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खतरे में जिंदगी, सस्ते नमक के नाम पर बिक रही गंदगी

Hemant Kumar Joshi

Publish: Sep 09, 2019 10:56 AM | Updated: Sep 09, 2019 10:56 AM

Kuchaman City

हेमन्त जोशी. कुचामनसिटी.

Life in danger, dirt being sold in the name of cheap salt प्रदेश की सबसे बड़ी नमक मण्डी नावां और कुचामन में रिफाइनरियों के मलबे को ही नमक के नाम पर सस्ती दर पर बेचा जा रहा है। कहने को तो यह नमक व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार किया जाना बताया जाता है। हकीकत में यह नमक थैलियों में पैककर ग्रामीण इलाकों और प्रदेश के बाहर खाद्य उपयोग के लिए बेच रहे हैं।

Life in danger, dirt being sold in the name of cheap salt इसके बावजूद न तो नमक के दरोगा कहे जाने वाले अधिकारी कोई कार्रवाई करते है और ना ही खाद्य विभाग की ओर से कोई जांच की जा रही है।
पत्रिका टीम ने नमक पिसाई संयत्रों का दौरा कर जानकारी जुटाई तो सच सामने आया कि पिसाई की अवैध इकाइयों पर रिफाइनरियों से निकलने वाले मलबे को नमक में मिलाकर पिसाई की जा रही है। जिसे पैकेट में बंद करके दूसरे राज्यों में खाद्य नमक के रुप में भिजवाया जा रहा है। खास बात यह है कि नमक के अलग-अलग ब्रांड की भी नकल की जा रही है। जिनकी ना तो कॉपीराइट के तहत कार्रवाई होती है और ना ही खाद्य नमक की जांच होती है।


क्या है रिफाइनरियों का मलबा
dirt being sold in the name of cheap salt नावां में एक दर्जन से अधिक नमक की आधुनिक रिफाइनरियां संचालित है। जिनमें नमक को ट्रिपल रिफाइंड करके तैयार किया जा रहा है। नमक में मुख्य रुप से सोडियम क्लोराइड की मात्रा होती है। लेकिन रिफाइनरी के प्रोसेस में सोडियम क्लोराइड निकालने के बाद ही यह वेस्टेज निकलता है। इन रिफाइनरियों में नमक रिफाइंड के प्रोसेस के बाद निकलने वाला नमक का सफेद मलबा भी रिफाइनरी संचालकों का खर्च निकाल रहा है। इन मलबे को साधारण नमक पिसाई संयत्र वाले उद्यमी सस्ते भावों में खरीद कर वापस नमक में मिला रहे है।

बेच रहे जहर, नहीं रखी जा रही नजर
नमक उत्पादन के बाद सीधे पिसाई किए जाने वाले नमक में कई अशुद्धियां रहती है। इस नमक में आयोडीन भी पूरी तरह से नहीं मिलाया जा सकता। जिसके चलते यह नमक खाने योग्य नहीं होता। sold in the name of cheap salt नमक पिसाई संयत्रों की ओर से खाद्य नमक के उत्पादन के लिए न तो खाद्य विभाग की ओर से कोई लाइसेंस लिया गया है और न ही अपनी रजिस्टर्ड ब्रांड के नमक को तैयार किया जा रहा है। पड़ताल में सामने आया कि पैकिंग की जा रही नमक की थैलियों पर भी फर्म का एड्रेस व फूड लाइसेंस के नम्बर तक दर्ज नहीं है।

इनका कहना-
बिना शुद्ध किए नमक बना कर बेचने के मामले में हम कोई कार्रवाई नहीं कर सकते है। इसके लिए खाद्य विभाग की ओर से ही कार्रवाई की जा सकती है। इस तरह का काम अवैध है इसके लिए सरकार को लिखा जाएगा।
भजनलाल मीणा
नमक उपाधीक्षक, नावां।
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2 महिनें पहले ही नमक के सेम्पल लिए थे, यदि रिफाइनरियों के मलबा मिलाकर नमक के पैकेट बनाए जा रहे हैं तो शीघ्र ही अभियान चलाकर इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राजेश जांगिड़
खाद्य सुरक्षा अधिकारी, नागौर।