स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

सुप्रीम कोर्ट ने कुचामन के चिकित्सक के पत्र पर लिया एक्शन

Hemant Kumar Joshi

Publish: Aug 01, 2019 17:03 PM | Updated: Aug 01, 2019 17:03 PM

Kuchaman City

हेमन्त जोशी. कुचामनसिटी.

निजी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों तथा डीम्ड विश्वविद्यालयों की सभी सीटों का शुल्क निर्धारित नहीं होने के चलते निजी मेडिकल कॉलेजों में 50 फीसदी सीटें सीधे तौर पर बड़ी फीस लेकर भरी जाती है। जिससे मेडिकल के छात्रों को आर्थिक खामियाजा उठाना पड़ रहा है। इसी प्रकार नीट स्नातक एवं नीट-स्नातकोत्तर मेडिकल काउंसलिंग के नियमों में संशोधन करने के साथ ही संस्थान पर स्टेरेव रिक्तियों की काउंसलिंग बंद करवाने को लेकर मामला प्रधानमंत्री कार्यालय सहित सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को भी शिकायत भिजवाई गई है। कुचामन के एक चिकित्सक की ओर से भिजवाए गए पत्र पर सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका दायर की है।

कुचामन के चिकित्सक डॉ. सलीम राव ने प्रधानमंत्री कार्यालय सहित सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र भिजवाकर बताया कि वर्तमान में नीट स्नातक की अखिल भारतीय काउंसलिंग में 15 प्रतिशत सरकारी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों की सीट व कुछ डीम्ड विश्वविद्यालयों की सीट तथा नीट स्नातकोत्तर की अखिल भारतीय काउंसलिंग में 50 प्रतिशत सरकारी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों की सीटें एवं कुछ डीम्ड विश्वविद्यालयों की सीट सम्मिलित है। शेष 50 प्रतिशत निजी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों की मैनेजमेंट सीटों का फीस निर्धारण नहीं है। जिससे मेडिकल छात्रों को भारी भरकम फीस चुकाकर पढना पड़ रहा है। इसी प्रकार राज्य स्तरीय काउंसलिंग में 85 प्रतिशत सरकारी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों की सीटें व कुछ डीम्ड विश्वविद्यालय की सीटें एवं राज्य के समस्त निजी आयुर्विज्ञान महाविद्यालय की सीट एवं नीट स्नातकोत्तर की राज्य स्तरीय काउंसलिंग में 50 प्रतिशत सरकारी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों की सीटें, कुछ डीम्ड विश्वविधालयों की सीटें एवं राज्य के समस्त निजी आयुर्विज्ञान महाविद्यालय की सीटें सम्मिलित है। ऐसे में राज्य स्तरीय काउंसलिंग में 50 प्रतिशत सरकारी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों की सीटें एवं 50 प्रतिशत निजी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों की सरकारी दर की सीटों को सम्मिलित किया जाना चाहिए। जिससे मेडिकल छात्रों को अखिल भारतीय एवं अपने राज्य की काउंसलिंग हेतु ही आवेदन करना पड़े। एन.आर.आई. अभ्यर्थियों की अनुउपलब्धता एवं अन्य संस्थागत सीटों की ऊंची फीस के कारण (लगभग 15 प्रतिशत एवं 5 प्रतिशत या 10 प्रतिशत) सीटें निजी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों एवं डीम्ड विश्विविद्यालयों में रिक्त रह जाती हैं तब संस्थागत स्तर पर ऑफलाइन स्टेरेव रिक्ति चरण में इन सीटों को कमीशन एजेन्ट के जरिए ऊंची फीस लेकर भरा जा रहा है। ऐसे में ऑफलाइन स्टेरेव रिक्ति चरण का बंद किया जाए जिससे चिकित्सा शिक्षा में कमीशन एजेन्ट के मार्फत प्रवेश बंद हो सके। इस पत्र को जनहित याचिका मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दायर किया है वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कर ली गई है।
प्रवेश में हो निगरानी-
अखिल भारतीय एवं राज्य स्तरीय मॉप अप चरण के पश्चात् अखिल भारतीय एवं राज्य स्तरीय एवं स्टेरेव रिक्तियों को एम.सी.सी. मुख्यालय या राज्य प्रवेश एजेन्सी मुख्यालय पर आयोजित किया जाना चाहिए। जहां पर एम्स एवं डी.एन.बी. ऑफ लाइन काउंसलिंग की तरह अभ्यर्थी के सभी मूल दस्तावेज, सम्बन्धित फीस एवं प्रवेश संबंधी सभी प्रक्रिया निजी आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं डीम्ड विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों द्वारा एम.सी.सी. मुख्यालय या राज्य स्तरीय प्रवेश एजेन्सी मुख्यालय पर उनकी देखरेख में सम्पादित की जानी चाहिए। जिससे निजी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों एवं डीम्ड विश्वविद्यालयों के ऊंची फीस पर आधारित प्रवेश को बंद किया जा सके। इस दौरान प्रवेश फीस नेफ्ट/आर.टी.जी.एस./चैक/ड्राफ्ट द्वारा स्वीकार्य होनी चाहिए।
एन.एम. सी. बिल तभी होगा साकार-
केन्द्र सरकार का नीट एवं एन.एम.सी. बिल का उद्देश्य प्रतिभावान गरीब छात्रों को मेडिकल शिक्षा में प्रवेश देना हैं। इसके लिए केन्द्र सरकार को सभी राज्य सरकारों, सभी प्रवेश शुल्क निर्धारण समितियों, सभी निजी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों एवं सभी डीम्ड विश्वविद्यालयों से शुल्क के डाटा प्राप्त कर केन्द्रीय स्तर पर एक प्रवेश शुल्क निर्धारण समिति गठन किया जाना चाहिए। जो देश के सभी निजी आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों एवं डीम्ड विश्वविद्यालयों की सभी 100 प्रतिशत सीटों का फीस का निर्धारण करें।

इनका कहना-
मैने पीएमओ कार्यालय व सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिख कर मेडिकल विद्यार्थियों की समस्या से अवगत कराया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका दायर की है। पीएमओ ने भी शिकायत दर्ज कर ली है।
डॉ. सलीम राव
चिकित्सक, कुचामन