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खतरों से भरा है भविष्य संवारने का सफर

Mangal Singh Thakur

Publish: Aug 21, 2019 16:52 PM | Updated: Aug 21, 2019 16:52 PM

Mandla

शिक्षा के लिए डोंगी में पार करते है उफनाती नर्मदा नदी

मंडला. भविष्य को अच्छा बनाना है तो वर्तमान में मुसीबत तो उठानी पड़ेगी। लेकिन शिक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालना आज के दौर में लोगों को खल रहा है। जिसमें स्थानीय प्रशासन की भी लापरवाही सामने आ रही है। मामला जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत पटपरा रैयत के पोषक ग्राम जूनामंडला का है। जहां दर्जनो बच्चे माध्यमिक व हाईस्कूल की शिक्षा लेने के लिए नर्मदा नदी पार कर ग्राम मधुपुरी जाते हैं। खुले मौसम में जोखिम कम रहता है लेकिन बारिश के मौसम में उफनाती नदी को पार करना पड़ रहा है। इसके लिए नाव भी उपलब्ध नहीं है बल्कि लकड़ी की डोंगी में बच्चे डरे-सहमे नदी पार करते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि जूनामंडला में प्राथमिक शाला है। इसके बाद उन्हें माध्यमिक शाला के लिए रसैया दोना तीन किलोमीटर दूर व हाईस्कूल के लिए पटपरा रैयत सात किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। जबकि मधुपुरी में महज नदी पार करना होता है। वहीं मधुपुरी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था भी ठीक है। वहीं खुडिय़ा ग्राम पंचायत के पोषक ग्राम बर्राटोला में एक माध्यमिक शाला है जिसकी दूरी एक डेढ़ किलामीटर है। लेकिन बीच में खेत होने व कच्चे रास्ते के कारण बारिश के समय परेशानी होती है।
अनाज के लेनदेन से निर्धारित होता है शुल्क
ग्राम पंचायत पटपरा रैयत के सरपंच का कहना है कि अभिभावक की मंसा ठीक नहीं है। यहां नाव का ठेका मधुपुरी पंचायत द्वारा दिया जाता है। ठेकेदार और गांव वालों के बीच वृत (वार्षिक अनाज का लेनदेन) निर्धारित होता है। जिसमें स्थानीय लोग व स्कूली बच्चे नियमित शुल्क ना देकर नदी पार कर सकते हैं। जिसके कारण अभिभावक अपने बच्चों को मधुपुरी में पढ़ाना उचित समझते हैं। वहीं मधुपुरी के लोगों का कहना है कि जूना मंडला के बच्चों का स्कूल में एडमिशन लेने के से पहले अभिभावकों से लिखित में ले लिया जाता है जिसमें जोखिम की पूरी जिम्मेदारी अभिभावक के ऊपर रहती है।
छोटी नाव बन रही खतरा
बच्चे नदी पार करने के लिए डोंगी का सहारा ले रहे हैं। जबकि ग्राम पंचायत मधुपुरी वकायदा घाट का ठेका देकर राजस्व वसूलती है। लेकिन घाट में उतनी सुविधाएं व सुरक्षा नहीं है। यहां मधुपुरी बाजार के लिए भी लोग नाव का सहारा लेते हैं। लेकिन उन्हें छोटी नाव (डोंगी) में ही नदी पार कराया जाता है। तेज बाहव में जोखिम बढ़ जाता है। लोगों का कहना है कि घाट में बड़ी नाव उपलब्ध करा दी जाए तो काफी राहत मिलेगी। यहां दीवाली के बाद मधुपुरी में लगने वाले घोड़ाघाट मेला के समय ही बड़ी नाव चलती है।
पहले निकालते हैं पानी
पत्रिका टीम मंगलवार की शाम जब मधुपुरी घाट पहुंची तो नाजारा कुछ अलग ही थी। यहां रिमझिम बारिश के बीच कुछ छात्र-छात्राएं नाव निकलने का इंतजार कर रहे थे। इसके पहले एक छात्र पतवार से नाव में भरा पानी निकल रहा था। इसके बाद नाव का संचालन के लिए एक व्यक्ति आया और नाव की रस्सी खोलकर बैठ गया। छोटी सी नाव में 7 लोग सवार होकर नदी पार के लिए निकल लिए। लोगों का कहना है की जलस्तर अधिक होने पर बड़ी नाव के संचालन में दिक्कत होती है। जबकि छोटी नाव आसानी से कट जाती है।
इनका कहना
गांव वालों को कई समझाईश दी गई है। जबकि रसैयादाना व पटपरा रैयत जाने के लिए मार्ग भी अच्छा है। इसके बाद भी पालक बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
रत्तोबाई, सरपंच, ग्राम पंचायत पटपरा रैयत