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कुख्यात ऊधम सिंह से दोस्ती कर अपराध की दुनिया में आया था संजीव पकौड़ी, उसके बाद फिल्मी स्टाइल में करता गया गुनाह

Sanjay Kumar Sharma

Publish: Oct 20, 2019 13:38 PM | Updated: Oct 20, 2019 13:38 PM

Meerut

Highlights

  • पुलिस मुठभेड़ में मारे गए संजीव पकौड़ी पर था डेढ़ लाख का इनाम
  • ऊधम सिंह के जेल जाने के बाद उसके नाम पर करता था अपराध
  • महिला प्रधान का दो बार सुहाग उजाड़ा था कुख्यात संजीव पकौड़ी ने

 

 

 

मेरठ। डेढ़ लाख रुपये का कुख्यात इनामी बदमाश संजीव पकौड़ी पुलिस मुठभेड़ में शनिवार की रात मारा गया। वह ग्राम प्रधान कविता की हत्या करने के इरादे से अपने तीन साथियों के साथ सरूरपुर पहुंचा था, लेकिन ग्राम प्रधान के सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की तो वहां से साथियों समेत बाइकों पर फरार हो गया था। इसके बाद सरूरपुर के कक्केपुर के जंगल में थाना पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में संजीव पकौड़ी मारा गया, जबकि उसके तीन साथी फरार हो गए। पुलिस तीनों फरार बदमाशों को तलाशने में जुटी है।

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कुख्यात ऊधम सिंह के लिए करता था काम

सरूरपुर खुर्द का रहने वाले संजीव पकौड़ी ने करनावल के कुख्यात ऊधम सिंह से दोस्ती करके अपराध की दुनिया में कदम रखा था। 2010 पंचायत चुनाव में संजीव पकौड़ी और उसके भाई संजय का अपने गांव सरूरपुर खुर्द में ही नीटू उर्फ रमेश से विवाद हो गया था। इसके बाद संजीव पकौड़ी ने ऐलान किया था कि वह उसके परिवार को बरबाद कर देगा। संजीव पकौड़ी करनावल के कुख्यात ऊधम सिंह के यहां आना-जाना था।

जब ऊधम सिंह और योगेश भदौड़ा के बीच गैंगवार शुरू हुई तो 2011 में ऊधम सिंह ने योगेश भदौड़ा के भाई प्रमोद भदौड़ा को तेरहवीं कार्यक्रम में गोलियों से भून दिया था। इसके बाद ऊधम सिंह जेल भेजा गया था, लेकिन नीटू ने समझा कि संजीव पकौड़ी अब उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। 2012 में सरधना में गांव प्रधान कविता के पति नीटू की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने कुख्यात संजीव पकौड़ी व उसके भाई पर शिकंजा कसा, लेकिन पकौड़ी इसलिए पकड़ में नहीं आया, क्योंकि वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था। ग्राम प्रधान कविता के पति नीटू की हत्या का गवाह और वादी उसका छोटा भाई परविंदर था। पति की हत्या के बाद कविता ने परविंदर से शादी कर ली। हालांकि इस दौरान कुख्यात संजीव पकौड़ी ने परविंदर को धमकी दी थी कि यदि उसने हत्या केे मामले में समझौता नहीं किया तो अंजाम ठीक नहीं होगा।

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ग्राम प्रधान का सुहाग फिर उजाड़ा

2015 में कविता फिर ग्राम प्रधान बन गई। एक सुरक्षाकर्मी भी कविता को दिया गया। 2017 में संजीव पकौड़ी और उसके भाई संजय ने परविंदर की भी गांव में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। इससे गांव में काफी हंगामा रहा था। ग्राम प्रधान को कविता ने अपना दूसरा पति भी खो दिया तो भी उसे धमकियां मिल रही थी। करीब दो साल पहले एसटीएफ ने कुख्यात संजीव पकौड़ी के भाई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वह आज भी जेल में बंद है। ग्राम प्रधान कविता को लगातार धमकियां मिलने के बाद गनर मुहैया कराए गए थे। शनिवार की रात को संजीव पकौड़ी अपने तीन साथियों के साथ ग्राम प्रधान की हत्या करने पहुंचा था। गनरों की सजगता के कारण सरूरपुर पुलिस ने उसे ढेर कर दिया। एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि इनामी बदमाश संजीव पकौड़ी महिला ग्राम प्रधान की हत्या करने पहुंचा था। पुलिस ने घेराबंदी की तो उसने पुलिस पर गोलियां चलाई, इसमें उसे गोली लगी थी, उसके साथी जल्दी ही पकड़ लिए जाएंगे।