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घोसी उपचुनाव: जाति के समीकरण में उलझी यह सीट, बीजेपी के लिये राह नहीं है आसान

Akhilesh Kumar Tripathi

Publish: Oct 12, 2019 19:10 PM | Updated: Oct 12, 2019 19:10 PM

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2017 के विधानसभा चुनाव में मामूली अंतर से जीते बीजेपी प्रत्याशी को इस बार विपक्षी दलों से कड़ी चुनौती मिलती दिख रही है

मऊ. घोसी विधानसभा सीट पर 21 अक्टूबर को वोटिंग होनी है । चुनाव में कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन उससे पहले सभी राजनीतिक दलों की तरफ से अपने- अपने दावे किये जा रहे हैं । फागू चौहान के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर बीजेपी की राह इस बार इतनी आसान नहीं दिख रही है । 2017 के विधानसभा चुनाव में मामूली अंतर से जीते बीजेपी प्रत्याशी को इस बार विपक्षी दलों से कड़ी चुनौती मिलती दिख रही है । जैसे जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, वैसे वैसे यह सीट जातीय समीकरण में उलझती दिख रही है ।

इस सीट से बीजेपी ने विजय राजभर, सपा ने सुधाकर सिंह, बसपा ने कय्यूम अंसारी और कांग्रेस ने राजमंगल यादव और सुभासपा ने नेबू लाल को प्रत्याशी बनाया है । सपा के सुधाकर सिंह का नामांकन पत्र खारिज होने के कारण वो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरेंगे। अंतिम प्रकिया के बाद अब मैदान में कुल 11 प्रत्याशी बचे हैं।

क्या है जातीय समीकरण
जातिगत आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां मुस्लिम 60 हजार, यादव- 40 हजार, दलित- 40 हजार, अन्य अनुसूचित जाति- 20 हजार, राजभर- 45 हजार, चौहान- 35 हजार, कुर्मी- 4 हजार, सवर्ण- 40 हजार, निषाद- 15 हजार, मौर्य़ा- 12 हजार, भूमिहार- 15 हजार और अन्य पिछड़े 20 हजार है । सभी राजनीतिक दलों ने भी जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों का भी चयन किया है ।

नेताओं के अपने- अपने दावे

भाजपा के प्रत्याशी विजय राजभर ने बताया कि उनकी लड़ाई किसी से नही है, जिस तरह से 2017 के चुनाव में जनता ने बीजेपी का साथ दिया था, ठीक उसी तरह इस बार भी बीजेपी को ही जीत मिलेगी और हमारा मुकाबला बसपा के प्रत्याशी कय्यूम अंसारी से है। वहीं सपा समर्थित प्रत्याशी सुधाकर सिंह ने बताया कि प्रदेश में चल रहे उपचुनाव में अगर सपा की जीत पक्की है, तो घोसी की सीट पक्की है। हमारे पर्चे के साजिश के तहत खारिज कर दिया गया। जिस कारण हम चुनाव साइकिल के सिबंल से नही लड़ पा रहे हैं, लेकिन घोसी की जनता को हमारे चाभी चुनाव चिन्ह पर भरोसा कर वोट दे कर जिताने का फैसला किया है। वही बसपा के कय्यूम अंसारी ने बताया कि हमारी लड़ाई किसी से भी नही है। चुनाव हम एक लाख से अधिक वोटों से जीत रहे है। वहीं काग्रेस के राजमंगल यादव का हौसला भी बुलंद है। राजमंगल ने सीधे तौर पर प्रशासन, चुनाव आयोग सहित बीजेपी के सत्ता पर आरोप लगाया है कि उनके द्वारा ही उन्हें परेशान किया जा रहा है, इसी कारण जनता का समर्थन प्राप्त हो रहा है और उनकी जीत पक्की है।


भले ही इस चुनाव में सभी प्रत्याशी अपनी ही जीत को पक्की बता रहे है, लेकिन जनता किसके किस्मत को चमकाती है, ये तो 24 अक्टूबर को पता चलेगा जब चुनाव के नतीजे आयेंगे ।