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महोबा में कलाम को किया सलाम, अनशन स्थल पर मनायी जयंती

Abhishek Gupta

Publish: Oct 15, 2019 21:31 PM | Updated: Oct 15, 2019 21:31 PM

Mahoba

पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर बुंदेली समाज संयोजक तारा पाटकर अपने साथियों के साथ आल्हा चौक में 475 दिन से बैठे हैं अनशन पर

महोबा. आल्हा चौक पर पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर 475 दिन से चल रहे ऐतिहासिक अनशन के मंच पर आज भारत के पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन अब्दुल पाकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम की 88वीं जयंती मनायी गयी एवं उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गये।

अनशन की अगुवाई कर रहे बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म तमिलनाडु में रामेश्वर के धनुष्कोडी गांव में आज ही के दिन एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। वे दस भाई बहन थे। गरीबी के कारण उन्होंने पढ़ाई के लिए रेलवे स्टेशन पर अखबार तक बेंचे लेकिन अपनी काबिलियत के बल पर वे 2002 में भारत के 11वें राष्ट्रपति बने। इतना ही नहीं कलाम भारत के महानतम वैज्ञानिकों में शुमार हो गये। वे भारत के परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ थे। अग्नि और पृथ्वी मिसाइल का सफल प्रक्षेपण उन्हीं की देन थी।

बुंदेली समाज के महामंत्री अजय बरसैया ने कहा कि कलाम एक शाकाहारी मुस्लिम थे। वे ताउम्र अविवाहित रहे। वे भारत को महाशक्ति बनाना चाहते थे।इसीलिए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के 500 विशेषज्ञों की मदद से विजन 2020 डाक्यूमेंट तैयार किया और कहा कि भारत विकसित देश तभी बन पाएगा जब शहर और गांवों का विकास एक समान होगा और देश की जीडीपी 10-11 फीसदी हो पायेगी। इसके लिए अभी हमें लंबा सफर तय करना पड़ेगा।

अनशन स्थल में इस मौके पर इकबाल हुसैन, कमलेश श्रीवास्तव, कल्लू चौरसिया, उदित यादव, हरिश्चंद्र वर्मा, इंद्रजीत सिंह, डा. प्रभु दयाल, विष्णु दत्त खरे, अमरचंद विश्वकर्मा समेत तमाम लोग मौजूद रहे।