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निजी स्कूलों की लापरवाही से कई विद्यार्थियों को नहीं मिली पुस्तकें, पढ़ाई भी प्रभावित

Bhawna Chaudhary

Publish: Sep 04, 2019 21:00 PM | Updated: Sep 04, 2019 17:02 PM

Mahasamund

निजी स्कूलों की लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।

महासमुुंद. निजी स्कूलों की लापरवाही का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। निजी स्कूलों ने शिक्षा सत्र 2019-20 में निशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण के तहत हिन्दी और अंग्रेजी मीडियम की अतिरिक्त पुस्तकों की मांग पाठ्य पुस्तक निगम से की थी।

जिला शिक्षा विभाग ने आवेदनों को पाठ्यपुस्तक निगम रायपुर भेजा था, जिसे डाइस कोड नहीं होने और पुस्तकों की संख्या स्पष्ट नहीं होने की वजह आवेदनों को अमान्य कर दिया। इसकी वजह से निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को अभी तक पुस्तक नहीं मिल पाई है। वर्तमान में हिंदी माध्यम के 3509 पुस्तक और अंग्रेजी माध्यम के 562 पुस्तकें नहीं मिल पाई हैं।

शिक्षा सत्र शुरू हुए तीन महीने पूरे हो चुके हैं, इसकी वजह से विद्यार्थियों का पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। आगामी दिनों में तिमाही की परीक्षा भी ली जाएगी, ऐसे में विद्यार्थियों को बिना पुस्तक पढ़े ही परीक्षा में बैठना होगा। जिला शिक्षा विभाग ने अब सभी विकासखंड अधिकारियों को पत्र जारी किया है कि निजी स्कूल जिला शिक्षा कार्यालय में आकर आवेदनों में सुधार करें और रायपुर पाठ्यपुस्तक निगम पेंशनबाड़ा की वेबसाइट में ऑनलाइन दर्ज करें।

शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिवर्ष निजी स्कूलों को दिसंबर में विद्यार्थियों की संख्या ऑनलाइन दर्ज कराने के लिए निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन निजी स्कूलों द्वारा संख्या अप्रेल माह में दिया जाता है। शासन सरकारी स्कूलों के अलावा निजी स्कूलों में भी अध्ययनरत कक्षा पहली से 10 वीं तक के विद्यार्थियों को पुस्तकें नि:शुल्क उपलब्ध कराती है। पिछले साल ही शुरू हुए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित अग्रेजी स्कूलों में भी किताबों का टोटा है। पिछले वर्ष भी ऐसी ही समस्या आई थी। निजी स्कूल के संचालक पुस्तकों के लिए जिला शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं। जिसकी वजह से विद्यार्थियों को परेशान होना पड़ रहा है।

इस वर्ष शासकीय स्कूलों में पुस्तकों का वितरण किया जा चुका है। निजी स्कूलों में ही अतिरिक्त पुस्तकों का वितरण होना है। निजी स्कूल के संचालक शिक्षा विभाग को समय पर डाटा उपलब्ध नहीं कराते हैं, इसकी वजह से समस्याएं आ रही है। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को ही भुगतना पड़ रहा है। पालक भी पुस्तकें नहीं होने से विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, मजबूरन उन्हें बाजार से पुस्तक खरीदना पड़ता है।