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Pitru Paksha 2019: तो इसलिए श्राद्ध के दौरान घर पर कौआें का आना माना जाता है शुभ, पढ़ें महत्व

Akanksha Agrawal

Publish: Sep 19, 2019 11:04 AM | Updated: Sep 19, 2019 11:04 AM

Mahasamund

श्राद्ध पक्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से अश्वनी कृष्ण अमावस्या तक कुल 16 दिन तक पितरों का श्राद्ध किया जा रहा है।

बिरकोनी. ग्राम बिरकोनी में घरों में गणेश चतुर्थी व अनन्द चौदस के बाद पितृ पक्ष मनाया जा रहा है। हिन्दू कलेंडर के अनुसार श्राद्ध पक्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से अश्वनी कृष्ण अमावस्या तक कुल 16 दिन तक पितरों का श्राद्ध किया जा रहा है। माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज स्वर्गलोक से धरती पर आते हैं। और 16 दिनों तक हमारे बीच रहते हैं। इसलिए पितर पक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों को खुश करने के लिए उनका मनपसंद भोजन बनाते हैं और दानधर्म का काम करते हैं।

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इस दिन सुबह से पितरों को श्राद्ध करने के लिए लोग घरों में आंगन को चावल आटे से स्वागत चित्रण से पीतल के लोटे में जल और दातुन रखकर तालाब या नदी में तिथि के अनुसार श्राद्ध देकर घर में विधि-विधान से पूजापाठ कर घर में बने पकवानों से भोग लगाते हैं।

इस दिन सभी परिवार के लोग इकट्ठा होकर अपने पितरों को मिलाने की परंपरा पूरा करते हैं। श्राद्ध के दिनों में कौओं का महत्व बढ़ जाता है। यदि श्राद्ध के सोलह दिनों में यह घर की छत का मेहमान बन जाएं, तो इसे पितरों का प्रतीक और अतिथि स्वरूप माना गया है। इसीलिए श्राद्ध पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धा से पकवान बनाकर कौओं को भोजन कराते हैं। हिंदू धर्मशास्त्रों ने कौए को देवपुत्र माना है और यही वजह है कि हम श्राद्ध का भोजन कौओं को अर्पित करते हैं। लक्ष्मी नारायण वैष्णव ने बताया कि 16 तिथियों का महत्व होता है।