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दवा देते हैं 2, एंट्री करते हैं 10 दवाओं की

Mangal Singh Thakur

Publish: Jul 20, 2019 10:50 AM | Updated: Jul 20, 2019 10:50 AM

Mandla

आयुर्वेदिक चिकित्सालय में कमीशन का कारोबार जोरों पर

मंडला. शासकीय जिला आयुर्वेदिक चिकित्सालय में कमीशन की आड़ में सरकारी दवाओं का काला कारोबार जोरों पर चल रहा है। इससे आदिवासी बहुल्य अंचल के गरीब मरीज बेहद परेशान हो रहे हैं और उनका आर्थिक शोषण भी जमकर किया जा रहा है। आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पहुंचने वाले मरीजों में ज्यादातर गरीब और श्रमिक वर्ग के मजदूर और निर्धन लोग शामिल हैं। चिकित्सालय प्रबंधन उन्हें भी अपनी काली कमाई का जरिया बनाए हुए हैं।
पत्रिका टीम ने आयुर्वेदिक चिकित्सालय की पड़ताल की और पाया कि यहां बड़े ही व्यवस्थित ढंग से दवा का काला कारोबार किया जा रहा है और कमीशन की आड़ में जमकर मुनाफा भी कमाया जा रहा है।
ऐसे हो रही है धांधली
अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को चिकित्सक द्वारा जो पर्चा लिखा जा रहा है। उसमें यदि 10 दवाएं लिखी जा रही हैं तो मरीज को अस्पताल से मात्र 3-4 दवा ही उपलब्ध कराई जा रही है। चिकित्सक स्पष्ट रूप से शहर की एक दवा दुकान का नाम लेकर मरीजों को वहां दवा खरीदने को भेज रहे हैं। साथ ही चिकित्सालय के रिकार्ड में पर्चे में लिखी वह सभी दवाइयां दर्ज की जा रही हैं, जिन्हें चिकित्सक ने लिखा तो है लेकिन मरीज को वह दवा अस्पताल से न देकर बाहर की दवा दुकान से खपाई जा रही है। यानि शासन की आंखों में भी धूल झोंकी जा रही है। जबकि नियम तो यह है कि भले ही पर्चे में 10 दवाएं लिखी हों, रिकार्ड में एंट्री सिर्फ उन्हीं दवाओं की होनी चाहिए जो मरीज को चिकित्सालय से उपलब्ध कराई जा रही है।
बाहर जा रहा स्टॉक
सूत्रों के अनुसार, चिकित्सालय का दवा स्टॉक बाहर की दुकानों को उपलब्ध कराया जा रहा है और वहीं से मरीजों को बेचा जा रहा है। शासन की ओर से निशुल्क उपलब्ध कराई गई दवा को मरीज खरीदने को विवश है और दवा दुकानदार उस निशुल्क दवा के बदले मुंहमांगी कीमत वसूल कर रहे हैं और उसमें कमीशन चिकित्सालय में पदस्थ उन अधिकारी-कर्मचारियों को भुगतान कर रहे हैं, जिनकी मिलीभगत से यह गोरखधंधा चलाया जा रहा है।
इस बारे में डॉ गायत्री उइके, आरएमओ, शासकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, मंडला का कहना है कि नियमानुसार, रिकार्ड में सिर्फ उन्हींं दवा की एंट्री होनी चाहिए जो चिकित्सालय से मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही है। यदि रिकार्ड में उन दवाओं की भी एंट्री की जा रही है जो मरीज को नहीं दी जा रही तो इस तरह की लापरवाही पर तत्काल रोक लगाई जाएगी।