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मजदूरी करके मकान बनाने वाली कुशल कारीगर बन गई यह महिला

Hemant Kumar Joshi

Publish: Aug 01, 2019 12:37 PM | Updated: Aug 01, 2019 12:37 PM

Kuchaman City

रामनिवास कुमावत. कुचामनसिटी.

किरण कुमावत, एक ऐसा नाम जिसको घर की परिस्थितियों ने एक ‘कुशल कारीगर’ का नाम दे दिया। ग्राम जिजोट की यह महिला भी अन्य महिलाओं की तरह घर में कैद रहकर चौका बर्तन कर जीवन यापन करने के बजाए घर की माली हालत व परिस्थितियों में कड़ा संघर्ष किया। महिला किरण कुमावत आज अन्य कारीगरों की तरह मकान बनाने वाली कारीगर बन गई है।

किरण के परिवार में सात भाई-बहिन है। इसकी शादी सीकर जिले के बाय के पास झालूण्ड गांव हुई। उसके पति भी मजदूरी करते है। किरण के तीन बच्चे है जो विद्यालयों में पढ़ रहे है। अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले इसके लिए वह मजदूरी करने लग गई। मजदूरी करते करते कब किरण मकान बनाने में निपूण हो गई। किरण आज परिवार के बोझ के साथ जिम्मेदारियों का बोझ भी बखूबी निभा रही है, बल्कि अन्य महिलाओं को आगे बढऩे की प्रेरेणा भी दे रही है। किरण आज बिना किसी सहारे के केवल अपनी हिम्मत, मेहनत और हौसले से न केवल अपना जीवन बदला, बल्कि अपने बच्चों के जीवन की दशा और दिशा भी बदल रही है। इसके हौसले के आगे अब कठिनाईयों ने भी घुटने टेक दिए है।
केवल साक्षर, लेकिन कर लेती है नाप-चोक
महिला किरण कुमावत ने बताया कि वह केवल साक्षर है। लेकिन निर्माण कार्य के दौरान खुद ही नाप चोक कर लेती है। इसके साथ ही चिनाई, निपाई के साथ ही कारीगरी के हर कार्य में दक्षता हासिल है। हालांकि किरण के तीन अन्य भाई भी कारीगर है। जिसके कारण कभी कार्य के दौरान परेशानी आई तो भाई भी साथ दे देते है। किरण ने बताया कि पहले तो व छोटे-मोटे काम पर ही जाया करती थी, लेकिन कार्य में कुशलता होने पर अब बड़े-बड़े कार्य भी आसानी से कर लेती है। चाहे सर्दी-गर्मी हो या बारिश का मौसम, हर समय पुरुष की तरह जहां भी काम मिलता है, वहां काम पर चली जाती है। पुरुषों की तरह पत्थरों की चिनाई व निपाई करती है। किरण के साथ काम कर रहे अन्य कारीगरों ने बताया कि महिला कारीगर किरण कुमावत केवल साक्षर होते हुए भी 90 डिग्री का कोण आसानी से बना लेती है। निर्माण कार्य के दौरान किरण को कारीगरी का कार्य करते देखकर हर कोई अचभिंत रह जाता है।
डरो मत, परिस्थितियों से करो मुकाबला
भले ही किरण पढ़ाई-लिखाई में इतनी नहीं जानती है, लेकिन यह जरूर जानती है कि मनुष्य के सामने परिस्थितियां कितनी ही वितरित हो, यदि धैर्यपूर्वक कड़ा मुकाबला करे तो रास्ता अपने आप ही साफ हो जाएगा। उसने बताया कि आज समय बदल गया है। महिलाएं भी पुरूषों की तरह बराबर भागीदारी निभा रही है। ऐसे में अब महिला शक्ति को आगे आने की जरूरत है। इनका कहना है कि राज्य सरकार को भी कठिन परिस्थितियों में जीवन के लिए संघर्ष कर रही इन महिलाओं के लिए भी ऐसी योजनाएं संचालित करना चाहिए जिससे महिलाएं आगे बढ़ सके। किरण का कहना है अक्सर महिलाएं खुद को चारदिवारी में इसलिए कैद कर लेती है कि उन्हें लगता है वे कुछ कर नहीं सकती है। यदि कुछ करेंगे तो लोग मजाक उड़ाएंगे। उन्होंने बताया कि विशेषकर ग्रामीण परिवेश में रहने वाली महिलाएं ऐसी मानसिकता का शिकार होती है। उन्होंने बताया कि दरअसल उनमें यह मानसिकता केवल सामाजिक वातावरण की वजह से होती है। इसी डर की वजह से महिलाएं आगे नहीं बढ़ पाती है।