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औषधीय फसलों की खेती, मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण, बाजार के लिए प्रशिक्षण संपन्न

Sawan Singh Thakur

Publish: Nov 09, 2019 03:00 AM | Updated: Nov 08, 2019 12:29 PM

Mandla

कार्यशाला के दौरान उपस्थित किसान एवं अन्य

मंडला। कृषि विज्ञान केन्द्र मंडला के सभागार भवन में प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें वाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के पौध कार्यिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ एएस गोंटिया, सहप्राध्यापक डॉ ज्ञानेन्द्र तिवारी मौजूद रहे। सर्वप्रथम कार्यक्रम में आये औषधीय पौधो की जिले में अलख जगा कर खेती करने वाले प्रगतिशील कृषकों का मुख्य अतिथि एवं केंद्र के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ विशाल मेश्राम ने पुच्छ गुच्छ एवं माला से स्वागत एवं उनका उत्साहवर्धन किया। डॉ एएस गोंटिया द्वारा पावर पाइंट प्रदर्शन द्वारा औषधीय पौधे जैसे अश्वगंधा जो कि भारतीय जिनसेंग के नाम से जाना जाता है और बाजार में इसकी मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिससे गठियावात, केंसर, नपुंसकता आदि बीमारियों की कारगर औषधी है सतावर जिसका उपयोग महिलाओं एवं जानवर में दुग्ध की वृद्वि, कमरदर्द, जनरल समान्य स्वास्थ्यवर्धक के रूप में उपयोगी है कालमेघ जो कि मुख्यत: बुखार, मलेरिया, डेंगु, चिकिनगुनिया तथा मधुमेय के रोगियों के इलाज के लिए प्रयोग में होता है। इसकी खेती किस प्रकार की जाए जिससे अधिक से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके कि विस्तारपूर्वक जानकरी दी। डॉ ज्ञानेन्द्र तिवारी द्वारा इन औषधीय पौधो के मूल्यसंबर्धन प्रसंस्करण, बाजार पर कृषकों को विस्तृत जानकारी प्रदान की साथ की कृषकों की जिज्ञासाओं को सही ढंग से समझाया, कृषकों को सेमी आपरेटेड केप्स्यूल बनाने की ईकाई का प्रदर्शन किया यह मशीन हाथ से और इलेक्ट्रानिक दोनो से चलायी जा सकती है। कृषकों ने स्वयं दवाईयों के पाउडर को खाली केप्स्यूल में भरकर दवाई मुक्त केप्स्यूल इस मशीन के द्वारा बनाना सीखा। प्रशिक्षण उपरांत जिले में औषधीय पौधो की खेती कर रहे कृषकों के खेतों मे भ्रमण का कार्यक्रम रखा गया। जिससे अन्य कृषकों को प्रत्यक्ष रूप से देखकर इनकी खेती समझायी जा सके कि किस प्रकार सही वैज्ञानिक ढंग से इनकी खेती का लाभ कमाया जा सके ग्राम माधोपुर ब्रजेशानंद तिवारी प्रगतिशील कृषक के यहां भ्रमण वैज्ञानिकों एवं अन्य कृषकों द्वारा किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने इस प्रशिक्षण का महत्व एवं उपयोगिता बताते हुए बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मध्य प्रदेश में आदिवासी कृषको के बीच में औषधीय फसलों की कृषि को मूल्य सवंर्धित करके किस प्रकार कृषकों की आय को बढ़ाया जा सके पर आधारित था, साथ ही केन्द्र के वैज्ञानिक आरपी अहिरवार एवं डॉ प्रणय भारती ने कृषकों को औषधीय पौधो में लगने वाले कीट बीमारियों को सचित्र समझाया इनके नियंत्रण के लिये यांत्रिक, रासायनिक औषधीयों के तरीके बताए जिससे सही समय पर इनका नियंत्रण कर अधिक से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके। कृषको से औषधीय पौधो की अधिक से अधिक खेती करने के लिये प्रेरित किया अंत में प्रशिक्षण में आए मुख्य अतिथियों एव प्रगतिशील कृषक अरविंद अग्रवाल, लक्ष्मी भावरे एवं अन्य प्रगतिशील कृषकों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में एएस गोंटिया, डॉ ज्ञानेन्द्र तिवारी, डॉं विशाल मेश्राम, आरपी अहिरवार, प्रणय भारती, पशुपालन विभाग से डॉ यूएस तिवारी, डीएमओ एसके गवले, आसा फाउंडेसन से सोमनाथ चावले, शैलश वागड़े, कान्हा प्रोड्यूसर कंपनी से रंजीत कछवाहा एवं केन्द्र समस्थ कर्मचारी उपस्थित रहे।

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