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IAF चीफ बीएस धनोआ ने फिर शुरू किया 'गोल्डेन एरोज', 17 स्क्वैड्रन को सबसे पहले मिलेंगे रफाल

Amit Kumar Bajpai

Publish: Sep 10, 2019 19:15 PM | Updated: Sep 11, 2019 07:59 AM

Miscellenous India

  • सबसे पहले रफाल की खेप मिलेगी 17 स्क्वैड्रन को
  • 1999 में धनोआ के नेतृत्व में करगिल युद्ध में लिया था हिस्सा
  • वायु सेना से मिग-21 बाहर किए जाने के बाद यूनिट हो गई थी बंद

चंडीगढ़। देश में रफाल फाइटर आने से पहले मंगलवार को भारतीय वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ ने गोल्डेन एरोज (17 स्क्वैड्रन) को फिर से शुरू करने की घोषणा की। अंबाला में शुरू हुई वायुसेना की यह पहली यूनिट होगी, जो देश में सबसे पहले रफाल उड़ाएगी। सामरिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण एयरबेस है, जहां पर रफाल जेट की तैनाती पड़ोसी मुल्क को किसी भी नापाक हरकत न करने की चेतावनी देने के लिए काफी है।

मंगलवार को वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ ने अंबाला एयरबेस पर 17 स्क्वैड्रन को एक बार फिर से बहाल करने किया। भारतीय वायु सेना की 17 स्क्वैड्रन को गोल्डेन एरोज (Golden Arrows) भी कहा जाता है।

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इस अवसर पर धनोआ ने कहा, "मुझे इस स्क्वैड्रन के चिह्न को संबंधित यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह को देते हुए बहुत खुशी हो रही है।"

उन्होंने आगे कहा, "गोल्डेन एरोज पेशेवर श्रेष्ठता और निष्ठा का प्रतीक रहा है। अंबाला के साथ 17 स्क्वैड्रन का जुड़ाव 1951 में इसके बनने के बाद से ही है। अब यह अंबाला में वापस आ गया है।"

यह वही स्क्वैड्रन है जो पहले MIG-21 फाइटर प्लेन उड़ाती थी, लेकिन इस विमान को वायु सेना ने हटाने के चलते इसे बंद कर दिया गया था।

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वर्ष 1999 में करगिल युद्ध के दौरान गोल्डेन एरोज की कमांड एयर चीफ मार्शल धनोआ के हाथ में थी। अब जल्द ही इस स्क्वैड्रन को देश में आने वाले रफाल लड़ाकू विमान की पहली खेप मिलेगी।

पहले 17 स्क्वैड्रन यूनिट पंजाब के बठिंडा में थी, लेकिन इसे अब हरियाणा के अंबाला में शिफ्ट कर दिया गया है।

इसके अलावा देश में पश्चिम बंगाल की हाशिमारा स्क्वैड्रन दूसरी ऐसी यूनिट होगी, जिसे रफाल लड़ाकू विमानों की अगली खेप मिलेगी। यह स्क्वैड्रन चीन की सीमा के पास है।