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रिहा हो रहे छोटे-गौण लंबित मामलों के आरोपित

Sawan Singh Thakur

Publish: Nov 10, 2019 03:03 AM | Updated: Nov 09, 2019 17:39 PM

Mandla

बेल नॉट जेल के सिद्धांत के पालन में जिला जेल अव्वल

मंडला। लंबे अरसे से लंबित छोटे गौण मामलों के जेल में बंद गरीब आरोपितों को छोडऩे की दिशा में काम जिला जेल में तेजी से हो रहा है। जानकारी के अनुसार, मप्र हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को आदेश जारी कर शीर्ष कोर्ट के इस संबंध में जारी हालिया दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन कराने को कहा गया है। मंडला जिला जेल अधीक्षक एसके सागर का इस बारे में कहना है कि बेल नॉट जेल के सिद्धांत का पालन कर ऐसे मामलों को चिन्हित किया जाना है। हालांकि इस संबंध में पहले से ही सभी जेलों में काम हो रहा है। मंडला स्थित जिला जेल में हर दो-तीन दिन में इस संबंध आरोपितों के आवेदन आते हैं। जिन्हें न्यायालय की ओर अगे्रषित कर दिया जाता है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 अक्टूबर 2018 को जनहित याचिका की सुनवाई के बाद दिशा निर्देश दिए थे। दिशा निर्देश में कहा गया है कि छोटे गौण मामलों में और गरीब तबके के आरोपितों को जमानत न भर पाने क कारण लंबे अरसे से जेल में रखा गया है। इन मामलों को चिन्हित कर विचार के बाद ऐसे आरोपितों को छोड़ा जा सकता है। इससे जेलों की गैर जरुरी भीड़ खत्म होगी।
हर सोमवार बंदी परेड
जिला जेल अधीक्षक एसके सागर का कहना है कि हर सोमवार को जेल में बंदी परेड का आयोजन किया जाता है। इस दौरान जो बंदी अपनी परिस्थितियों, व्यक्तिगत परेशानियों, विवशता, अपराध संबंधी जानकारी देते हैं और अपनी रिहाई के लिए लिखित आवेदन देते हैं। विधि अंतर्गत होने पर उन आवेदनों को न्यायालय की ओर अगे्रषित किया जाता है। ऐसी धाराएं, जिनमें सात वर्ष से कम का कारावास हो, उन सभी धाराओं के अंतर्गत न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपियों के आवेदनों पर विचार किया जाता है। हालांकि सभी छोटे गौण धाराओं में बंद आरोपियों के साथ यह नहीं होता, मौका, परिस्थितियां भी निर्भर होती हैं।
इन पर विचार
केस-1
यदि कोई ग्रामीण पलायन कर मजदूरी के लिए अन्य थाना क्षेत्र में चला जाए, मजदूरी के बाद यदि कहीं से उसे थोड़ी शराब, परिचित अथवा मित्र अथवा वह खुद खरीदकर पी ले। गश्त के दौरान पुलिस द्वारा उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जाए तो इस तरह के आरोपियों के आवेदनों पर विचार किया जाता है।
केस -2
अक्सर दो परिवारों में विवाद, मारपीट आदि होनेे के बाद मामला थाने तक पहुंच जाए, किसी युवा परिजन पर मामला कायम कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाए। युवा का भविष्य चौपट होने से बचाने और परिजनों के आवेदन पर उसकी रिहाई के लिए लिखा गया पत्र न्यायालय को अग्रेषित किया जाता है।
केस-3
यदि किसी बाइक चोरी आदि के मामले में आरोपी न्यायिक हिरासत में पहुंचे, बाइक जब्त भी हो जाए और उसे बाइक मालिक को पुलिस द्वारा लौटा भी दिया जाए तो ऐसे आरोपी द्वारा आवेदन करने पर उसकी रिहाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाई जाती है। ऐसे अन्य कई तरह के मामले हैं, लेकिन सभी मामलों में एक ही तरह की परिस्थिति, धाराओं आदि को आधार नहीं बनाया जा सकता।
वर्जन:
जिला जेल में हर दो-तीन दिन में एक आवेदन इस तरह की रिहाई के लिए आरोपित द्वारा भेजे जाते हैं। हमारा कर्तव्य है उन्हें न्यायालय की ओर अग्रेषित करना और न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश का पालन करना।
एसके सागर, अधीक्षक, जिला जेल, मंडला।

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