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NDA-2 में लागू होगी नई शैक्षिक नीति, भारतीय शिक्षा प्रणाली का भी जिक्र

Prashant Kumar Jha

Publish: May 25, 2019 14:36 PM | Updated: May 25, 2019 14:45 PM

Miscellenous India

  • स्मृति ईरानी के कार्यकाल में तैयार हुआ मसौदा
  • नई शिक्षा नीति को लेकर संघ ने दिए सुझाव
  • 2020 से पहले लागू होगी नई शिक्षा नीति

नई दिल्ली। देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने की कवायद काफी तेजी से जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि 2020 से पहले नई शिक्षा नीति लागू कर दी जाएगी। एनडीए-1 में नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार किया गया था। 2015 में पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के कार्यकाल में इसका ड्राफ्ट तैयार किया गया था, इसको लेकर देशभर से कई सुझाव मांगे गए थे। जिसमें कई सुझाव आए थे। लेकिन कुछ वजहों से यह लागू नहीं की जा सकी थी। अब मोदी के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत से सत्ता में दोबारा लौटा NDA-2 इसे लागू करने की तैयारी में है। 2018 में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने साफ संकेत दिया था कि पहली बार भारत में शिक्षा नीति बनाने को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारी चल रही है। जल्द ही देश को इसकी सौगात मिल जाएगी।

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'नई शिक्षा नीति में होना चाहिए स्वदेशी विचार'

नई शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी सुझाव दिए थे। उन सुझावों में अपने देश के विचारों को शामिल करने का जिक्र किया गया था। खुद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि ‘आधुनिक शिक्षा प्रणाली में आवश्यक चीज़ों को रखना जरूरी है। इसके साथ-साथ भारतीय परंपरा से जुड़ी चीजों को भी जगह मिलनी चाहिए। संघ प्रमुख भागवत ने वेद पुराण और अन्य धर्मों को शामिल करने का भी आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि ‘चारों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, गीता, दर्शन, जैन धर्म की शिक्षा, त्रिपिटक (बौद्ध धर्म ग्रंथ), गुरुग्रंथ (सिखों का धार्मिक ग्रंथ) संत वाणी, की भी शिक्षा भारतीयों को मिलनी चाहिए।’ नई शिक्षा नीति आने वाली है उम्मीद करता हूं कि उसमें यह सब बातें होंगी।

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सरकार पर नई शिक्षा नीति लागू करने का भी दबाव

हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि सरकार इसे जानबूझकर टाल रही है। क्योंकि इस मसौदे में शिक्षा का भगवाकरण करने का भी दबाव है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो संघ नाराज हो जाएगा। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष भी सरकार पर भगवाकरण का आरोप लगाने लगेगा। सरकार इसकी तिथि लगातार बढ़ा रही है। हालांकि सरकार इसको लेकर गंभीर है। पूर्ण बहुमत में आई मोदी सरकार 2020 से पहले इसे लागू करने की तैयारी में जुटी है।