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चंद्रयान-2 ऑर्बिटर को मिली बड़ी सफलता, इसरो ने जारी की चंद्रमा की ऐतिहासिक तस्वीरें

Amit Kumar Bajpai

Publish: Oct 05, 2019 04:21 AM | Updated: Oct 05, 2019 10:28 AM

Miscellenous India

  • इसरो ने शुक्रवार देर रात रिलीज की फोटो
  • पैनक्रोमैटिक बैंड में हाई रिजोल्यूशन इमेज
  • पहली बार किसी ऑर्बिटर ने क्लिक कीं ऐसी तस्वीरें

बेंगलूरु। यों तो इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) अभी तक चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग करने वाले विक्रम लैंडर से संपर्क साधने की तरकीब भिड़ाने में जुटा हुआ है। लेकिन इस बीच शुक्रवार देर रात इसरो ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर द्वारा खींची गई हाई रिजोल्यूशन तस्वीरें जारी की हैं।

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चंद्रयान-2 मिशन को लेकर लोगों की जिज्ञासा खत्म नहीं हो रही है। इस मिशन में दिलचस्पी रखने वाले इससे जुड़े हर अपडेट को सबसे पहले हासिल करना चाहते हैं। शायद यही सोचते हुए इसरो ने शुक्रवार रात चंद्रमा की सतह की कुछ तस्वीरें जारी की हैं।

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इसरो के मुताबिक चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरा (OHRC) ने यह तस्वीरें क्लिक की हैं। यह फोटोग्राफ्स चंद्रमा की सतह के हैं, जिन्हें OHRC ने बहुत हाई रिजोल्यूशन में खींचा है।

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यह ओएचआरसी बहुत बड़े विजिबल पैनक्रोमैटिक बैंड में काम करता है, जो 450 से 800 NM के बीच होता है। पैनक्रोमैटिक बैंड का मतलब एक ग्रेस्केल इमेज (ब्लैक एंड व्हाइट) तस्वीर होती है, जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम के लाल, हरे और नीले हिस्से को कवर करती है।

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यह 100 दूर कक्षा से तीन किलोमीटर की पट्टी में 25 सेंटीमीटर के स्पेटियल रिजोल्यूशन से सबसे स्पष्ट तस्वीर खींचता है, जो आजतक किसी चंद्रमा के ऑर्बिटर प्लेटफॉर्म ने नहीं खींची। ऐसे में चंद्रमा के विशेष क्षेत्रों के स्थल आकृति के अध्ययन के लिए OHRC एक नया और महत्वपूर्ण टूल है।

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OHRC द्वारा इन तस्वीरों को 5 सितंबर को सुबह 4:38 बजे क्लिक किया गया था। इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि इतनी स्पष्ट फोटो 100 किलोमीटर की दूरी से खींची गई थी।

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इस तस्वीर में चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र में पड़ने वाले बोगसल्वास्की ई क्रेटर और इसके आसपास का क्षेत्र कवर किया गया है। बोगसल्वास्की ई क्रेटर की परिधि 14 किलोमीटर और गहराई 3 किलोमीटर है।

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इन तस्वीरों के जरिये ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह पर मौजूद विभिन्न स्थानों, उनके आकार-प्रकार समेत तमाम अन्य ऐसी जानकारियों को इकट्ठा कर रहा है, जो आज तक किसी ने नहीं कीं।

हालांकि इससे पहले यह जानना जरूरी है कि चंद्रयान-2 ने बीते 20 अगस्त को चंद्रमा की सबसे बहरी कक्षा में प्रवेश किया था और इसके बाद इसके भीतर मौजूद विक्रम लैंडर को 7 सितंबर की रात 1.30 बजे से 2.30 बजे तक चंद्रमा की सतह पर पहुंचना था।

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लेकिन चंद्रमा की सतह सेे 2.1 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंचे विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया और फिर यह गायब हो गया।फिर दो दिन बाद ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर को चंद्रमा की सतह पर स्पॉट कर लिया, लेकिन उससे संपर्क साधने में सफल नहीं हो सका। और तब से यह प्रक्रिया जारी है।