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क्षेत्रवाद में मुखर पटियाला के सांसद डाॅ धर्मवीर गांधी अब "रेफरेंडम-2020" के समर्थन में उतरे

Prateek Saini

Publish: Jun 25, 2018 16:22 PM | Updated: Jun 25, 2018 16:22 PM

Ludhiana

क्षेत्रवाद में मुखर पंजाब के पटियाला से आम आदमी पार्टी से निलंबित सांसद डाॅ धर्मवीर गांधी अब खालिस्तान की मांग के लिए सिख फाॅर जस्टिस की ओर से प्रस्तावित रेफरेंडम-2020 के समर्थन में उतर आए हैं...

राजेंद्र सिंह जादौन की रिपोर्ट...

(चंडीगढ): क्षेत्रवाद में मुखर पंजाब के पटियाला से आम आदमी पार्टी से निलंबित सांसद डाॅ धर्मवीर गांधी अब खालिस्तान की मांग के लिए सिख फाॅर जस्टिस की ओर से प्रस्तावित रेफरेंडम-2020 के समर्थन में उतर आए हैं। डाॅ गांधी ने कुछ समय पहले ही पंजाब की नदियों से राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली को दिए जाने वाले पानी की कीमत वसूल करने की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। वे ये भी मांग कर रहे हैं कि प्रदेश के विकास की योजनाओं में केन्द्र का दखल समाप्त होना चाहिए।

 

शांती के साथ हो सकती है अलग राष्ट्र की मांग-गांधी

पूरी तरह क्षेत्रवादी एजेंडा लेकर चल रहे डाॅ धर्मवीर पंजाब में तीसरा मोर्चा खड़ा करने का इरादा भी रखते हैं। उनका इस बात पर जोर है कि पंजाबियत की हिफाजत के लिए संयुक्त मोर्चा गठित किया जाना चाहिए। अब डाॅ गांधी कह रहे हैं कि पंजाब रेफरेंडम-2020 लोकतांत्रिक और कानूनी अधिकार के तहत पूरा किया जा सकता है। शातिपूर्ण ढंग से पृथक स्वदेश की मांग की जा सकती है।

 

आप के नेता पहले भी जता चुके है समर्थन

आम आदमी पार्टी के ही वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैहरा भी परोक्ष में रेफरेंडम-2020 का समर्थन कर चुके है। हालांकि जब पार्टी नेतृत्व ने उनसे जवाब मांगा तो खैहरा ने सफाई दी थी कि उन्होंने रेफरेंडम-2020 का समर्थन नहीं किया बल्कि उनके बयान को तोड-मरोड कर पेश किया गया। लेकिन आम आदमी पार्टी से रेफरेंडम-2020 के समर्थन में आवाज उठती रही है। सुखपाल खैहरा के बाद पार्टी के विधायक नजर सिंह ने भी कहा कि सिखों को न्याय नहीं मिलने पर रेफरेंडम-2020 जैसी स्थितियां पैदा होना स्वाभाविक है।

 

यह दलील रख रहे गांधी

डाॅ धर्मवीर गांधी की दलील यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भाषा, धर्म, क्षेत्र और नस्ल के आधार पर पृथक स्वदेश की मांग कानून सम्मत है। साथ में वे यह भी कहते है कि उनका खालिस्तान से कुछ भी लेना-देना नहीं है। वे खालिस्तान की मांग से स्वयं को अलग करते हुए कहते हैं कि वे पंजाब और पंजाबियत के पक्ष में है। वे धर्म के आधार पर अलग राष्ट्र की मांग के विरोध में हैं। उनका कहना है कि सभी के लिए समान मानक इस्तेमाल किए जाने चाहिए। जब लोग हिन्दू राष्ट्र की मांग कर रहे हैं तो सिख राष्ट्र की मांग करने वालों पर देशद्रोह का मुकदमा क्यों दर्ज किया जा रहा है।