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UNHRC में भारत ने PAK को किया बेनकाब, कहा- झूठ की फैक्ट्री चला रहा है पाकिस्तान

Anil Kumar

Publish: Sep 10, 2019 22:30 PM | Updated: Sep 10, 2019 23:16 PM

Miscellenous World

  • UNHRC में पाकिस्तान को लताड़ लगाते हुए भारत ने कश्मीर को पूरी तरह से आंतरिक मामला बताया
  • UNHRC में कश्मीर सेशन में भारत-पाकिस्तान अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं

जिनेवा। जम्मू-कश्मीर को लेकर पूरी दुनिया में भारत के खिलाफ प्रोपैगैंडा चलाने वाले पाकिस्तान को एक बार फिर से हार का मुंह देखना पड़ा है। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (एनएचआरसी) में भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए कड़ी फटकार लगाई और कहा कि उसने जम्मू-कश्मीर के बारे में गलत और मनगढ़ंत कहानी पेश की है।

इस दौरान भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर कोई विदेशी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि यह उसका आंतरिक मामला है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी द्वारा एनएचआरसी के मंच से संबोधित करने के कुछ घंटों बाद ही एक शीर्ष भारतीय राजनयिक ने अपना संबोधन दिया।

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इस दौरान भारतीय राजनयिक ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 'पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र है और वह वैकल्पिक कूटनीति के तौर पर सीमा पार आतंकवाद का संचालन करता है।

विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट) विजय ठाकुर सिंह ने कहा कि भारत मानवधिकारों को बढ़ावा देने और उसकी रक्षा करने में दृढ़ता से विश्वास करता है। उन्होंने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा, 'जो लोग क्षेत्र में किसी भी रूप में आतंकवाद को बढ़ावा देने व वित्तिय तौर पर इसका समर्थन करते हैं, वास्तव में वही मानव अधिकारों के सबसे बड़े उल्लंघनकर्ताओं में हैं।’

कोई भी देश अपने आतंरिक मामले में दखल स्वीकार नहीं कर सकता: विजय ठाकुर

विजय ठाकुर ने कहा कि पाकिस्तान पीड़ित बनने का रोना रो रहा है, जबकि वास्तव में वह खुद मानवाधिकारों के उल्लंघन का अपराधी है। सिंह ने कहा कि हमें उन लोगों पर लगाम कसनी चाहिए, जो मानवाधिकारों की आड़ में दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक एजेंडों के लिए इस मंच का दुरुपयोग कर रहे हैं। ये लोग दूसरे देशों के अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों पर बोलने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वे अपने ही देश में उन्हें रौंद रहे हैं। वे पीड़ित की तरह रो रहे हैं, जबकि वास्तव में वे अपराधी हैं।’

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जम्मू एवं कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत द्वारा अपने संवैधानिक ढांचे के अनुरूप ही यह फैसला लिया गया है।

उन्होंने कहा कि यह फैसला संसद द्वारा पारित अन्य विधानों की तरह ही भारतीय संसद द्वारा एक पूर्ण बहस के बाद लिया गया। उन्होंने बताया कि इसे व्यापक तौर पर समर्थन भी मिला। यह फैसला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला बताया और कोई भी देश अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं कर सकता।

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