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ललितपुर में बिजली बनी समस्या, सरकार के दावे हो रहे झूठे साबित

Karishma Lalwani

Publish: Aug 11, 2019 19:32 PM | Updated: Aug 12, 2019 10:17 AM

Lalitpur

- 70 मेगावाट के 4 सोलर प्लांट और 1980 मेगावाट का एक बजाज थर्मल पावर प्लांट होने के बावजूद जनपद तरस रहा है विद्दुत सप्लाई को
- शहरी क्षेत्र में लगभग 18 घण्टे तहसील स्तर पर 13 से 15 घण्टे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 10 से 12 घण्टे की हो पा रही है आपूर्ति
- विद्दुत विहीन गांव के ग्रामीण कई बार विधुत सप्लाई के लिए डीएम को दे चुके है ज्ञापन

- विभागीय अधिकारियों के अनुसार बरसात में लाइन फॉल्ट और विद्दुत चोरी के साथ बिलों का भुगतान न होना विधुत सप्लाई में बाधक

ललितपुर. एक कहावत है "चिराग तले अंधेरा यानी कि डार्कनेस अंडर द लैंप। जनपद ललितपुर की स्थिति कुछ इसी कथन को सत्य आधारित कर रही। जनपद की विद्युत आपूर्ति (Electricty Supply) बदहाल स्थिति में है। जिला मुख्यालय पर 18 घंटे की सप्लाई रहती है। तहसील मुख्यालय पर 13 से 15 घंटे की सप्लाई रहती है और ब्लॉक स्तर पर या ग्रामीण क्षेत्रों में 10 से 12 घंटे सप्लाई लोगों को मिलती है। ये हाल तब है जब ललितपुर को विद्युत उत्पादन का हब माना जाता है। यहां बजाज थर्मल पावर प्लांट संचलित है, जो विद्युत उत्पादन कोयले के माध्यम से करता है। इसमें तीन यूनिट है और तीनों यूनिट 1980 मेगावाट विद्युत का उत्पादन करती हैं। इसके साथ ही जनपद में चार सोलर प्लांट प्राइवेट कंपनियों द्वारा लगाए गए हैं जिन की उत्पादन क्षमता कुल मिलाकर 70 मेगा वाट के आसपास है। इन सभी सुविधाओं के बावजूद जनपद की बदहाल विद्युत व्यवस्था बदहाल है। जबकि जनपद की विद्युत उत्पादन क्षमता के आंकलन के अनुसार, ललितपुर झांसी दो दर्जन जनपद इससे रोशन हो सकते हैं।

लालटेन युग में जीने को मजबूर ग्रामीण

21वीं सदी में भी ललितपुर के ग्रामीण लालटेन युग में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर दैलवारा का मोहल्ला नगरया है, जहां 2001 में विधायक निधि से विद्युत पोल लगाये गये थे। विद्युत तार भी डाली गई थी मगर वहां के घर आज तक रोशन नहीं हो पाए। इससे भी बदतर हाल है गांव रजपुरा का। यहां 20 सालों से लोगों ने लाइट नहीं देखी। 20 वर्ष पूर्व गांव का चयन किसी योजना में हुआ था। तब यहां विद्युत व्यवस्था आपूर्ति की गई थी। मगर 20 वर्ष पहले आए तूफान में यहां की विद्युत व्यवस्था तहस-नहस हो गई। तब से लेकर आज तक यहां के लोग अंधेरे में ही जीवन यापन कर रहे। इसी ब्लॉक के ग्राम टोड़ी का हनुमान गढ़ी मजरा, जमराड़ बांध के डूब क्षेत्र के विस्थापित ग्रामीणों के लिए ग्राम क्योलारी में बनाई कालौनी, पर्यटन क्षेत्र देवगढ़ के अंतर्गत ग्राम सबरी सहित ऐसे कई और ऐसे गांव और मजरे हैं, जिनमें विद्युत व्यवस्था बदहाल है।

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रजपुरा गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार जिला अधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक ज्ञापन दिए हैं, मगर अभी तक उनके गांव में विद्युत व्यवस्था सुचारु नहीं हो पाई है। जनपद की विद्युत व्यवस्था शासन प्रशासन के उन अधिकारियों और नेताओं के मुंह पर एक तमाचा है, जो मंच पर खड़े होकर शहर से लेकर गांव तक हर घर को रोशन करने की बात करते हैं। हर अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं को पहुंचाने की बात करते हैं। मगर उनकी योजनाओं से हकीकत से रूबरू यह गांव कराते है जिनका भाग्य सरकार द्वारा चलाई गई सौभाग्य योजना भी नहीं बदल सकी।

विद्युत विभाग की निकाली अर्थी

बदहाल विद्युत व्यवस्था के बारे में किसान नेता कीरत बाबा का कहना है कि विद्युत कटौती के चलते किसान सिंचाई नहीं कर पा रही। जिन गांवों में लाइट नहीं है वहां का किसान सिंचाई के लिए काफी जद्दोजहद करता है, लेकिन उन्हें सुविधा नहीं मिल रही। कई बार तो व्यापारियों ने विद्युत विभाग की अर्थी तक निकाली है और अर्थी निकालकर उसका दाह संस्कार भी किया है। मजदूर वर्ग भी इसलिए परेशान है कि बिजली कटौती के चलते वह काम नहीं कर पा रहे। मशीनें बिजली से चलती हैं। विद्युत कटौती के चलते न तो काम हो पाता है और न ही पर्याप्त मजदूरी मिलती है। इस मसले पर विद्दुत विभाग के अधिकारी पी.के.सिंह अधीक्षण अभियंता ने नेताओं की तरह दावे किए और विद्युत

व्यवस्था को जिला स्तर तहसील स्तर और ब्लॉक स्तर पर नेताओं की तरह ही पूर्ण रूप से सप्लाई बताया। कटौती के बारे में उन्होंने इस बात को भी कबूल किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 80 प्रतिशत उपभोक्ता विद्युत की चोरी कर रहे हैं। वह विद्युत बिलों का भुगतान नहीं करते हैं। इसी के साथ बरसात के दिनों में फॉल्ट की स्थिति बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में विद्युत व्यवस्था बहाल करने में काफी समय लगता है। जिन एजेंसियों से लाइट खरीदी जाती है, अब उन्हें एडवांस में पैसा देना पड़ता है। ऐसी स्थिति में चोरी बड़ी गंभीर समस्या बनी हुई है।