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13 सरकारी कार्यालयों में लगी 35 लाख रुपए की मशीनें नहीं आ रही उपयोग

Hemant Kumar Joshi

Publish: Sep 03, 2019 11:23 AM | Updated: Sep 03, 2019 11:23 AM

Kuchaman City

 

हेमन्त जोशी/रामनिवास कुमावत. कुचामनसिटी.

आमजन को डिजिटल बनाने के लिए गत वर्ष शुरु की गई ईमित्र प्लस योजना एक साल बाद भी परवान नहीं चढी है। शहर के 13 दफ्तरों में 35 लाख 36 हजार रुपए की लागत से लगाई गई यह मशीनें महज शो पीस बनकर पड़ी है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग एवं संचार विभाग की ओर से लगाई यह मशीनें डिजिटल इण्डिया मिशन के तहत लगवाई गई थी। जिसमें आम जन दफ्तरों से संबंधित सभी आवश्यक सूचनाएं इस मशीन से प्राप्त कर सकते हैं।

 

राजस्थान सरकार की अति महत्वपूर्ण ई-मित्र परियोजना के सफल संचालन एवं क्रियान्वयन को आमजन के उपयोग के लिए पूर्णत: डिजिटल एवं सुलभ बनाने के लिए कुचामन शहर के सरकारी कार्यालयों में सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग की ओर से गत वर्ष सितम्बर माह में यह मशीनें स्थापित की गई थी। लेकिन जिस उद्देश्य से यह मशीनें लगाई गई थी, वह उद्देश्य पूरा नहीं हुआ और यह मशीनें धूल फांकने लगी।

मशीन में यह सुविधाएं
इस मशीन से पीवीसी कार्ड प्राप्त करने की सुविधा है। इस मशीन में 32 इंच एलईडी स्क्रीन एवं 17 इंच की टच स्क्रीन, सीपीयूए वेब कैमरा कैश असेप्टर, कार्ड रिडर, मैटेलिक बोर्ड, रसीद के लिए थर्मल प्रिंटर, लेजर प्रिंटर आदि मौजूद है। कियोस्क में दो तरह की स्क्रीन होगी, जिसमें 32 इंच की स्क्रीन में वीडियो कांफ्रेसिंग की सुविधा एवं 17 इंच की टच स्क्रीन में ईमित्र की सुविधाएं उपलब्ध है।

इन कार्यालय में पहुंची मशीन
यह ईमित्र प्लस मशीन पंचायत समिति परिसर, नगरपालिका, ब्लॉक सांख्यिकी कार्यालय, महिला एवं बाल विकास विभाग, कुचामन महाविद्यालय, विद्युत विभाग, जलदाय विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, कृषि विभाग, राजकीय चिकित्सालय, सामाजिक सुरक्षा अधिकारी कार्यालय, तहसील व उपखण्ड कार्यालय में लगाई गई थी।
ई मित्र प्लस पर यह होते हैं काम
ईमित्र प्लस सर्विस एटीएम के माध्यम से शहरवासियों को सरकारी सेवाओं जैसे बिजली, पानी के बिल जमा करना, जमाबंदी व नकल प्राप्त करना, मूल निवास प्रमाण-पत्र प्रिन्ट करना, जाति प्रमाण-पत्र प्रिन्ट करना, विवाह प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, दिव्यांग पंजीकरण प्रमाण पत्र कई सेवाएं बिना किसी सहायता के प्राप्त कर सकते हैं। इन सेवाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए भुगतान नकद, कार्ड स्वेप, नैट बैंकिंग, क्रेडिट व डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग द्वारा किया जा सकता है।मशीन में उपलब्ध दुसरी एलईडी स्क्रीन एवं वैब कैमरे के माध्यम से ब्लॉक, जिला व राज्य स्तर के उच्चाधिकारियों से सॉफ्ट वीसी के जरिए विडियों कान्फ्रेस की सुविधा भी उपलब्ध है।

यह था उद्देश्य
सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के प्रोग्रामर शिवराज सोनी ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से ‘डिजिटल इण्डिया मिशन’ को साकार करने की कड़ी में राज्य में वर्तमान में संचालित ई-मित्र परियोजना को आमजन के डिजिटल उपयोग के लिए ई-मित्र प्लस से जोड़ा गया है। कार्यालयों में यह मशीन स्थापित होने से शहरवासियों को डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। लेकिन सरकार और विभाग का यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सका।

क्या है हकीकत

यह मशीनें सभी दफ्तरों में लगा दी गई लेकिन कहीं पर भी यह मशीन शुरु नहीं हैं। महज आईटी केन्द्र में यह मशीन संचालित हो रही है। उपखण्ड कार्यालय, तहसील, नगरपालिका जैसे मुख्य सरकारी कार्यालयों में भी इस मशीन का उपयोग नहीं हो रहा है। जिससे आम जन को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा। निर्माण विभाग कार्यालय में यह मशीन ही कमरे में कैद होकर पड़ी है। सामाजिक सुरक्षा कार्यालय में यह मशीन बरसात में खराब हो गई।

कर्मचारियों को ही नहीं पता क्या है मशीन

पत्रिका टीम ने लाखों रुपयों की इन मशीनों की सच्चाई जानने के लिए कार्यालयों में पहुंची तो उपखण्ड कार्यालय के कर्मचारियों ने बताया कि लगने के बाद यह मशीन शुरु ही नहीं हुई है। निर्माण विभाग में यह मशीन कमरे में बंद है और कर्मचारी ने मशीन नहीं होने की बात कह दी। दूसरे कर्मचारियों ने बताया कि मशीन कमरे में है और चाबी बाहर चाय वाले पास है। तहसील परिसर में यह मशीन बंद मिली, कर्मचारियों ने बताया कि लोग इस मशीन को काम में नहीं लेते है। जलदाय विभाग में मशीन तो चालू मिली लेकिन यहां भी यह मशीन कभी काम में नहीं आई। नगरपालिका और पंचायत समिति परिसर में भी यह मशीनें धूल फांक रही है।


आम जन को नहीं है इनकी जानकारी

यह मशीनें दफ्तरों में लगवा दी गई लेकिन आमजन को इन मशीनों के बारे में जानकारी नहीं होने के चलते लोग इनका उपयोग नहीं करते। यही कारण है कि दफ्तरों में यह मशीनें धूल फांक रही है। आम जन आज भी इस मशीन से होने वाले कार्यों के लिए दफ्तर के चक्कर लगा रहे है और बैरंग लौट रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी/कर्मचारी भी लोगों को इस मशीन का उपयोग करना नहीं बता रहे।

इनका कहना है....
13 स्थानों पर चालू है मशीन
डिजिटल इण्डिया मिशन में ईमित्र प्लस मशीनें लगवाई गई थी। हमारे विभाग ने गत वर्ष इन मशीनों को शुरु करवा दिया था। सभी जगहों पर मशीन चालू है।
शिवराज सोनी, प्रोग्रामर
सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग