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पितृ पक्ष पर कौवों को क्यों कराया जाता है भोजन, जानिए इसका खास महत्त्व

Bhawna Chaudhary

Publish: Sep 15, 2019 15:27 PM | Updated: Sep 15, 2019 15:27 PM

Mahasamund

पितृ पक्ष पर कौवों को क्यों कराया जाता है भोजन, जानिए इसका खास महत्त्व

पितृपक्ष का महीना चल रहा है। इस पक्ष में अपने पूर्वजों को याद कर विधिपूर्वक जो भी पिंडदान कर श्राद्ध किया जाता है, जिससे आशीर्वाद प्राप्त होता है।इस पक्ष में कौवों की पूछपरख भी अत्यधिक होती है। कौवों को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है। लेकिन अब कौए नजर नहीं आते। कौवे के विकल्प के रूप में लोग बंदर, गाय और अन्य पक्षियों को भोजन का अंश देकर अनुष्ठान पूरा कर रहे हैं। कौवे की कई प्रजातियां हैं, जो अब धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं।

पितृ पक्ष पर कौवों को क्यों कराया जाता है भोजन, जानिए इसका खास महत्त्व

बिगड़ रहे पर्यावरण की मार कौओं पर भी पड़ रही है। स्थिति यह है कि श्रद्धा में अनुष्ठान पूरा करने के लिए कौआ तलाशने से भी नहीं मिल रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से नगर व अंचलों में कौओं की संख्या कम हो गई है। कौंआ सर्वाहारी पक्षी होता है कर्ण कर्कश आवाज में कांव-कांव करने वाला काले रंग का पक्षी कौआ बहुत उद्दंड, धूर्त और चालाक पक्षी माना जाता हैं। वह सड़ा-गला पदार्थ, अनाज, दाल, जिंदा मृत चूहे कीट पतंगे टिड्डे, फूल आदि खाते हैं। इस तरह इसकी भूमिका पर्यावरण को स्वच्छ रखने की भी है।

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रखा गया भोजन भी रखते हैं याद
गांवों में कौवे अपने लिए भोजन को छप्परों में छिपाकर रखते हैं और वह सुरक्षित रखे गए भोजन के बारे में भी याद रखते हैं। भूख लगने पर कौवे अपने इस भोजन को खा लेते हैं। कौवे इतने शातिर होते हैं कि कोई अगर इन्हें मारने का प्रयास करे तो ये पलक झपकते ही फुर्र हो जाते हैं। कुछ वर्ष पहले गाँवों से लेकर नगर तक कौओं के झुंड के झुंड दिखाई देता था। लेकिन अब ये धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है प्रदूषण के कारण कौओं की संख्या तेजी से घटी रही है। वातावरण जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ रहा है। इनकी प्रजातियां विलुप्त हो रही है। वर्तमान समय में कौआ भी पक्षियों की संकटग्रस्त प्रजातियों में सम्मिलित हो गया है।

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कमी की वजह
कौओं के कम होने के तीन विशेष कारण बताए जाते हैं। पहला आजकल सूखे पेड़ कम ही दिखते हैं, जिस वजह से कौए उन पर घोंसला नहीं बना पाते। दूसरा कारण मरे हुए जानवरों को कौओं द्वारा खा लिया जाता हैं। और धीरे-धीरे ये कौओं की मौत का कारण बन जाता है। पंडित संतोष शर्मा ने बताया कि पितृ पक्ष में पितरों के भोजन स्वरूप कौओ को देने की मान्यता सदियों से चली आ रही हैं। पर यह भी सही कि कौवों की संख्या पहले की अपेक्षा काफी कम हैं। पहले घरों के आंगन या छत पर भोजन रखते ही इनका झुंड़ इक्कठा हो जाता था। प्रदूषित पर्यावरण व पेड़ों की कटाई इनकी प्रजाति की कमी का मुख्य कारण हैं।