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Chhattisgarh में अषाढ़ माह में हुई सिर्फ पांच दिन बरसे बादल, किसानों को सावन में बारिश की उम्मीद

Akanksha Agrawal

Publish: Jul 17, 2019 14:48 PM | Updated: Jul 17, 2019 14:48 PM

Mahasamund

- छत्तीसगढ़ में अषाढ़ महीने में सिर्फ पांच दिन हुई झमाझम बारिश।
- हफ्तेभर से बारिश नहीं होने से लगातार बढ़ रही किसानों की चिंता।
- सावन के महीने में अच्छी बारिश की उम्मीद कर रहे छत्तीसगढ़ के किसान।

अरेकेल(बसना). मानसून की दगाबाजी व आसमान में ललचा कर आगे बढ़ रहे बादलों ने किसानों को मुसीबत में डाल दिया है। न बारिश हो रही है और न खेती-किसानी का काम आगे बढ़ पा रहा है। अब सावन महीने में किसानों को झमाझम बारिश की उम्मीद है।

तहसील से मिले आंकड़ों पर गौर करें, तो आषाढ़ महीने में सिर्फ पांच दिन ही अच्छी बारिश दर्ज की गई। अब पिछले दस दिनों से आसमान में बादल उमड़-घुमड़ रहे हैं, पर बारिश नहीं हो रही है। आसमान में रोज मंडराते बादल और हवा-तूफान को देखकर लोगों को ऐसा लग रहा है कि अब मूसलाधार बारिश होगी। थोड़ी देर बाद बादलों के छंट जाने के बाद निराशा हाथ लगती है। बदली, उमस और मानसून की बेवफाई से हर कोई परेशान हैं। तालाब, नदी-नाले और बांध भी प्यासे हैं।

टेंशन में हैं किसान
आने वाले पंद्रह दिनों तक मौसम ऐसा ही रहा तो धान की बोआई कर चुके किसानों को नुकसान होगा। उन्हें अपने खेतों में फिर बोआई करनी पड़ सकती है। वैसे भी इस साल खेती-किसानी का काम पिछड़ता दिख रहा है। किसान सावन महीने में बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

सिर्फ पांच दिन अच्छी बारिश, अब दगाबाजी
जिले में पांच दिन अच्छी वर्षा दर्ज की गई है। महासमुंद में 16 जून को 22 मिमी, बागबाहरा में 5, सरायपाली में 4.8 मिमी, 17 जून को महासमुंद में 5.2 मिमी, पिथौरा में 3, बागबाहरा में 2, बसना में 31.0, सरायपाली में 28.4 मिमी, 22 जून को महासमुंद में 94.01, पिथौरा में 87 बागबाहरा में 56, सरायपाली 9.02, 1 जुलाई को महासमुंद में 45.2, पिथौरा में 7, बागबाहरा में 9.2, बसना में 10, सरायपाली में 7.2, 2 जुलाई को महासमुंद में 47, पिथौरा में 41, बागबाहरा में 27, बसना में 89, सरायपाली में 66.4, 3 जुलाई को बसना में 78, सरायपाली में 55.2 मिमी बारिश दर्ज की गई।

 

पिछले कई दिनों से मौसम में परिवर्तन का दौर चल रहा है। दिन व रात का तापमान बढ़ा हुआ है। दिन में उमसभरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर रखा है। पंखे-कूलर व एसी फिर चालू हो गए हैं। इससे राहत तभी मिलेगी, जब दो-तीन दिन तक अच्छी बारिश होगी। वहीं आषाढ़ के महीने में हुई बारिश से भू-जल स्तर जरूर बढ़ा है, पर किसानों की चिंता कम नहीं हुई है। अभी तक जितनी बारिश दर्ज की गई, उतने में खेती-किसानी नहीं हो सकती है।

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