स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

आल्हा-ऊदल के पराक्रम से जुड़ा महोबा का कजली मेला, दिलाता है त्याग और बलिदान की याद

Akansha Singh

Publish: Aug 17, 2019 09:17 AM | Updated: Aug 17, 2019 09:17 AM

Mahoba

- जनपद में लगने वाले उत्तर भारत के आठ सदी पुराने ऐतिहासिक कजली मेला आल्हा ऊदल के शौर्य, स्वाभिमान व मातृभूमि प्रेम का अनूठा उदाहरण है।

- विंध्य पर्वत श्रृंखला, सुरम्य सरोवरों और मोहक नैसर्गिक छटाओं से परिपूर्ण बुंदेलखंड की देवभूमि महोबा अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व लोक साहित्य की विविधता तथा लोक उत्सवों के लिए जानी जाती है।

- कजली मेला यहां के लोक जीवन में संगीत, संस्कृति और सांप्रदायिक तालमेल का जीता जागता दर्पण है।