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Sai Baba: साई बाबा के जन्म स्थान से जुड़ा विवाद, मुख्यमंत्री के अनुरोध पर वापस लिया बंद

Dheeraj Singh

Publish: Jan 19, 2020 18:18 PM | Updated: Jan 20, 2020 09:24 AM

Mumbai

साई बाबा ( Sai Baba ) के जन्म स्थान ( Birth Place ) से जुड़े विवाद ( Dispute ) से नाराज शिरडी ( Shirdi ) के लोगों ने बेमियादी बंद को वापस ले लिया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ( Udhav Thakare ) से भरोसा मिलने के बाद शिरडी ग्राम सभी की बैठक में यह फैसला किया गया।

शिरडी. साई बाबा को जन्म स्थान से जुड़े विवाद से नाराज शिरडी के लोगों ने बेमियादी बंद को वापस ले लिया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भरोसा मिलने के बाद शिरडी ग्राम सभी की बैठक में यह फैसला किया गया। रविवार आधी रात से शिरडी शहर में दुकानें, होटल और रेस्टोरेंट खुलेंगे। सोमवार से साई बाबा का दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत नहीं होगी। विवाद के समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने सोमवार को अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में शिरडी के साथ ही पाथरी गांव के लोगों को भी बुलाया गया है।
उल्लेखनीय है कि परभणी जिले के पाथरी गांव को साई बाबा का जन्म स्थान घोषित करने के खिलाफ धर्म क्षेत्र शिरडी में रविवार से बेमियादी बंद का ऐलान किया गया था। हालांकि, साई बाबा का मंदिर भक्तों के लिए खुला रहा। साप्ताहिक अवकाश के चलते रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे। लेकिन, शिरडी में कोई चहल-पहल नहीं रही। होटल, रेस्टोरेंट, दुकानें बंद रहीं।

साई भक्त हैं मुख्यमंत्री
शिरडी में बेमियादी बंद का ऐलान ग्राम सभा ने किया था। आज शाम ग्राम सभा के सदस्यों की बैठक हुई। इसमें सोमवार को मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक पर चर्चा हुई। विवाद के समाधान के लिए सरकार की गंभीरता को देखते हुए अनिश्चितकालीन बंद वापस लेने का फैसला किया गया। ग्राम सभा के सदस्यों ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव खुद साई भक्त हैं। उन्होंने हमें चर्चा के लिए बुलाया है। गांव वालों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक में विवाद सुलझ जाएगा।

विवाद की वजह
साई बाबा के जन्म स्थान को लेकर विवाद पिछले हफ्ते शुरू हुआ। औरंगाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पाथरी गांव को साई बाबा का जन्म स्थान घोषित किया था। साथ ही पाथरी के विकास के लिए उन्होंने 100 करोड़ रुपए की सरकारी सहायता देने का ऐलान किया है। ठाकरे की घोषणा के बाद पाथरी में जहां जश्न मनाया गया, वहीं शिरडी में सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ गई। शिरडी के लोगों का कहना है कि साई बाबा ने कभी भी अपने जन्म स्थान, जाति आदि का जिक्र नहीं किया। शिरडी में ही उन्होंने देह त्याग किया था, जहां समाधि मंदिर है।

सांसद-विधायक का समर्थन
अहमदनगर जिला प्रशासन ने बताया कि मंदिर के साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रसादालय और मंदिर की रसोईं खुली रखी गई थी। प्रसादालय, नाश्ता केंद्र और लड्डू बिक्री काउंटर पर भक्तों की लंबी कतारें भी देखी गईं। शिवसेना सांसद सदाशिव लोखंडे और भाजपा विधायक राधाकृष्ण विखे पाटील ने शिरडी में बंद का समर्थन किया था। लोखंडे ने कहा कि मैं साई भक्त पहले हूं, सांसद बाद में। बाबा को बांटा नहीं जाना चाहिए। स्थानीय भाजपा विधायक पाटील ने कहा कि मैं शिरडी के लोगों के साथ हूं। मुख्यमंत्री को अपना बयान वापस लेना चाहिए।

बनाई जा सकती है कमेटी
साई बाबा के जन्म स्थान से जुड़े विवाद को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। शिरडी और पाथरी के लोगों से सोमवार को मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री विवाद सुलझाने के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर सकते हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों के साथ ही इतिहासकारों को कमेटी का सदस्य बनाया जा सकता है।

 

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