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दल में बंटकर 20 हाथियों ने रौंदा खेत, ग्रामीणों में दहशत

Bhawna Chaudhary

Publish: Aug 19, 2019 22:30 PM | Updated: Aug 19, 2019 16:47 PM

Mahasamund

खेतों में हरियाली देख एक बार फिर हाथियों के दल ने कुकराडीह बंजर में डेरा डाल दिया है।

महासमुंद. खेतों में हरियाली देख एक बार फिर हाथियों (Elephant) के दल ने कुकराडीह बंजर में डेरा डाल दिया है। तीन दिन पहले तक 20 हाथी अलग-अलग समूह में बंटे थे और अब सब कुकराडीह बंजर में इकट्ठे हो गए हैं। अभी 17 हाथी कुकराडीह बंजर हैं, दो हाथी लहंगर व गुड़रूडीह के बीच और एक हाथी केशलडीह में देखे गए हैं।

हाथियों के दल ने बीती अछोला, कुकराडीह बंजर और लहंगर में फसल को नुकसान पहुंचाया है। इसके पहले दिन मोहकम, लहंगर, पीढ़ी, गढ़सिवनी और केशलडीह में अलग-अलग दल में बंटकर हाथियों ने नुकसान पहुंचाया था। हाथियों की आमद होने के बाद हाथी प्रभावित गांवों के किसानों ने फिर डर बैठ गया है। शाम के बाद डर की वजह से घर से निकल भी नहीं सकते। ग्रामीणों के मुताबिक 20 हाथियों के समूह में तीन टस्कर हैं। ये भोजन की तलाश करते हैं, फिर समूह के बाकी हाथी भी उनके साथ चल पड़ते हैं। अभी ट्यूबवेल के भरोसे खेतों में धान के पौधे बड़े हो रहे हैं।

रोपा-बियासी का काम भी चल रहा है। ऐसे में हाथियों की धमक से किसानों की चिंता बढ़ गई है। गजराज वाहन आने के बाद मिट्टी तेल और टार्च उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, इसलिए किसान रात में अपने खेतों में नहीं जा पा रहे हैं। हाथी भगाओ फसल बचाओ समिति के संयोजक राधेलाल सिन्हा ने कहा कि पिछले एक महीने से हाथी सिरपुर क्षेत्र के गांवों में विचरण कर रहे हैं। अभी कुकराडीह बंजर में हाथियों का दल मौजूद है। यहीं से शाम पांच बजे के बाद अलग-अलग समूह में निकलते हैं और फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। अभी बारिश के महीने में हाथियों की आमद से फिर मुश्किलें बढ़ गई है। हाथी कभी भी निकल जाते हैं। अभी हाथियों का समूह अलग-अलग दल में गांवों के आसपास विचरण कर रहा है। इससे किसान भयभीत हैं।

चार साल में बढ़ी हाथियों की संख्या
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2016 में सिरपुर क्षेत्र में हाथियों की संख्या करीब 13 थी। अभी इनकी संख्या 20 तक पहुंच गई है। इसमें तीन टस्कर बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक दल में 10 मादा, 7 बच्चे और तीन टस्कर हैं। पिछले चार वर्षों में सिरपुर इलाके में हाथियों की चहल-कदमी बढ़ी है। किसानों को फसल का नुकसान भी हो रहा है। खासकर धान फसल की कटाई के समय हाथी ज्यादा उत्पात मचाते हैं। इधर, गांव के समीप विचरण कर रहे हाथियों को जंगल क्षेत्र में गमन कराने का प्रयास भी किया जा रहा है। दो महीने पहले तक कुछ हद तक इस प्रयास में सफलता भी मिली। अब हाथी फिर से गांव की तरफ आ गए हैं। ग्रामीणों का टेंशन फिर बढ़ गया है।