स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

हिन्दू घरों में कीर्तन और रामायण पाठ करते हैं मो. इस्लाम, कहा- मुझे याद है पूरी रामचरितमानस

Akhilesh Kumar Tripathi

Publish: Nov 23, 2019 16:30 PM | Updated: Nov 23, 2019 22:19 PM

Mirzapur

मोहम्मद इस्लाम का कहना है कि मजहब कभी इसके आड़े नहीं आता है ।

सुरेश सिंह
मिर्जापुर. बीएचयू में मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति पर भले ही इन दिनों घमासान मचा है, मगर वाराणसी के पास के जिले मिर्जापुर से ऐसी तस्वीर सामने आई है जो हिंदू-मुस्लिम भाईचारा, आपसी सौहार्द और गंगा जमुनी तहजीब की अनोखी मिसाल है । मिर्ज़ापुर के रहने वाले मोहम्मद इस्लाम बचपन से हिन्दू धर्म के रामचरित मानस (रामायण) का पाठ करते हैं । उन्हें हिन्दू परिवार के घरों में कीर्तन और रामायण पाठ के लिए बुलाते हैं । इतना ही नहीं वह मंदिर में पूजा भी करते हैं । मोहम्मद इस्लाम का कहना है कि मजहब कभी इसके आड़े नही आता है, वह बीएचयू में फिरोज खान के विरोध को भी गलत बता रहे हैं।


मिर्ज़ापुर के पड़री ब्लॉक के धर्मदेवा गांव रहने वाले मोहम्मद इस्लाम मुस्लिम होते हुए भी हिन्दू धर्म के ग्रंथ रामचरित मानस का पाठ करते है। उन्हें पाठ करते देख कोई समझ ही नही पता कि वह मुस्लिम हैं। इसकी शुरुआत बचपन से तब हुई जब वह गांव में अपने साथियों के साथ सुंदर कांड का पाठ करने जाते थे। उनका मन रामचरित मानस के पाठ में ऐसा रमा कि गांव में होने वाले रामलीला में गांव वालों ने उन्हें व्यास की भूमिका दे दी। इसके बात तो उन्हें लोग अपने घरों में रामचरित मानस का पाठ करने के लिए कीर्तन में बुलाने लगे। इस्लाम अपने साथियों के साथ हिन्दू परिवार के घरों में जाते है, रामचरितमानस का पाठ करते हैं।

[MORE_ADVERTISE1]
[MORE_ADVERTISE2]

दशकों से रामचरित मानस का पाठ करने के कारण अब उन्हें यह पूरी तरह से कंठस्थ भी हो गया है। इतना ही नही इस्लाम को राज्य से बाहर भी लोग रामचरितमानस का पाठ करने के लिए आमंत्रित करते है। मगर उन्हें कहीं मुस्लिम होने के कारण कभी विरोध नहीं झेलना पड़ता है। लोग बड़े सम्मान से बुलाते है । मोहम्मद इस्लाम हाल ही में बीएचयू में संस्कृत के प्रोफेसर फिरोज खान के विरोध को भी गलत बताते हैं, उनका कहना है कि मजहब का पढ़ाई से कोई वास्ता नहीं हैं । वही उनके साथ रामचरित मानस का पाठ करने वाले विजय कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि हम लोगों को इनकी वजह से ही बाहर सम्मान मिलता है। गांव के लोगों को भी रामचरित मानस का पाठ करने वाले इस्लाम पर गर्व है। मोहम्मद इस्लाम के पड़ोसी रमापति दुबे का कहना है कि बचपन से ही हम सभी इन्हें मानस का पाठ करते हुए देखा है। गांव का इन्होंने नाम रोशन किया है ।

BY- SURESH SINGH

[MORE_ADVERTISE3]