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महोबा में क्रेशर व्यापारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, यूपी सरकार की खनन नीति ने पत्थर व्यवसायियों की तोड़ी कमर

Karishma Lalwani

Publish: Aug 18, 2019 13:55 PM | Updated: Aug 18, 2019 18:10 PM

Mahoba

- यूपी सरकार को करीब 80 करोड़ के राजस्व के नुकसान का अनुमान
- खनन नीति के तहत मंहगी रॉयल्टी से पत्थर व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित होकर बंदी की कगार पर पहुंच गया है

महोबा. सरकार की खनन नीति के चलते महोबा का क्रेशर उद्दोग बंद होने की कगार पर है। इसे लेकर पत्थर व्यवसायी और प्रेशर संचालकों में भारी गुस्सा है। शासन की नई खनन नीति के तहत मंहगी रॉयल्टी से पत्थर व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित होकर बंदी की कगार पर पहुंच गया है। जिले के पत्थर व्यवसायियों ने सरकार की खनन नीति के खिलाफ 17 अगस्त से अनिश्चित्कालीन हड़ताल का आह्वान किया है। उनकी मांग है कि सरकार खनन नीति में बदलाव करे, ताकि सूबे का सबसे बड़ा क्रेशर उद्दोग सुचारू रूप से चल सके। आपको बता दें कि महोबा में करीब 300 पत्थर क्रेशर प्लांट संचालित है। इनसे सरकार को हर महीने से 60 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलता है। वहीं, क्रेशर में खर्च होने वाली बिजली से भी सरकार को करीब 20 करड़ रुपये का फायदा हो रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि शासन की नई खनन नीति के तहत मंहगी रॉयल्टी से पत्थर व्यवसाय बुरी तरह हो रहा है। आर्थिक तंगी की मार से बचने के लिए कुछ व्यापारियों ने सीमावर्ती पड़ोस मध्य प्रदेश में अपना कारोबार शुरू कर दिया, तो कुछ क्रेशर प्लांट मालिकों ने बिजली के कनेक्शन ही बंद करवा दिए। 17 अगस्त से हड़ताल पर बैठे व्यापारियों की वजह से जहां सरकार को राजस्व की हानि हो रही हैं, वहीं करीब एक लाख मजदूरों का रोजगार छिन गया है। इनमें मजदूर, मैकेनिक, और पेट्रोल कर्मी शामिल हैं। पत्थर उद्योग मंडी के व्यापारियों की हड़ताल के चलते मंडी में सन्नाटा छाया रहा। मंडी के एक दर्जन पेट्रोल पंपों पर सन्नाटा छाया रहा।

महोबा के पत्थर उद्योग मंडी से शासन को प्रति माह 60 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलता है। वहीं बिजली राजस्व के रूप में 20 करोड़ से ज्यादा की भारी भरकम रकम प्रभावित होगी। क्रेशर प्लांट में काम करने वाले लगभग एक लाख मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट है। क्रेशर प्लांट व्यापारियों की सामूहिक अनिश्चिकालीन हड़ताल से करीब एक दर्जन पेट्रोल पम्पों में सन्नाटा पसरा रहा।

व्यापरियों ने कहा- यूपी की अपेक्षा एमपी की खनन नीति ज्यादा बेहतर

क्रेशर पत्थर उद्योग के अध्यक्ष रामकिशोर सिंह व व्यापारी इंद्रमणि त्रिपाठी का कहना है कि पत्थर उद्योग सरकार की गलत खनन नीति के चलते बंद करना पड़ा। कई बार जिलाधिकारी को अवगत कराया गया। शासन को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन आज तक इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई न ही समस्या का कोई निदान निकाला गया। ऐसे में मजबूर होकर हड़ताल करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की अपेक्षा मध्य प्रदेश की खनन नीति ज्यादा बेहतर है। इसलिए अब यहां के व्यापारी मध्य प्रदेश की तरफ रुख कर रहे हैं। यहां व्यापार दिन-ब-दिन घटता जा रहा है, जिसका नतीजा है कि व्यापार अब खत्म होने की कगार पर है। अगर पत्थर उद्दोग व्यापार बंद होता है, तो इससे एक लाख मजदूर भुखमरी की कगार पर आ जाएंगे। उन्होंने बताया कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं मानी, तो यह उद्योग हमेशा के लिए बंद हो जायेगा।

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