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30 मई को हो सकता है पीएम मोदी का शपथ ग्रहण, समारोह की शोभा बढ़ाएंगे विदेशी मेहमान

Mohit Saxena

Publish: May 24, 2019 14:39 PM | Updated: May 26, 2019 14:34 PM

Miscellenous World

  • अपने पहले शपथ ग्रहण पर पीएम मोदी ने सार्क देशों के प्रमुखों को बुलाया था
  • सार्क देशों के साथ कुछ अन्य बड़े नेताओं को भेजा जा सकता है न्योता
  • बड़ा सवाल, क्या पाकिस्तान के पीएम इमरान के पास भेजा जाएगा न्योता

नई दिल्ली। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi ) ने एक बार फिर भारत के चुनावों में बाजी मार ली है। मोदी और भाजपा की इस शानदार विजय को देखकर पूरी दुनिया हैरान है। इस जीत ने उनके कद को काफी बढ़ा दिया है। करीब 130 करोड़ की जनसंख्या वाले देश ने एक बार फिर उन्हें सिर-आँखों पर बैठा लिया है।

विदेशों में भी मोदी की इस बड़ी जीत की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सभी पड़ोसी देशों की मीडिया में मोदी छाए हुए हैं। इस बीच पीएम मोदी के शपथ ग्रहण की तारीख भी करीब-करीब तय हो गई है। आशा जताई जा रही है कि मोदी 30 मई को अपने दूसरे कायर्काल के लिए शपथ ले सकते हैं। देश और दुनिया की कई हस्तियों के इस शपथ ग्रहण में शामिल होने की उम्मीद है। सवाल यह उठता है कि कौन सी विदेशी हस्तियां पीएम मोदी के शपथ ग्रहण में शामिल हो सकती हैं। फिलहाल इस बारे में अभी सरकार की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। सरकार के सूत्रों कहना है कि समारोह में शपथ ग्रहण के लिए विदेशी गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित करने के बारे में मीडिया में कई अटकलें हैं। फिलहाल अभी इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

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PM Narendra Modi swearing-in ceremony

विदेशी मेहमान होंगे शामिल

मोदी के दूसरे कार्यकाल को लेकर विदेशी मुल्कों में संशय के साथ उम्मीद की किरण भी है। मोदी ने इस बार भारी बहुमत हासिल किया है। माना जा रहा है कि अपने पिछले कार्यकाल के अनुरूप सरकार पूरी मजबूती के साथ कड़े फैसले लेने को तैयार रहेगी। हालांकि अभी मोदी के राजतिलक में आने वाले विदेशी मुल्कों के प्रमुखों के नामों पर सस्पेंस बना हुआ है। लेकिन यह तय है कि इस खास समारोह से मोदी की विदेश नीति की दिशा तय होने वाली है।

आपको याद होगा जब नरेंद्र मोदी ने 2014 में शपथ ली थी तो उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में कई विदेशी हस्तियों को बुलाया था। इनमें सार्क देशों के प्रमुखों के साथ कई और भी देशों के प्रतिनिधि शामिल थे। उस समय पूरी दुनिया के लिए मोदी अनजान थे। 15 वर्षों तक एक राज्य के सीएम रहकर वह पीएम तक पहुंचे थे। उनके विरोधियों का आकलन था कि विदेश नीति के मामले में मोदी कच्चे खिलाड़ी साबित होंगे। उस समय मोदी ने सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया था। यह सभी पड़ोसी देश थे। इसमें तत्कालीन अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई ने समारोह में भाग लिया था।उनकी स्वीकार्यता को भविष्य में भारत के साथ काम करने में अफगानिस्तान की रुचि के रूप में देखा गया। बांग्लादेश ने निमंत्रण स्वीकार किया गया था, मगर शेख हसीना जापान की पूर्व-योजनाबद्ध यात्रा पर थीं।

भूटान के प्रधान मंत्री त्शेरिंग तोबगे ने समारोह में भाग लिया और 27 मई को दोनों के द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करने की योजना बनाई। मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम ने भी इस समारोह में भाग लिया। मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम भी समारोह में शामिल हुए। नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री सुशील कोइराला ने भी निमंत्रण स्वीकार किया। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को निमंत्रण देने पर पीएम मोदी की खूब आलोचना भी हुई और कहा गया कि वह आतंकवाद के आगे हथियार डाल रहे हैं, लेकिन असल में अपने सभी मतभेद भुलाकर पड़ोसियों को आमंत्रित करना विदेश नीति के लिहाज से एक बेहद सार्थक और सकारात्मक कदम था।

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PM Narendra Modi swearing-in ceremony

ये हैं संभावित शाही मेहमान

इस बार मोदी के राजतिलक में सार्क देशों के अलावा कई अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो सकते हैं। इसमें इजरायल के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू ( Benjamin Netanyahu ) का नाम सबसे आगे चल रहा है। बता दें कि वह भी कुछ दिन पहले ही चुनाव जीतकर आये हैं। इसके अलावा फ्रांस के राष्ट्रपति इमुनल मेक्रोन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, जापान के राष्ट्रपति शिजों एबे भी इस शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बन सकते हैं। इन नेताओं के आने के बारे में अभी अंतिम रूप से कुछ कहा जा सकता, लेकिन ये वो नेता हैं जिनसे पीएम मोदी के व्यक्तिगत संबंध हैं। अगर इन नेताओं ने आने की रजामंदी दे दी तो इस बार मोदी के राजतिलक की भव्यता दोगुनी हो सकती है।

हालांकि मोदी के शपथ ग्रहण समारोह का निमंत्रण कई अन्य देशों को भी देंगे। सऊदी शाह सलमान, यूएई के अमीर जायद अल नहान भी इस समारोह में शामिल हो सकते हैं। पीएम मोदी अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी इस समारोह का न्योता भेज सकते हैं लेकिन उनके आने पर संदेह है। अमरीकी राष्ट्रपति दुनिया का सबसे ताकतवर नेता होता है और इतने शॉर्ट नोटिस पर कहीं भी उसका जाना सम्भव नहीं होता। यह भी दीगर बात है कि अमरीकी राष्ट्रपति का दुनिया में एक कद है और वो इतनी जल्दी कहीं जाने का निर्णय नहीं ले सकता। उसके साथ सुरक्षा और विश्व कूटनीति जैसे कई प्रोटोकॉल भी होते हैं। एक सामान्य शिष्टाचार के तहत शपथ ग्रहण समारोहों में विदेशी राजदूतों के माध्यम से उनके राष्ट्र प्रमुखों को न्योता दिया जाता है। लेकिन इनमें केवल उन्हीं देशों के प्रमुख आते हैं जिन देशों से आपसी संबंध प्रगाढ़ होते हैं।

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इमरान खान पर सस्पेंस बरकरार

इस शपथ ग्रहण में शामिल होने या न होने के क्रम में जिस नाम पर सबसे अधिक चर्चा है, वह है पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ( Imran Khan ) का। ऐसा माना जा रहा है कि सार्क देशों के राष्ट्र प्रमुखों को आमंत्रित करने के क्रम में पीएम मोदी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी न्योता दे सकते हैं। हालांकि हाल में भारत और पाकिस्तान के बीच जो रिश्ते रहे हैं उससे यह बहुत मुश्किल लगता है, लेकिन अगर इस बार इमरान खान को न्योता दिया गया तो उनके लिए यह बेहतरीन मौका होगा कि वह दोनों देशों की कड़वाहट को दूर करें। इस दौरे के बाद इमरान खान और पाकिस्तान एक नई शुरुआत कर सकते हैं।

बीते दिनों पुलवामा हमले के बाद भारत और पाक के बीच तल्ख तेवर दिखाई दिए थे। इसके बाद एयरस्ट्राइक ने मामला और खराब कर दिया। बता दें कि पाकिस्तान को मोदी के पांच साल के कार्यकाल में भारत के हमले का डर सताता रहा है। अब अगर मोदी फिर से सत्ता में आए तो कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ( Imran Khan ) ने इस बात की आशा जताई थी कि अगर मोदी सरकार आई तो कश्मीर के मुद्दे पर फैसला करने में आसानी होगी। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि मोदी के दूसरे कार्यकाल में भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्तों पर क्या असर होगा लेकिन इतना तय है कि पाकिस्तान से साथ पहले से चल रही मोदी सरकार की आक्रमक विदेश नीति जारी रहेगी। अगर इमरान इस शपथ ग्रहण में शामिल होते हैं तो उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में एक नया अध्याय लिख दिया जाए।

 

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