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सोनभद्र कांड: पीड़ित परिवारों से मिलकर रो पड़ीं प्रियंका, कांग्रेस की ओर से 10-10 लाख मुआवजे का ऐलान

Mohd Rafatuddin Faridi

Publish: Jul 20, 2019 18:22 PM | Updated: Jul 20, 2019 18:22 PM

Mirzapur

प्रशासन की रोक के बावजूद हिरासत में ही पीड़ित परिवारों से मिलीं प्रयंका गांधी।

कांग्रेस के वकीलों से विधिक मदद दिलाने का किया वादा।

26 घंटे तक हिरासत में रहने के बाद खत्म किया प्रियंका गांधी ने धरना।

मिर्जापुर. पूरे 24 घंटे से भी ज्यदा समय हिरासत में रहने के बावजूद आखिरकार कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी सोनभद्र नरसंहार के पीड़ित परिवारों के से मिलने में कामयाब रहीं। हालांकि प्रशासन ने उन्हें परिवारों से न मिलने देने के लिये एंड़ी-चोटी का जोर लगा दिया और चुनार किला स्थित गेस्ट हाउस में कड़ी सुरक्षा के बीच हिरासत में रखा, लेकिन 70 किलोमीटर से किसी तरह प्रशासन की नजरों से बचते-बचाते पीड़ित परिवारों के सदस्य मिर्जापुर पहुंचे और काफी देर तक रोके जाने के बाद उन्होंने प्रियंका गांधी से मुलाकात की। हालांकि मुलाकात के लिये प्रियंका गांधी को धरने पर भी बैठना पड़ा। पीड़ित परिवार की महिलाओं से मिलकर प्रियंका गांधी की आंखों में भी आंसू आ गए। उनसे बात करने के बाद प्रियंका गांधी ने मीडिया से बात करते हुए ऐलान किया कि कांग्रेस पार्टी मरने वाले हर व्यक्ति के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देगी, घायलों को भी मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन यह रकम कितनी होगी अभी यह तय नहीं है। इसके अलावा कांग्रेस के वकील पीड़ितों की विधिक मदद करेंगे। इस दौरान प्रियंका गांधी ने योगी सरकार को जमकर कोसा और उन्हें याद दिलाया कि सरकार जनता की परेशानी बढ़ाने के लिये नहीं बल्कि उनकी मदद और सुरक्षा के लिये होती है।

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प्रियंका गांधी ने पीड़ितों से मुलाकात के बाद प्रियंका गांधी पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ मीडिया से रूबरू हुईं। पीड़ितों का कहना था कि जब उन्हें यह पता चला कि प्रियंका गांधी उनसे मिलने आ रही हैं और उन्हें प्रशासन ने चुनार में रोक दिया है, तो वो खुद उनसे मिलने के लिये निकल पड़े। इस दौरान पीड़ित परिवार के सदस्यों ने बताया कि उस दिन क्या हुआ था। उनके मुताबिक 17 जुलाई बुधवार को 11 बजे के आस-पास असलहे और लाठी-डंड़ों से लैस होकर बड़ी तादाद में लोग पहुंच गए। उन लोगों ने जबरदस्ती जमीनों को जोतना शुरू कर दिया, जब इसका विरोध किया किया तो वो हम लोगों पर टूट पड़े, जिसके बाद 10 लोग मर गए और कई लोग अब भी असप्ताल में हैं। उनका कहना था कि बीएचयू के ट्रामा सेंटर में उनसे इलाज के पैसे तक मांगे गए। प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि हम लोगों पर गुंडा एक्ट जैसी कार्रवाई तक की गयी है।

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25-25 लाख रुपये मिलें मुआवजा, वापस हों पीड़ितों पर से मुकदमे

प्रियंका गांधी का कहना था कि जिस तरह से इन लोगों ने बताया है उससे साफ है कि पूरी प्लानिंग से उन पर गोलियां चलायी गयीं, इतना ही नहीं जो बच गए उन्हें लाठियों से पीट-पीटकर मारा गया। उन्होंने मांग किया कि जमीन ग्रामीणों की है वह बरसों से इसपर खेती करते चले आ रहे हैं। ये उन्हें वापस मिलनी चाहिये। इसके अलावा उन पर जो केस दर्ज हैं वो भी वापस होंने चाहियें।

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इस दौनान उन्होंने पांच मांगें रखीं, जिनमें सबसे पहली मांग मरने वालों और घायल दोनों ही परिवारों को 25-25 लाख रुपये का अनुदान, दूसरी जमीन का मालिकाना हक, तीसरी मुकदमों की सुनवाई फास्ट्र ट्रैक अदालत में हो ताकि सुनवायी जल्द हो सके, चौथा निर्दोष गांव वालों पर से मुकदमे हटाए जाएं और पांचवीं मांग थी कि जो लोग अपनी आवाज उठाने यहां तक आए हैं उन्हें वापस जाने पर दोबारा प्रताड़ित न किया जाए, इसके लिये उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाय। उन्होंने योगी सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन गरीबों, आदिवासियों दलितों और जनता को परेशान और प्रताड़ित करने के लिये नहीं, उनकी मदद करने, बचाने और सुरक्षा देने के लिये है ताकि कोई उनका हक न छीन सके। इस जिम्मेदारी का आपको समझना होगा। तंज भरे लहजे में कहा कि आप इसकी चाहें तो नेहरू जी को दे दें, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।

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कहा नहीं कराउंगी जमानत

अपने हिरासत में लिये जाने और जमानत कराने के सवाल पर उन्होंने कहा कि न काई अपराध किया है न ही जमानत कराउंगी। दरअसल प्रियंका गांधी समेत 10 लोगों पर शांति भंग की आशंका में आईपीसी की धारा 151 और 107/16 की धाराएं लगायी गयीं और उन्हें हिरासत में रखा गया। जमानती धाराएं होने के बावजूद प्रियंका ने साफ कहा कि व जमानत नहीं लेंगी और पीड़ितों से मिले बिना जाएंगी भी नहीं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस पार्टी की ओर से सोनभद्र कांड में करने वालों के परिवारों को 10 लाख रुपये देने का ऐलान किया। घायलो के को अनुदान की रकम भी जल्द तय करने की बात कही। साथ ही भरोसा दिलाया कि कांग्रेस के वकील पीड़ितों को विधिक मदद भी देंगे। कांग्रेस भविष्य में भी पीड़ितों के साथ खड़ी रहेगी अगर इन्हें कोई परेशानी आती है। कहा कि आगे जरूरत पड़ी तो वह बाद में भी पीड़ितों से मिलने उनके गांव जाएंगी।

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पीड़ितों से मिले से रोका तो धरने पर बैठ गयीं प्रियंका

सोनभद्र के उम्भा गांव से किसी तरह प्रशासन से बचते हुए पीड़ित परिवारों के सदस्य प्रियंका गांधी से मिलने चुनार पहुंच गए। दो पीड़ित अंदर पहुंचकर प्रियंका से मिल भी लिये, लेकिन जैसे ही प्रशासन को पता चला बाकी का बाहर ही रोक दिया गया। प्रियंका गांधी उनसे मिलने जाने लगीं तो उन्हें भी रोक दिया गया। इससे नाराज प्रियंका कार्यकर्ताओं का घेरा बनाकर जबरदस्ती आगे बढ़ीं और गेस्ट हाउस परिसर में ही एक पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गयीं। आखिरकार काफी रोक-टोक के बाद पीड़ित परिवार उनसे मिलने में कामयाब रहे। महिलाएं उनसे मिलीं तो उस दिन की हैवानियत बताते हुए रोने लगीं, जिन्हें देखकर प्रियंका भी रो पड़ीं।

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वाराणसी एयरपोर्ट पर रोके गए तृणमूल और कांग्रेस नेता

सोनभद्र कांड के पीड़ितों से मिलने पहुंचे ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के चार सांसदों के दल को भी प्रशासन ने वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर ही रोक दिया। सांसद डेरेक ओ ब्रायन के नेतृत्व में पहुंचा यह दल वहीं धरने पर बैठ गया। इसके बाद कांग्रेस नेता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर, भूपेंद्र प्रताप सिंह, मुकुल वांशिक, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, प्रमोद श्रीवास्तव, देवेंद्र सिंह समेत दर्जनों नेताओं को भी एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया।

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गेस्ट हाउस में ही गुजरी प्रियंका गांधी की रात

शुक्रवार को सोनभद्र के उम्भा गांव जाकर पीड़ित परिवारों से मिलने के लिये निकलीं प्रियंका गांधी को मिर्जापुर की नारायणपुर पुलिस चौकी के पास ही रोक लिया गया। इसके बाद वह उसी जगह धरने पर बैठ गयीं। प्रियंका गांधी जब नहीं मानीं तो उन्हें वहीं एसडीएम ने हिरासत में ले लिया और चुनान किला स्थित गेस्ट हाउस ले जाया गया। प्रियंका गांधी वहां 26 घंटे तक हिरासत में रहीं। गेस्ट हाउस में उन्होंने काफी परेशानी भरी रात गुजारी। शुरूआत में वहां बिजली तक की व्यवस्था नहीं थी। इस बीच रात में एडीजी और कमिश्नर वाराणसी, डीआईजी व कमिश्नर मिर्जापुर देर रात उनसे मिलने पहुंचे। एक घंटे तक वह उन्हें इस बात के लिये मनाते रहें कि वो लौट जाएं, पर वह नहीं मानीं। सुबह होने के बाद भी प्रियंका मिलने के लिये अड़ी रहीं, तो प्रशासन भी उन्हें रोकने पर आमादा रहा। इस बीच पीड़ित परिवार के सदस्य खुद आए और आखिरकार प्रियंका उनसे मिलीं।