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सरकारी स्कूलों में घट गई बच्चों की भर्तियां

Sawan Singh Thakur

Publish: Aug 31, 2019 11:32 AM | Updated: Aug 31, 2019 11:32 AM

Mandla

साल-दर-साल आ रही बच्चों की दर्ज संख्या में कमी

सावन सिंह
मंडला। शिक्षा की मुख्य धारा से प्रत्येक बच्चे को जोडऩे के लिए भले ही शासन कई तरह की योजनाओं का संचालन कर रहा है ताकि शैक्षणिक संस्थाओं में बच्चों की दर्ज संख्या बढ़े। आदिवासी बहुल्य जिले में शासन की यह कवायद और भी तेज होने का दावा किया जा रहा है इसके बावजूद साल दर साल शैक्षणिक संस्थाओं में बच्चों की दर्ज संख्या लगातार कम होती जा रही है। सिर्फ बच्चों का ही नहीं, अभिभावकों का भी सरकारी स्कूलों से मोहभंग होता जा रहा है। यही वजह है कि जिले के सरकारी प्रायमरी व मिडिल स्कूलों में बच्चों की संख्या बढऩे के बजाए घट रही है। शिक्षा विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि वर्ष 2019 में शासकीय प्राथमिक स्कूलों में कक्षा एक से लेकर 5वीं तक के 93,328 बच्चों ने प्रवेश पाया है। जबकि पिछले साल 2018 में यह आंकड़ा 96940 था। यानि इस वर्ष प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की दर्ज संख्या में 3612 की कमी आई है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इससे बुरी दशा तो शासकीय माध्यमिक विद्यालयों की है जहां बच्चों की दर्ज संख्या में और अधिक गिरावट दर्ज की गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 में शासकीय माध्यमिक विद्यालयों में दर्ज होने वाले बच्चों की संख्या 60,198 रही, जबकि वर्ष 2018 में यह आंकड़ा 64,591 रहा। स्पष्ट है कि दर्ज संख्या में 4393 की कमी दर्ज की गई है।
यह गिरावट सिर्फ एक साल से नहीं आ रही है बल्कि 2018 में भी यही हाल रहा। वर्ष 2017 में प्राथमिक विद्यालयों में दर्ज संख्या 97,845 रही और वर्ष 2018 में 96940, यानि 905 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2017 मे दर्ज संख्या 68286 रही और वर्ष 2018 में 64,591, यानि माध्यमिक विद्यालयों में भी 3695 की गिरावट दर्ज की गई। सरकारी स्कूलों में बच्चों की दर्ज संख्या घटने से शिक्षा विभाग की उन योजनाओं पर सवाल खड़े हो गए है, जो सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए संचालित हो रही है। वहीं स्कूल चले हम, जैसे अभियानों की पोल भी खुल गई है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को अधिक से अधिक से प्रवेश दिलाने के लिए सरकार ने नि:शुल्क प्रवेश, पुस्तक वितरण, गणवेश, साइकिल वितरण, मध्यान्ह भोजन जैसी कई योजनाएं संचालित कर रखी है। ये योजनाएं भी बच्चों को नहीं लुभा पा रही है।
स्कूल खुलने के साथ ही शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल चले हम अभियान शुरु किया गया। इस अभियान के तहत सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अपने-अपने स्कूल में बच्चों का प्रवेश बढ़ाने के लिए अपने क्षेत्र के वार्ड और मोहल्लों में जाकर घर-घर दस्तक दिए जाने के निर्देश दिए गए है। जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारियोंं का कहना है कि जिले के शिक्षकों ने भी अपने-अपने क्षेत्र में प्रवेश बढ़ाने के लिए घर-घर दस्तक दी। इसके बावजूद बच्चों की दर्ज संख्या में कमी इस बात को दर्शा रही है कि मैदानी अमले ने ठीक तरह से काम नहीं किया।
इन योजना के भरोसे शिक्षारुक जाना नहीं योजना, सर्व शिक्षा अभियान, स्कूल चलें हम, माध्यन भोजन कार्यक्रम, छात्रगृह योजना, राज्य छात्रवृत्ति योजना, दिल्ली के उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेशित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सुविधा योजना, कन्या साक्षरता प्रोत्साहन योजना, गणवेश प्रदाय योजना, कम्प्यूटर आधुनिक कार्यालय प्रबंधन प्रशिक्षण योजना, अनुसूचित जनजाति के अभ्यार्थियों को सिविल सेवा परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने पर प्रोत्साहन राशि प्रदाय योजना, पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में अध्ययनरत/ निवासरत अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं को अंग्रेजी विषय की कोचिंग योजना।
एक्सपर्ट की राय
प्राइवेट स्कूल बच्चों को कर रहे कैरी
सेवानिवृत्त प्राचार्य, हायर सेकंडरी विद्यालय केएस शुक्ल का कहना है कि दरअसल, आरटीई के सख्ती से लागू होने के कारण अभिभावक बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश दिला रहे हैं। यह एक बहुत बड़ी वजह है दर्ज संख्या में कमी आने की। आंगनबाड़ी से निकलते ही प्राइवेट स्कूल बच्चों को अपने यहां कैरी करने के लिए अभिभावकों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। शासकीय विद्यालयों में अब सिर्फ वही अभिभावक बच्चों को भेजना पसंद कर रहे हैं जो मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ लेना चाहते हैं।
स्कूलों में बच्चों की दर्ज संख्या
वर्ष प्राथमिक माध्यमिक
2019 93,328 60,198
2018 96,940 64,591
2017 97,845 68,286