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अनुदानित स्कूलों पर सरकार की नजर, लिया जा सकता है ये फैसला ?

Rohit Kumar Tiwari

Publish: Dec 08, 2019 16:15 PM | Updated: Dec 08, 2019 16:15 PM

Mumbai

सरकार ( Government ) ने अनुदानित स्कूलों ( Funded Schools ) की ओर किया रुख, अतिरिक्त शिक्षकों ( Additional Teachers ) के बावजूद दिया जा रहा वेतन ( Salary ), वित्तीय बोझ ( Financial Burden ) कम करने के लिए सरकार ने शुरू की मुहिम ( Campaign ), रिपोर्ट के लिए नियुक्त ( Appointed ) किया गया अध्ययन समूह ( Study Group )

मुंबई. सरकारी स्कूलों को अनुदान की संख्या में कमी करने के बाद सरकार ने अब अनुदानित स्कूलों की ओर अपना रुख कर लिया है। अनुदानित स्कूलों में शिक्षकों के वेतन का भुगतान करने के बजाय, अब सरकार सब्सिडी का भुगतान करने के लिए विचार कर रही है। सरकार अनुदानित स्कूलों में शिक्षकों के वेतन का भुगतान करती है। यदि शिक्षक अतिरिक्त हैं तो भी उन्हें वेतन मिलता है। अब सवाल यह है कि क्या अतिरिक्त शिक्षकों को वेतन मिलेगा या नहीं। गैर-अनुदानित शैक्षिक संस्थान भी वित्तीय गणित एकत्र करते समय सब्सिडी की मांग कर रहे हैं। इन स्कूलों के अनुदान के लिए चुनावों के दौरान वर्तमान सत्ताधारी दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने यूनियनों के आंदोलन में भाग भी लिया था।

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शिक्षा आयुक्त ने नहीं दिया कोई जवाब...
विदित हो कि अब सरकार ने वित्तीय बोझ को कम करने के लिए अनुदानों को कम करना शुरू कर दिया है। अनुदान सहायता पर रिपोर्ट करने के लिए एक अध्ययन समूह नियुक्त किया गया है। अध्ययन समूह अब मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्ताव के लिए टिप्पणी करने वाला है। राज्य के अधिकांश सहायता प्राप्त स्कूल स्थानीय भाषा के हैं। इन स्कूलों में छात्रों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों से गिरावट आ रही है। वहीं अब अगर प्रतिशत के अनुसार अनुदान शुरू किया जाता है तो इन स्कूलों को सबसे अधिक नुकसान होना सुनिश्चित है। वहीं जब इस संबंध में शिक्षा आयुक्त से संपर्क किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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नई सरकार इस तरह की रही अध्ययन...

  • महाविकास आघाडी सरकार के गठन के बाद शिक्षा मंत्री की घोषणा अभी तक नहीं की गई है, अब स्कूली शिक्षा के विभिन्न विषयों का अध्ययन करने और अब तक की योजनाओं की समीक्षा करने के लिए अध्ययन समूहों को नियुक्त किया गया है। अनुदान आधार के साथ 33 विषयों का अध्ययन किया जाएगा।
  • जनसंख्या में वृद्धि, कार्यालयों की संरचना, बजट, छात्रवृत्ति, शिक्षा का अधिकार, कानून प्रवर्तन, फीस विनियमन, ग्यारहवीं प्रवेश प्रक्रिया, स्कूल मूल्यांकन, स्कूली बच्चों की पढ़ाई, व्यावसायिक शिक्षा, सार्वजनिक भागीदारी में वृद्धि, शिक्षकों के अकुशल कार्य को कम करना, अल्पसंख्यक स्कूलों की गुणवत्ता, नगरपालिका स्कूलों की गुणवत्ता, स्वयं सहायता, जिसमें स्कूल, शिक्षण नियम, कार्यालय बोझ आदि शामिल हैं। है। इन सभी अध्ययन समूहों को 31 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट देनी है।

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