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यूपी के इस शहर में मुहर्रम के गमगीन जुलूस के दौरान तैनात रही भारी फोर्स, देखें वीडियो

Sanjay Kumar Sharma

Publish: Sep 10, 2019 19:11 PM | Updated: Sep 10, 2019 20:03 PM

Meerut

Highlights

  • हजरत के चौथे जानशीन की शहादत से कर्बला गमगीन हुआ
  • मुहर्रम के मौके पर फातिमा के बेटे हसन और हुसैन का वाकया बयां किया
  • जुलूस के दौरान भारी वाहनों का शहर में प्रवेश बंद रहा, अफसर अलर्ट

 

मेरठ। मेरठ में मुहर्रम के मौके पर मंगलवार को प्रमुख अजाखानों और मस्जिदों में हजरत साहब के शहादत के बारे में बताया गया। मुहर्रम के जुलूस को लेकर शहर को चार जोन में बांटा गया था, साथ ही रूट डायर्वजन किया गया। मुहर्रम का जुलूस शहर के कई हिस्सों निकला। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहा।

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मुहर्रम से जुड़े तथ्य बताए

इस दौरान मुहर्रम कमेटी के अली हैदर ने वाकया बयां करते हुए बताया कि हजरत मोहम्मद साहब के बाद अली चौथे जानशीन थे। वह हुजूर के चचा जात भाई भी थे और आपके दामाद भी थे। हुजूूर ने अपनी बेटी का उनसे निकाह कर दिया था। फातिमा के दो बेटे हसन और हुसैन थे इन दोनों नवासों को हुजूर बहुत चाहते थे। हुजूर के बाद अली जब आपके चौथे जानशीन हुए, तब सीरिया और उसके आसपास के पूरे इलाके के गवर्नर हजरत माविया थे। उन्होंने बताया कि कुछ कानूनी और राजनीतिक बातें ऐसी पैदा हो गई कि माविया ने अली को खलीफा मानने से इंकार कर दिया। नौबत यहां तक पहुंची कि दोनों के बीच जंग हुई और बड़ी तादाद में दोनों तरफ के फौजी मारे गए। सुलह की कोशिशें भी हुई, मगर कोई नतीजा नहीं निकला। इस तरह दोनों अपनी-अपनी हदों मे बने रहे और फिर जल्द ही एक व्यक्ति ने धोखे से हजरत अली का कत्ल का दिया और उनके बाद उनके बड़े बेटे हसन यानी हुजूर के बड़े नवासे को उनकी जगह पर बैठा दिया गया। उन्होंने माविया को लिख भेजा कि अगर आप गद्दी के हकदार हैं तो मैं यह समझूंगा कि आपको आपका हक मिल गया और हुकूमत करने का ज्यादा हक मेरा है तो मैं अपनी तरफ से आपको तोहफा देता हूं। यह वाकया इस्लाम की पवित्र तारीख में लिखा हुआ है। जिसको पूरी मुस्लिम कौम और अंग्रेज भी मानते हैं और तमाम मुसलमान इसे अमन व सुलह के लिए बहुत बड़ा फर्ज भी मानते हैं। यही धार्मिक ग्रंथ की भी तालीम हैं इसी तालीम पर मोहम्मद साहब ने भी अमल किया। उन्होंने कहा कि इसी तरह ऐसा भी हुआ कि कुछ मजहबी लोग ऐसे भी उठते रहे जो अपनी नियत के एतबार से सही थे मगर वह बड़ी ताकतों के खिलाफ हथियार उठाते समय बिल्कुल समझ नहीं पाए कि किसी भी हुकूमत का छोटा सा फौजी दस्ता उनको खत्म कर सकता है।

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रूट डायवर्ट रहा

मुहर्रम के जुलूस के दौरान महानगर में रूट डायवर्ट कर दिया गया था। भारी वाहनों की शहर के भीतर सुबह से ही नो एंट्री थी। इसके साथ ही मौके पर भारी फोर्स भी तैनात कर दिया गया। था।

तिरंगे के साथ निकाला जुलूस

जिस समय मुहर्रम का जुलूस निकाला गया। उस दौरान सभी मातम करने वालों के हाथ में तिरंगा था। उन्होंने हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगाए।