी के चैयरमैन व सवाई मानसिंह हस्पताल, जयपुर के न्यूरोसर्जन डॉ. विरेंद्र डी. सिन्हा ने बतौर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे .

सेना के जवान भी शिकार
1600 सैन्यकर्मी अपनी जान गवां रहे हैं। यह आंकड़ा सेना की करीब दो बटालियनों के बराबर आंका गया है। यह बात न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एनएसआई) की ओर से पवई के एक होटल में रोड सेफ्टी पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में कर्नल हेल्थ ऑफ हैडक्वार्टर मुम्बई, गुजरात एण्ड गोवा सब एरिया श्रीनिवास ने कही।

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