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रिश्वतखोर सबइंजीनियर को चार साल की सजा

Mangal Singh Thakur

Publish: Aug 31, 2019 16:17 PM | Updated: Aug 31, 2019 16:17 PM

Mandla

स्वच्छ भारत अभियान के शौचालय निर्माण के ठेकेदार से ली थी रिश्वत

मंडला. विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम द्वारा विशेष प्रकरण के मामले में अभियुक्त लल्लूलाल गुप्ता को दोषी पाते हुये भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 में 04 वर्ष के कठोर करावास तथा धारा 13(1)(डी), 13(2) में 05 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5000-5000 रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। अरूण कुमार मिश्रा जिला अभियोजन अधिकारी द्वारा बताया गया कि प्रार्थी मनीष तिवारी निवासी हनुमान जी वार्ड महाराजपुर द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत हाईस्कूल बुदरा पिपरिया में वर्ष 2014-15 में शौचालय का निर्माण किया गया था। मनीष तिवारी द्वारा शौचालय निर्माण के भुगतान के संबंध में हाईस्कूल बुदरा पिपरिया के प्राचार्य राजीव चौहान से संपर्क किया तो प्राचार्य द्वारा बताया गया कि सबइंजीनियर के द्वारा निर्मित शौचालय का मूल्यांकन करने के बाद ही भुगतान किया जाएगा। मनीष तिवारी द्वारा जनपद शिक्षा केन्द्र बीजाडाड़ी में पदस्थ उपयंत्री लल्लूलाल गुप्ता से संपर्क कर उनसे हाईस्कूल बुदरा पिपरिया में किये गये शौचालय का मेजरमेंट करने का निवेदन किया गया तो उपयंत्री गुप्ता द्वारा उक्त कार्य के लिए 10 हजार रूपए रिश्वत की मांग की गयी। प्रार्थी मनीष तिवारी ने उपयंत्री के विरुद्ध रिश्वत मांगने के संबंध में 16 मार्च 2016 को लोकायुक्त कार्यालय जबलपुर में शिकायत की। पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त जबलपुर द्वारा निरीक्षक प्रभात शुक्ला को कार्यवाही करने के लिए अधिकृत किया गया। पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त संगठन जबलपुर द्वारा सब इंजीनियर लल्लूलाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथो पकडऩे के लिए एक छापा दल का गठन किया गया। 17 मार्च 2016 को उदयपुर में संजय ढाबा में अभियुक्त लल्लूलाल को प्रार्थी मनीष तिवारी से 10 हजार रूपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकडकऱ उसे मौके पर गिरफ्तार किया गया।
विवेचना कार्यवाही में लोकायुक्त संगठन अभियुक्त लल्लूलाल के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, एवं धारा 13(1)(डी), 13(2) का अपराध प्रमाणित पाते हुए उसके विरूद्ध अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मंडला द्वारा विचारण कार्यवाही के बाद अभियोजन द्वारा साक्ष्य को विश्वसनीय मानते हुए तथा 30 अगस्त को निर्णय पारित कर अभियुक्त लल्लूलाल को दोषी पाते हुये भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 में 04 वर्ष के कठोर कारावास तथा धारा 13(1)(डी), 13(2) में 5 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5000-5000 रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। शासन की ओर से मामले की पैरवी जिला अभियोजन अधिकारी अरूण कुमार मिश्रा के द्वारा की गई।