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पैरों तले सब्जियां रौंदकर जताया आक्रोश

Mangal Singh Thakur

Publish: Aug 31, 2019 16:06 PM | Updated: Aug 31, 2019 16:06 PM

Mandla

अस्थाई सब्जी व्यापारियों ने बोहनी न होने पर सडक़ पर फेंकी सब्जियां

मंडला. दो दिन से बोहनी तक नहीं हुई है साब, सडऩे लगी हैं सब्जियां, अब इसे कौन खरीदेगा? आप खरीदोगे? दो दिनों से बच्चों के पेट में दाना नहीं गया है। त्योहार का टाइम चल रहा है लेकिन आप लोगों की मनमानी में सारा व्यापार चौपट हो गया। इस तरह आक्रोश व्यक्त करते हुए सब्जी व्यापारियों ने सुपर मार्केट की उन सडक़ों पर अपनी सब्जियों को फेंक-फेंककर पैरोंं से रौंद दिया जिन सडक़ों पर अपनी दुकानें लगाकर वे सब्जियां बेचा करते थे और अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। कल मौके पर पूरा नगरपालिका प्रशासन मौजूद रहा। प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस विभाग भी रहे लेकिन मौके की नजाकत को भांपते हुए सब चुप्पी साधे रहे।
नगरपालिका प्रशासन ने सोचा भी नहीं था कि गुरुवार को सुपर मार्केट की सडक़ें खाली कराने और हॉकर जोन में सब्जी व्यापारियों को शिफ्ट करने की कवायद 24 घंटे पूरे होने से पहले ही फेल हो जाएगी। हागगंज बाजार स्थित सुपर मार्केट की सडक़ों पर फेरी लगाने वाले सब्जी व्यापारियों ने शुक्रवार को हल्ला बोल दिया और हॉकर जोन में दुकाने लगाने से स्पष्ट मना कर दिया। सब्जी व्यापारियों का आरोप है कि बिना किसी सुनियोजित प्लान के हॉकर जोन में दुकानें शिफ्ट करने से उनका व्यापार चौपट हो गया है। जिनको दुकानें अलॉट हुईं उनमें से ज्यादातर सुपर मार्केट की सडक़ों पर कभी दुकानें लगाए ही नहीं, वे तो साप्ताहिक बाजार में अंजनिया, बिछिया क्षेत्र में दुकानें लगाते थे। सर्वे के दिन वे सुपर मार्केट की सडक़ पर एक-एक टोकरी लेकर बैठ गए और सर्वे लिस्ट में अपना नाम चढ़वा लिया। जो दुकानदार वास्तव में कई वर्षों से इन सडक़ों पर दुकानें लगा रहे हैं, उनमें से 70-80 दुकानदारों को हॉकर जोन में जगह अलॉट ही नहीं हुई।
इसी का अंदेशा था
सब्जी की अस्थाई दुकानदारों का आक्रोश भडक़ेगा और कुछ ऐसा ही रूप लेगा, इस बात का अंदेशा गुरुवार के दिन ही थोक सब्जी व्यापारियों ने जता दिया था। गुरुवार को जिस तरह से उन्होंने छोटे सब्जी व्यापारियों को भटकते देखा तो इस बात को स्वीकार किया है कि हॉकर जोन में जिन लोगों को दुकाने बंटी हैं उनमें से कई उसके अधिकारी ही नहीं हैं। हॉकर जोन में ज्यादातर फेरी वाले सिर्फ हाट बाजार में ही अब तक दुकानें लगाते रहे हैं, लेकिन सर्वे के दिन जो उस वक्त बाजार में उपस्थित रहे, वे अपने किसी साथी की सब्जी की टोकरी लेकर बैठ गए और उनका सर्वे लिस्ट में नाम चढ़ गया, नगरपालिका की वीडियोग्राफी में भी वे लाइव हो गए। नगरपालिका प्रशासन ने भी सर्वे के दिन सब्जी एसोसिएशन के पदाधिकारियों से कोई मदद नहीं ली, किसी पदाधिकारी को अपने साथ नहीं रखा। यदि वे किसी भी पदाधिकारी को अपने साथ रखते तो वे यह पहचान करने में सक्षम हैं कि किस फेरी वाले ने सर्वे के दिन ही अपनी दुकान लगाई थी क्योंकि वे कई पीढिय़ों से फेरी लगाने वाले सब्जी व्यापारियों के साथ ही खरीदी-बिक्री कर रहे हैं।