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रावण का पुतला बनाते-बनाते राम के हो गए “अब्दुल हक”

Jai Prakash

Publish: Oct 04, 2019 18:42 PM | Updated: Oct 04, 2019 18:42 PM

Moradabad

Highlights

  • कई दशकों से बनाते आ रहे पुतले
  • धर्म की दीवार कभी नहीं आई बीच में
  • अब नयी पीढ़ी को भी सिखा रहे बनाना

मुरादाबाद: भारत विभिन्न संस्कृतियों और सभ्यताओं के सम्मिलन का देश है। इसीलिए ये दुनिया में बेहद ख़ास है। इसे और ख़ास बनाते हैं हमारी परम्पराएँ और त्यौहार। जी हां नवरात्र चल रहा है और दशमी को दशहरे का पर्व देश भर में धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इसमें असत्य पर सत्य की जीत के पर्व के रूप में रावण के पुतले का दहन किया जाता है। ये त्यौहार न सिर्फ हिन्दुओं बल्कि अन्य धर्मों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। उनके बिना भी ये त्यौहार संभव नहीं है। कुछ ऐसी ही मिसाल शहर में भी देखने को मिल रही है। यहां 75 साल के अब्दुल हक़ साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल बने हुए हैं। कई दशकों के से देश की विभिन्न रामलीलाओं में रावण,कुम्भकरण और मेघनाथ के पुतले बनाते आ रहे हैं। अब वे भी इन्हें बनाते-बनाते राम में रच गए हैं।

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पुश्तैनी है काम

अब्दुल हक कहते हैं कि ये उनका पुश्तैनी काम है, इसमें धर्म की कोई सीमा नहीं है। अब्दुल हक भी राम को एक आदर्श के रूप में मानते हैं। उनके मुताबिक कलाकार किसी धर्म में नहीं बंधा होना चाहिए। यही सोचकर अब अपने बूढ़े हाथों के हुनर को नयी पीढ़ी में भी सौंप रहे हैं। इस बार 80 फीट का रावण बनाना है तो तैयारी काफी पहले से शुरू हो गयी है।

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आमदनी का जरिया नहीं

अब्दुल हक के लिए रामलीला में रावण के पुतले बनाना न सिर्फ आमदनी का जरिया है, बल्कि अब रामायण उनके जीवन का भी हिस्सा है। कहते हैं कि इसके दर्शन में बुराई और अच्छाई बेहतर तरीके से समझाई गयी है। जो भी इसे समझेगा नेक रास्ते पर ही चलेगा।