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... जब 1977 में छिटकी थी सत्ता

Dinesh Saini

Publish: Mar 08, 2019 14:34 PM | Updated: Mar 08, 2019 14:34 PM

Loksabha Election 2019

लोकसभा चुनाव में अब तक कांग्रेस को छोटे-छोटे ऐसे दलों से चुनौती मिलती आई थी, जिनका समूचे देश में आधार नहीं था...

- अनंत मिश्रा
जयपुर।

आपातकाल के बाद हुए छठे लोकसभा चुनाव ने देश की राजनीति को पूरी तरह से पलट कर रख दिया। आपातकाल के दौरान उपजी तानाशाही के बाद हुए इन चुनावों में पहली बार मतदाताओं ने तीन दशकों से सत्ता की सवारी कर रही कांïग्रेस को करारी शिकस्त दे डाली। लोकसभा चुनाव में अब तक कांग्रेस को छोटे-छोटे ऐसे दलों से चुनौती मिलती आई थी, जिनका समूचे देश में आधार नहीं था।

25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगने के बाद तमाम विपक्षी नेता गिरफ्तार करके जेलों में डाल दिए गए थे। देश में विपक्ष पूरी तरह से नदारद सा नजर आने लगा था। सन् 1971 में हुए लोकसभा चुनाव की अवधि पूरी तरह होने के बावजूद चुनाव नहीं कराए गए। 18 जनवरी 1977 में आपातकाल के दौरान ही लोकसभा चुनाव कराने की घोषणा हुई। विपक्षी नेताओं को भी रिहा कर दिया गया। आपातकाल लगने से पहले लोकनायक जयप्रकाश नारायण, इंदिरा गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल चुके थे।

चुनाव की घोषणा हुई तो जयप्रकाश नारायण की पहल पर तमाम विपक्षी दल कांग्रेस का मुकाबला करने के लिए मंच पर आए। आनन-फानन में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की जनसंघ, चरण सिंह के नेतृत्व वाले भारतीय लोकदल, स्वतंत्र पार्टी, सोशलिस्ट पार्टी और संगठन कांग्रेस ने मिलकर 23 जनवरी को जनता पार्टी का गठन किया। चुनाव प्रचार शुरू हुआ तो मतदाताओं में खामोशी थी, लेकिन जनता पार्टी की सभाओं में उमड़ रही भीड़ से लोकतंत्र का मिजाज समझ में आने लगा था। मतदान हुआ तो 60 फीसदी से अधिक मतदाता वोट डालने पहुंचे। पांच राष्ट्रीय दलों के साथ 34 दल चुनावी समर में भाग्य आजमा रहे थे। 23 मार्च को आए परिणामों ने देश की राजनीतिक तस्वीर को बदल दिया। तीस वर्ष से सत्ता में बैठी कांïग्रेस को बाहर का रास्ता दिखाकर मतदाताओं ने पहली बार गैर कांïग्रेसी सरकार को मौका दिया। 24 मार्च 1977 को जनता पार्टी संसदीय दल के नेता मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। चरण सिंह, जगजीवन राम, अटल बिहारी वाजपेयी, एलके आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडीस, सुरजीत सिंह बरनाला और सिकंदर बख्त ने भी मंत्री पद का कार्यभार संभाला। राज नारायण, मधु दण्डवते, शांतिभूषण, हेमवतीनंदन बहुगुणा और बीजू पटनायक भी मोरारजी मंत्रिमंडल के सदस्य निर्वाचित हुए।

इंदिरा और संजय भी हारे
जनता पार्टी की आंधी में कांग्रेस की दिग्गज और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को रायबरेली सीट पर राज नारायण के हाथों 55 हजार से अधिक मतों की शिकस्त खानी पड़ी। संजय गांधी भी अमेठी सीट पर 75000 मतों से हार गए।

अनेक राज्यों से कांग्रेस साफ
कांग्रेस अनेक राज्यों में खाता खोलने को तरस गई। राजस्थान की 25 में से 24 सीटों पर जनता पार्टी विजयी रही। नागौर से कांग्रेस के नाथूराम मिर्धा विजयी रहे। मप्र की 40 में से एकमात्र छिंदवाड़ा सीट पर कांग्रेस के गार्गीशंकर मिश्रा को जीत मिली। पंजाब की सभी सीटों पर भी अकाली दल और जनता पार्टी को जीत मिली।