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फाइलेरिया रोगी खोजने के लिये चल रहा नाइट ब्लड सैम्पल सर्वे

Ashish Kumar Shukla

Publish: Jan 21, 2020 18:33 PM | Updated: Jan 21, 2020 18:33 PM

Mau

रोगी मिलने के बाद फ्री में चलेगी दवा और इलाज

मऊ. फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मऊ जिले फाइलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा नाइट ब्लड सैंपल सर्वे किया जा रहा है। इस रोग से ग्रषित मरीजों की खोज के लिये रात्रि के समय व्यक्ति के खून के नमूने एकत्रित किए जा रहे हैं। खून जांच में फाइलेरिया पॉजिटिव पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग उन्हें निःशुल्क दवा और इलाज करायेगा।

बतादें की मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया कि इस सर्वे में प्रत्येक ब्लॉक से 500 ब्लड स्लाइड तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिस ब्लॉक में सैंपलिंग का कार्य पूरा हो जाएगा वहाँ लैब टेक्निशीयन द्वारा परीक्षण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। यह सर्वे 29 जनवरी 2020 तक चलाया जायेगा। पूरे जनपद में लगभग चार हजार स्लाइड तैयार करना है। इसी के मद्देनजर नगर सहित जिले के सभी छः ब्लाक के अंतर्गत गावों में प्रत्येक रात 10 से 15 ब्लड सैम्पल लेकर स्लाइड तैयार किया जा रही हैं।

मुख्य चिकित्साधिकारी ने लोगों से अपील कि स्वास्थ्य विभाग के इस कार्य में आमजन को कोई परेशानी न हो इसके लिए टीम का उचित सहयोग करें क्योंकि यह कार्य समुदाय को स्वस्थ रखने के उद्देश्य से ही किया जा रहा है।

जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि विभाग के द्वारा सभी ब्लॉकों के गावों में रात के समय व्यक्तियों की जांच की जा रही है क्योंकि रात के वक्त ही फाइलेरिया के वायरस सक्रिय होते हैं। इसी के आधार पर लक्षण को आसानी से पहचाना जा सकता है। जिले से वर्ष 2018-19 में 943 मरीज फाइलेरिया रोगी पंजीकृत हुए थे। इन रोगियों का सम्पूर्ण इलाज व दवा स्वास्थ्य विभाग के द्वारा निःशुल्क किया गया। इन्हें प्रत्येक छह माह मे एक बार लगातार 12 दिन तक खाना होता है। जबकि साल में एक बार फाइलेरिया दिवस पर पूरी जनसंख्या को फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दवा खिलाई जाती है।

इसके बाद जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है। यह बीमारी हाथीपांव नाम से प्रचलित है। यह बीमारी देश के 21 राज्यों में अपना विकराल रूप ले चुकी है। साल 2016 तक देश में प्रभावित जिलों में 6 करोड़ 30 लाख लोगों का उपचार किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर इस बीमारी से प्रभावित 256 जनपदों में से 100 जिलों में यह बीमारी तेजी से कम हुई है। उन्होने बताया कि लिंफेटिक फाइलेरियासिस को आम बोलचाल में फाइलेरिया कहते हैं। यह रोग मच्छर काटने से ही फैलता है। यह एक दर्दनाक रोग है। हालांकि समय से दवा लेकर इस रोग से छुटकारा पाया जा सकता है। लिंफेटिक फाइलेरियासिस को खत्म करने के लिए प्रत्येक वर्ष में एक बार राष्ट्रीय स्तर पर मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

फाइलेरिया के लक्षण

सामान्यतः इसके कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं। बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द और सूजन की समस्या दिखाई देती है। पैरों और हाथों में सूजन, हाथीपांव और हाइड्रोसिल (अंडकोषों का सूजन), महिलाओं के स्तन में सूजन के रूप में भी यह समस्या सामने आती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फाइलेरिया पूरी दुनिया में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है।

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