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भूतों के मेले के बारे में सुना है, तीन किलोमीटर में लगता है, लाखों लोग पहुंचते हैं

Mohd Rafatuddin Faridi

Publish: Nov 06, 2019 17:07 PM | Updated: Nov 06, 2019 17:07 PM

Mirzapur

ऐसी मान्यता है कि 300 सालों से चला आ रहा है मेला, यहां आने से दूर होती है प्रेतबाधा।

मिर्ज़ापुर. तकनिकी और सुचना क्रांति के इस दौर में हम भले ही चांद पर पहुंचकर वहां घर बनाने की सोच रहे हों, लेकिन अंधविश्वास अब भी हमारा पीछा नहीं छोड़ रहा। मिर्जापुर जिले के अहरौरा में पड़ने वाले बरही गाँव में इन दिनों इसका एक जीता जागता नमूना देखा जा सकता है। बरही स्थित बेचूबीर बाबा की समाधि और बरहिया माता की समाधि स्थल पर भूतों का मेला लगा हुआ है। तीन दिन तक इस मेले में खूब भीड़ होती है। यहां लोग ये सोचकर आते हैं कि प्रेतबाधा से मुक्ति मिल जाएगी। दूर-दूर से आने वालों का दावा है कि यहां कथित तौर पर भूत-प्रेत, डायन और चुडैल से मुक्ति दिलाई जाती है।

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ऐसी मान्यता है कि मेला करीब 300 साल से चला आ रहा है। बेचूबीर और बरहिया माता पति-पत्नी थे। अब इस

मेले का संचालन उनकी वर्तमान पीढ़ी करती है। यहां फरियादी वो इंसान होता है जिसपर कथित रूप से भूत-प्रेत, चुड़ैल आदि आत्माओं का कब्जा होता है। यहां आने वालों का ऐसा विश्वास है कि बेचूबीर बाबा इससे मुक्ति दिला सकते हैं। वक्त के साथ यह मेला अब काफी बड़ा हो चुका है। तीन किलोमीटर के दायरे में फैला यह मेला हर साल नवम्बर के महीने में तीन दिन तक लगता है। इस बार भी मेले की शुरूआत हो चुकी है।

मेले में पूर्वी यूपी, मध्य प्रदेश और बिहार से लाखों की तादाद में भक्त आते हैं, जिनका आना शुरू हो चुका है। बेचुबीर बाबा की समाधि की देखभाल करने वाले उनके वंशज बृज भूषण यादव कहते हैं कि ऐसा माना जाता है कि बेचूबीर भगवान शंकर की साधना में हमेशा लीन रहते थे। वीर योद्धा लोरिक इनका परम भक्त था। वो बताते हैं कि एक बार लोरिक के साथ बेचुबीर इस घनघोर जंगलमें ठहरे थे। भगवान शिव की आराधना में लीन थे तभी उनके ऊपर एक शेर ने हमला कर दिया। तीन दिनों तक चले इस युद्ध में बेचूबीर ने अपने प्राण त्याग दिये और उसी जगह पर बेचूबीर की समाधि बन गयी। तभी से यहां मेला लगता है। जहां भूत-प्रेत के आलावा नि:सन्तान लोग भी संतान प्राप्ति की मन्नत मांगने आते हैं।

मेले में बेचूबीर बाबा की समाधि पर जाने से पूर्व लोग चार किलोमीटर पहले नदी में स्नान करते है। पहने हुए कपड़ों को वही छोड़ देते हैं और नए वस्त्र धारण कर बाका की समाधि की चौखट पर प्रवेश करते हैं। इसके बाद दर्शन के दौरान लोग प्रसाद के रूप में नारियल, चुनरी और खड़ाऊं चढ़ाते हैं। दावा किया जाता है कि बेचूबीर की चौरी के सामने पहुंचते ही प्रेत बाधा से ग्रसित लोग झूमने लगते हैं। चौरी के आस-पास बड़ी संख्या में झूमते हुए महिला और पुरुषों को देखा जा सकता है। चौरी के पास ही हवन कुंड है। इसी में प्रेत बाधा से मुक्ति दिलाई जाती है। पूरा इलाका पहाड़ी होने के कारण यहां पर सुविधाओं का अभाव है।

तीन दिनों तक लाखों लोग खेत और पहाड़ी पर रैन बसेरा बना कर रहते हैं। यहां मेले में न तो श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी का पर्याप्त इंतजाम है और न ही शौचालय का। मेले में आने-जाने के लिए भी महज एक सिंगल रास्ता है। इसके चलते ज्यादातर जाम का सामना करना पड़ता है। बेचूबीर बाबा की पत्नी बरहिया माता का मंदिर वहां से तीन किलोमीटर दूर है। लोग मेले से वहां पहुंचते हैं। हालांकि मेले में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े प्रबंध किये गये हैं। मेला प्रभारी सुरेंद्र सिंह बताया कि बेचूबीर बाबा के मंदिर के आसपास 10 CC कैमरा लगा कर निगरानी की जा रही है। वहीं मेले में खोया-पाया केंद्र भी बनाया गया है। साथ ही नदी स्नान स्थल पर जल पुलिस जगह-जगह चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है। सादे कपड़ों में भी पुलिस लगायी गयी है।

By SAuresh Singh

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